उत्तराखंड: गैर-कृषिकारी भूजल निकासी पर अब जल मूल्य/प्रभार लागू — कैबिनेट ने लिया अहम निर्णय
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में गैर-कृषि उपयोग के लिए भूजल पर शुल्क लागू करने का निर्णय सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में शामिल रहा। इसके साथ ही सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन नीति समेत अन्य विकास-संबंधी प्रस्तावों को भी मंज़ूरी दी।

उत्तराखण्ड।देहरादून:-
उत्तराखंड सरकार ने गैर-कृषिकारी उपयोग के लिए भूजल निकालने पर अब जल मूल्य/प्रभार (Water Charges) लागू करने का निर्णय कैबिनेट बैठक में मंज़ूर किया है। यह निर्णय 28 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में लिया गया।
क्या है नया प्रावधान इस फैसले के अनुसार:
केवल कृषि एवं कृषि-संबंधित उपयोग तथा सरकारी पेयजल व्यवस्था को छोड़कर, सभी अन्य उद्देश्यों के लिए भूजल निकालने पर शुल्क देना अनिवार्य होगा।
शुल्क की दरें अलग-अलग क्षेत्रों में लागू होंगी :- जैसे सुरक्षित, अर्ध-गंभीर, गंभीर और अतिदोहित (over-exploited) क्षेत्र।
औद्योगिक इकाइयाँ, होटल, रेसिडेंशियल अपार्टमेंट/ग्रुप हाउसिंग, वॉटर पार्क, वाहन धुलाई सेंटर, स्वीमिंग पूल आदि जैसे उपयोगकर्ताओं के लिए यह प्रभार लागू होगा।
किसका लक्ष्य है यह निर्णय?
सरकार के अनुसार यह नीति:
भूजल के अनियंत्रित दोहन को रोकने का प्रयास करेगी
जल संसाधनों का सतत प्रबंधन सुनिश्चित करेगी
औद्योगिक और वाणिज्यिक उपयोग के लिए नियमन का ढांचा प्रदान करेगी ये निर्णय राज्य के जल संसाधनों को संरक्षित करने और अत्यधिक दोहन को रोकने की दिशा में लिया गया है।
कौन प्रभावित होगा?
इस नियम का सीधा प्रभाव उन उपयोगकर्ताओं पर पड़ेगा जो:
भूजल का व्यावसायिक रूप से उपयोग करते हैं
वाणिज्यिक इमारतों और बड़े आवासीय प्रोजेक्ट के लिए जल निकालते हैं
होटल, मनोरंजन पार्क, औद्योगिक इकाइयों आदि में भूजल का उपयोग होता है
लेकिन खेती तथा सरकारी पेयजल प्रावधानों पर यह शुल्क लागू नहीं होगा।
अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
काबीनेट ने इस निर्णय के साथ कई अन्य प्रस्तावों को भी मंज़ूरी दी, जिनमें प्रमुख हैं:
उत्तराखंड ग्रीन हाइड्रोजन नीति, 2026 को मंज़ूरी देना, ताकि स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और हरित हाइड्रोजन उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके।
निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को अनुमति, जिससे शिक्षा क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा।
हेल्थ वर्कर्स के लिए ट्रांसफर नियमों में सुधार तथा भूमि आर्जन से जुड़े प्रावधानों को सुव्यवस्थित करना।
कुछ एयरस्ट्रिप्स को रक्षा मंत्रालय के सहयोग से सह-नागरिक और सैन्य उपयोग के लिए उपलब्ध कराना।
क्या यह निर्णय क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तराखंड एक हिमालयी राज्य है जहाँ भूजल स्तर और जल संसाधन पहले से ही सीमित और संवेदनशील हैं।
इस निर्णय से:
दोहन की नियंत्रण नीति स्पष्ट होगी
पानी का सौदा या अंधाधुंध उपयोग नहीं हो सकेगा
नीति-आधारित नियमन से जल संकट को टाला जा सकेगा हालाँकि, छोटे वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं के लिए यह नए आर्थिक प्रभार का बिंदु बन सकता है, पर नीति का मकसद स्पष्ट है। पानी को मुक्त संसाधन की तरह नहीं, उपलब्धता और संरक्षण के नजरिये से देखना।


