
चमोली/यूके साइबर न्यूज/14/11/2025: गौचर में 73 वॉं राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेले का आगाज हो गया है। गौचर मेले में पहले दिन ईष्ट रावल देवता की पूजा के बाद प्रातः स्कूली बच्चों ने प्रभात फेरी निकाली। मेलाध्यक्ष / जिलाधिकारी गौरव कुमार द्वारा झंडारोहण कर मार्चपास की सलामी ली गई। इस दौरान जिलाधिकारी ने सभी को मेले की शुभकामनायें दी। गौचर मेला मुख्य द्वार से चटवापीपल पुल तक एवं वापसी उसी रूट से होते हुये मुख्य मेला द्वार तक क्रास कण्ट्री दौड़ का आयोजन किया गया।
यह मेला 19 नवम्बर तक चलेगा जिसमें अनेक स्टाल लगाए गए है, जिनमें लोकल सामान की धमक भी दिखाई देगी। विद्युत झूले चरखी आदि मुख्य रूप से ग्रामीणों का ध्यान आकृषित करते है। हालांकि मेले अब राजनीतिक मंच का रूप ले रहा है।
आपको कुछ गोचर मेले के बारे में बताता हूँ –
गोचर मेला, उत्तराखंड के चमोली जिले में आयोजित एक राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेला है, जो उत्तराखंड के सबसे पुराने और ऐतिहासिक मेलों में से एक है। यह मेला मनोरंजन और खरीदारी के लिए प्रसिद्ध है और इसमें सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। 1943 में शुरू हुआ यह मेला मूल रूप से तिब्बती व्यापारियों और स्थानीय लोगों के बीच व्यापार का केंद्र था।
गोचर मेले की मुख्य बातें:
• स्थान: चमोली जनपद का गोचर।
• प्रकार: राजकीय औद्योगिक विकास एवं सांस्कृतिक मेला।
• महत्व: यह उत्तराखंड के सबसे पुराने और ऐतिहासिक मेलों में से एक है।
• विशेषताएँ:
• इसमें मनोरंजक सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं।
• यहां लोग मनोरंजन के साथ-साथ खरीदारी भी करते हैं।
• स्कूलों के बच्चों द्वारा मार्च पास्ट का कार्यक्रम भी होता है।
• ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
• इसकी शुरुआत 1943 में हुई थी।
• शुरुआत में तिब्बती व्यापारी ऊन, शिलाजीत, काला नमक और अन्य आयुर्वेदिक उत्पाद बेचते थे।
• 1962 में भारत-चीन संबंधों में समस्या के कारण तिब्बत के साथ व्यापार बंद हो गया।
• यह मेला चार धाम यात्रा मार्ग पर पड़ता है और राज्य के अन्य शहरों से सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।


