उत्तराखण्ड के पहाड़ी जिलों में भालुओं का आतंक।
सैकड़ों लोगों एवं मवेशियों को बना चुके है शिकार।

उत्तराखण्ड/चमोली/पौड़ी/पिथौरागढ़/यूके साइबर न्यूज। उत्तराखण्ड के पहाड़ी जिलों में भालुओं का आतंक दिन प्रदिन बढ़ते जा रहे है इस साल ये हमले कुछ ज्यादा ही दिख रहे है, लोग वन विभाग और वन मंत्री सुबोध उनियाल पर सीधे तौर पर उंगली उठा रहे है, इस संदर्भ में सरकार बैकफुट पर नजर आ रही है, तमाम कोशिशों के बाद भी भालुओं के हमलों में कोई कमी नजर नहीं आ रही है। इंसानों के साथ साथ भालू मवेशियों को भी अपना शिकार बना रहे है। वर्ष 2025 में अभी तक (दिसंबर की शुरुआत तक) की स्थिति इस प्रकार है:-
- कुल हमले: 71 हमले
- कुल घायल: 72 लोग
- कुल मौतें: 5 से 7 लोग।
ये मामले मुख्य रूप से चमोली, पिथौरागढ़, और पौड़ी जैसे पहाड़ी जिलों में सामने आए हैं। इसके साथ भालू उत्तराखण्ड में सैकड़ों मवेशियों को भी मार चुके है, लोग सरकार से सवाल पूछ रहे है कि ” इतने भालू उत्तराखण्ड में अचानक कहां से आ गए है? जिसका उत्तराखण्ड सरकार ने अभी तक कोई संतुष्टिपूर्वक जवाब नहीं दिया है।
विशेषज्ञ और अधिकारी इन हमलों के पीछे कुछ संभावित कारण बता रहे हैं:-
- भोजन की कमी: जंगलों में भोजन की कमी के कारण भालू गांवों और आबादी वाले क्षेत्रों की ओर आ रहे हैं।
- पकी हुई फसलें: इस समय मक्का और अन्य फसलें पक रही होती हैं, जो भालुओं को आकर्षित करती हैं।
- बदलता व्यवहार: भालुओं के व्यवहार में आक्रामकता बढ़ी है, जिसका अध्ययन सरकार द्वारा कराया जा रहा है।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष: वन क्षेत्र कम होने और आबादी के जंगल के पास जाने से मानव और भालू का आमना-सामना (Encounter) बढ़ गया है।

मानव-भालू संघर्ष को कम करने के लिए सरकार और वन विभाग निम्नलिखित उपाय कर रहे हैं:
- अध्ययन: सरकार ने भालू के आक्रामक व्यवहार के कारणों का अध्ययन कराने का निर्णय लिया है।
- जागरूकता: बच्चों और महिलाओं को वन्यजीवों की मौजूदगी के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
- झाड़ी कटान: बस्तियों के आस-पास जंगली झाड़ियों को काटने का अभियान चलाया जा रहा है ताकि भालू के छिपने की जगह कम हो।
- निगरानी: संवेदनशील क्षेत्रों में कैमरों से निगरानी रखी जा रही है और वनकर्मी लगातार गश्त कर रहे हैं।
- आर्थिक सहायता: प्रभावितों को आर्थिक सहायता तत्काल उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए हैं।
भालुओं के साथ साथ कई जिलों में गुलदार ने भी आतंक मचा रखा है, लोग दहशत में है, और अंधेरा होते हो घरों में दुबक जाते है।



