निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम; चौतरफा दबाव के बाद शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला
अभिभावकों को बड़ी राहत; इलेक्ट्रॉनिक व प्रिंट मीडिया की मुहिम और राजनीतिक दलों के संघर्ष ने रंग दिखाया—मुख्य शिक्षा अधिकारी का सराहनीय कदम

देहरादून। निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों के शोषण और नियमों की अनदेखी के खिलाफ चल रही लंबी लड़ाई में आज एक निर्णायक मोड़ आया है। UK Cyber News सहित अन्य मीडिया माध्यमों की निरंतर रिपोर्टिंग और क्षेत्रीय दलों (UKD) सहित तमाम विपक्षी संगठनों के सड़कों पर उतरे संघर्ष के बाद शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) विनोद कुमार ढौंडियाल द्वारा जारी ताजा निर्देशों ने अभिभावकों को बड़ी आर्थिक राहत पहुँचाने का काम किया है।
आदेश की बड़ी बातें: जो आपके लिए जानना ज़रूरी है
- किताबों की ‘कमीशनखोरी’ बंद: स्कूलों में अब केवल NCERT की पुस्तकें अनिवार्य होंगी। स्कूल अब किसी खास दुकान से किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए दबाव नहीं बना पाएंगे।
- फीस वृद्धि पर नकेल: अगले 3 वर्षों तक फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। यदि बहुत ज़रूरी हुआ, तो भी वृद्धि अधिकतम 10% ही हो सकेगी।
- पारदर्शिता का नया दौर: स्कूलों को अपनी वेबसाइट पर पाठ्यक्रमों और यूनिफॉर्म की सूची सार्वजनिक करनी होगी, ताकि अभिभावक उन्हें खुले बाजार से कम दाम पर खरीद सकें।
ICSE बोर्ड को छोड़कर शेष सभी पर लागू
विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश ICSE बोर्ड को छोड़कर प्रदेश के सभी मान्यता प्राप्त, सहायता प्राप्त और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों पर तत्काल प्रभाव से लागू होगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ कठोर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
विपक्ष की सक्रियता और मीडिया की गूँज
इस जीत का बड़ा श्रेय उन तमाम संगठनों और राजनीतिक दलों को जाता है जिन्होंने ज्ञापन और प्रदर्शनों के माध्यम से सरकार पर दबाव बनाए रखा। उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) और अन्य विपक्षी दलों ने जिस तरह से इस मुद्दे को जनता की अदालत में उठाया, उसी का परिणाम है कि आज प्रशासन को यह जनहितकारी प्रस्ताव पारित करना पड़ा।
शिक्षा विभाग का आभार और UK Cyber News की अपील
UK Cyber News इस संवेदनशील मुद्दे पर त्वरित और सख्त कार्रवाई के लिए शिक्षा विभाग और मुख्य शिक्षा अधिकारी का आभार व्यक्त करता है। जनहित में लिए गए ऐसे फैसले लोकतंत्र और शिक्षा व्यवस्था में जनता के विश्वास को मजबूत करते हैं।
हमारी अपील: विभाग ने नियम तो बना दिए हैं, लेकिन इनका पालन सुनिश्चित करना हम सबकी जिम्मेदारी है। यदि कोई स्कूल अब भी नियमों की धज्जियां उड़ाता है, तो हमें सूचित करें।



