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देहरादून: सरकारी स्कूलों की बदहाली का सच

स्कूलों में 'समग्र शिक्षा' की हकीकत, ऑडिट में सामने आई चौंकाने वाली खामियां

देहरादून:

सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और संसाधनों को मजबूत करने के सरकारी दावे अब सवालों के घेरे में हैं। केंद्र सरकार की ‘समग्र शिक्षा कार्यक्रम’ योजना के अंतर्गत देहरादून के 188 सरकारी स्कूलों में किए गए सोशल ऑडिट ने बुनियादी सुविधाओं की कलई खोलकर रख दी है। ग्रामीण विकास विभाग के अधीन ‘सामाजिक अंकेक्षण एवं जवाबदेही पारदर्शिता अभिकरण’ (उसाटा) की टीम ने जब इन स्कूलों का दौरा किया, तो वहां की बदहाल स्थिति ने व्यवस्था पर कई प्रश्नचिन्ह लगा दिए हैं।

​1. सुरक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का टोटा

​ऑडिट में सबसे चिंताजनक पहलू बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा पाया गया।

  • मेडिकल किट का अभाव: अधिकांश स्कूलों में प्राथमिक उपचार के लिए मेडिकल किट उपलब्ध ही नहीं थी। जिन गिने-चुने स्कूलों में यह किट मिली, उनमें रखी दवाइयां एक्सपायर्ड (समय सीमा समाप्त) हो चुकी थीं, जो सीधे तौर पर बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है।
  • अग्निशमन यंत्र नदारद: आपातकालीन स्थिति और आग से निपटने के लिए किसी भी स्कूल में अग्निशमन (Fire Safety) उपकरण नहीं पाए गए, जो भविष्य में किसी भी बड़ी दुर्घटना को न्योता देने जैसा है।

​2. डिजिटल साक्षरता और इंफ्रास्ट्रक्चर की बदहाली

​सरकार ने डिजिटल युग की ओर कदम बढ़ाने के लिए स्कूलों में कंप्यूटर सिस्टम तो पहुंचवा दिए, लेकिन उनका प्रबंधन शून्य है।

  • धूल फांक रहे कंप्यूटर: ऑडिट के दौरान पाया गया कि स्कूलों में लगाए गए कंप्यूटर सिस्टम का उपयोग ही नहीं किया जा रहा है, और वे धूल फांक रहे हैं।
  • मरम्मत का अभाव: स्कूल भवनों की हालत खस्ता है। कई स्कूलों में बिजली की वायरिंग टूटी हुई मिली और पंखे खराब अवस्था में पाए गए। इसके अलावा, छात्रों के लिए शौचालय जैसी अत्यंत बुनियादी सुविधा का भी कई जगहों पर अभाव देखा गया।

​3. प्रशासनिक और प्रबंधन स्तर पर लापरवाही

​स्कूल संचालन के नियमों में भी बड़ी चूक सामने आई है:

  • SMC से बेखबर शिक्षक: स्कूल प्रबंधन अभिभावक समिति (School Management Committee) को लेकर शिक्षकों में जानकारी का घोर अभाव है।
  • शिकायत निवारण का अभाव: छात्रों की शिकायतों को दर्ज करने के लिए किसी भी स्कूल में ‘शिकायत पेटी’ (Complaint Box) का प्रबंध नहीं किया गया है।
  • आपातकालीन जानकारी का अभाव: किसी भी विपत्ति के समय बच्चों की मदद के लिए जो टोल-फ्री नंबर स्कूलों में प्रदर्शित होने चाहिए, वे भी गायब मिले।

​4. अब आगे क्या?

​उसाटा की टीम ने सभी 188 स्कूलों का बारीकी से निरीक्षण किया है और पाई गई कमियों की एक व्यापक ऑडिट रिपोर्ट तैयार कर ली है। विभागीय सूत्रों की मानें तो यह रिपोर्ट बहुत जल्द शासन को सौंपी जाएगी, जिसके उपरांत इसे केंद्र सरकार को प्रेषित किया जाएगा। देखना यह होगा कि इस रिपोर्ट के बाद प्रशासन इन स्कूलों में सुधार के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।

UK Cyber News

Prem Padiyar

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Report By UK Cyber News