Dr. डी. डी. पंत: उत्तराखंड क्रांति दल के युगपुरुष को नमन
उत्तराखंड के 'भीष्म पितामह' जिन्होंने शिक्षा से राजनीति तक लिखा विकास का नया अध्याय
देहरादून:
आज का दिन उत्तराखंड के इतिहास में एक महान विभूति को याद करने का दिन है। हम बात कर रहे हैं कुमाऊं विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति और उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के प्रथम अध्यक्ष डॉ. देवी दत्त (डी. डी.) पंत जी की। एक कुशल शिक्षाविद, प्रखर विचारक और उत्तराखंड राज्य आंदोलन के सूत्रधार के रूप में उनका नाम इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
शिक्षा जगत के पुरोधा
डॉ. पंत का जीवन सादगी और उच्च विचारों का संगम था। कुमाऊं विश्वविद्यालय की स्थापना कर उन्होंने उत्तराखंड में उच्च शिक्षा की नींव रखी। एक प्रशासक के तौर पर उन्होंने हमेशा शैक्षणिक उत्कृष्टता और छात्रों के भविष्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनके लिए शिक्षा केवल डिग्री का माध्यम नहीं, बल्कि समाज निर्माण की एक शक्ति थी।

राजनीति में ‘क्रांति’ का शंखनाद
डॉ. डी. डी. पंत केवल एक शिक्षाविद ही नहीं थे, बल्कि वे एक दूरदर्शी राजनेता भी थे। जब उत्तराखंड की विशिष्ट पहचान और अधिकारों की बात आई, तो उन्होंने बिना संकोच के राजनीति के मैदान में कदम रखा। 25 जुलाई 1979 को ‘उत्तराखंड क्रांति दल’ (UKD) की स्थापना के समय उन्हें सर्वसम्मति से प्रथम अध्यक्ष चुना गया।
उनके नेतृत्व में यूकेडी ने इस आंदोलन को महज एक भावना से बदलकर एक तार्किक और संवैधानिक स्वरूप दिया। उन्होंने यह सिद्ध कर दिखाया कि उत्तराखंड की समस्याओं का समाधान केवल उसकी अपनी राजनीतिक इच्छाशक्ति में निहित है। उनका सक्रिय राजनीति में आना एक महान ‘त्याग’ था, क्योंकि उन्होंने अपनी सुखद शैक्षणिक पारी को छोड़कर राज्य की जनता के संघर्ष को अपना मिशन बनाया।
बलिदान और विरासत
डॉ. पंत का पूरा जीवन ‘सादा जीवन-उच्च विचार’ का जीता-जागता उदाहरण था। उन्होंने न कभी पदों की लालसा रखी और न ही कभी अपने सिद्धांतों के साथ समझौता किया। आज उत्तराखंड जिस ऊंचाई पर है, उसकी नींव में डॉ. डी. डी. पंत जैसे महापुरुषों का पसीना, बौद्धिक श्रम और निस्वार्थ बलिदान शामिल है।
उनकी पुण्यतिथि पर UK Cyber News उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है। उनके दिखाए मार्ग पर चलकर ही हम उत्तराखंड को एक सशक्त और समृद्ध राज्य बनाने का सपना साकार कर सकते हैं।



