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पौड़ी के अशासकीय इंटर कॉलेज में नियुक्तियों को लेकर उक्रांद ने उठाए गंभीर सवाल

मांगी उच्चस्तरीय जांच

देहरादून।

पौड़ी गढ़वाल जनपद के इंदिरापुरी स्थित एक अशासकीय इंटर कॉलेज में नियुक्तियों को लेकर उठे विवाद ने राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया है। उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और अभ्यर्थियों से अतिरिक्त धनराशि लिए जाने के आरोपों को गंभीर बताते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। दल का कहना है कि यदि शिक्षा व्यवस्था के भीतर भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता नहीं होगी तो इसका सीधा नुकसान योग्य एवं बेरोजगार युवाओं को उठाना पड़ेगा।

गुरुवार को उक्रांद केंद्रीय कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में दल के उपाध्यक्ष शांति प्रसाद भट्ट, महानगर अध्यक्ष प्रबीन चंद रमोला तथा पार्टी नेता संदीप ने संयुक्त रूप से कहा कि उन्हें प्राप्त जानकारी के अनुसार इंदिरापुरी स्थित संबंधित अशासकीय इंटर कॉलेज में हुई नियुक्तियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने कहा कि विद्यालय प्रबंधन पर नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान अभ्यर्थियों से कथित रूप से अतिरिक्त धनराशि लिए जाने के आरोप लगाए जा रहे हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग बनी चर्चा का विषय

उक्रांद नेताओं ने कहा कि इस पूरे प्रकरण से जुड़ी एक कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी चर्चा का विषय बनी हुई है। उनका कहना है कि मामले की वास्तविकता सामने लाने के लिए ऑडियो की फोरेंसिक जांच कराई जानी चाहिए। दल का मानना है कि बिना तकनीकी जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा, इसलिए विशेषज्ञ संस्थानों के माध्यम से रिकॉर्डिंग की सत्यता का परीक्षण कराया जाना चाहिए।

शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल

प्रेसवार्ता में नेताओं ने कहा कि शिक्षा केवल रोजगार का माध्यम नहीं बल्कि समाज निर्माण की आधारशिला है। यदि शिक्षण संस्थानों में नियुक्तियों के दौरान भ्रष्टाचार, पक्षपात या आर्थिक लेन-देन जैसी शिकायतें सामने आती हैं तो इससे शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में योग्य अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित होते हैं और प्रतिभा की जगह आर्थिक सामर्थ्य को महत्व मिलने का खतरा पैदा हो जाता है।

बेरोजगार युवाओं के हितों का मुद्दा

उक्रांद का कहना है कि प्रदेश के हजारों शिक्षित बेरोजगार युवा वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं की तैयारी करते हैं। ऐसे में यदि किसी भी नियुक्ति प्रक्रिया पर धन उगाही या अपारदर्शिता के आरोप लगते हैं तो युवाओं का विश्वास पूरी व्यवस्था से उठने लगता है। दल ने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में सरकार को शून्य सहनशीलता की नीति अपनानी चाहिए।

जांच पूरी होने तक भर्ती प्रक्रिया रोकने की मांग

दल ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि जब तक पूरे मामले की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। उक्रांद नेताओं का कहना है कि जांच के दौरान यदि नियुक्तियां जारी रहती हैं तो बाद में किसी भी निर्णय पर विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

उक्रांद ने सरकार के सामने रखीं 9 प्रमुख मांगें

प्रेसवार्ता के दौरान उत्तराखंड क्रांति दल ने इस मामले में सरकार और शिक्षा विभाग के समक्ष नौ प्रमुख मांगें भी रखीं।

दल ने मांग की कि इंदिरापुरी स्थित संबंधित अशासकीय इंटर कॉलेज में लगाए गए आरोपों की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए। मामले से जुड़ी कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग की फोरेंसिक जांच कराकर उसकी सत्यता का परीक्षण किया जाए। जांच पूरी होने तक संबंधित नियुक्ति प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।

उक्रांद ने यह भी मांग की कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी विद्यालय प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही प्रदेश के सभी अशासकीय विद्यालयों में पिछले पांच वर्षों के दौरान हुई नियुक्तियों की समीक्षा और विशेष ऑडिट कराया जाए।

दल का कहना है कि भविष्य में इस प्रकार के विवादों से बचने के लिए प्रदेश के सभी अशासकीय विद्यालयों में शिक्षकों की भर्ती हेतु एक समान अर्हता, एक समान चयन प्रणाली और केंद्रीयकृत भर्ती व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। इसके अलावा सभी नियुक्तियों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया, सार्वजनिक मेरिट सूची और पारदर्शी चयन प्रणाली को अनिवार्य बनाया जाना चाहिए।

उक्रांद ने भर्ती प्रक्रियाओं में भ्रष्टाचार रोकने के लिए स्वतंत्र शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने तथा शिक्षा विभाग द्वारा समयबद्ध जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की भी मांग उठाई है।

पूरे प्रदेश की भर्ती व्यवस्था पर उठाए सवाल

उक्रांद नेताओं ने कहा कि मामला केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं माना जाना चाहिए। यदि कहीं भी भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता की आशंका है तो पूरे प्रदेश में अशासकीय विद्यालयों की नियुक्ति व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए। उनका कहना है कि पारदर्शी और जवाबदेह भर्ती व्यवस्था ही शिक्षा संस्थानों की विश्वसनीयता बनाए रख सकती है।

सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग

इस अवसर पर उक्रांद नेता देव चंद उत्तराखण्डी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार, शिक्षा मंत्री तथा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को इस गंभीर मामले का तत्काल संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता। शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और अपारदर्शिता के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और पारदर्शी बनाना चाहती है तो ऐसे मामलों में त्वरित, निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही जांच की पूरी प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि जनता और अभ्यर्थियों का विश्वास बना रहे।

उक्रांद ने स्पष्ट किया है कि वह इस मामले को केवल एक संस्थान का मामला नहीं बल्कि प्रदेश के बेरोजगार युवाओं, शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और पारदर्शी भर्ती प्रणाली से जुड़ा व्यापक मुद्दा मानता है। अब निगाहें सरकार और शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि वे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

डिस्क्लेमर:
यह समाचार उत्तराखंड क्रांति दल द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर प्रकाशित किया गया है। समाचार में उल्लिखित तथ्य, आरोप, मांगें एवं बयान प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं। किसी भी पक्ष की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी यथोचित स्थान दिया जाएगा।
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Prem Padiyar

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