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आंदोलन नहीं,समाधान चाहिए: BAMS छात्रों की शांतिपूर्ण पहल

लंबित मामलों पर BAMS छात्रों का इंतजार, विश्वविद्यालय से जल्द फैसले की मांग

देहरादून।

उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय से संबद्ध आयुर्वेदिक महाविद्यालयों के BAMS सत्र 2019-20 के प्रभावित विद्यार्थियों का धैर्य अब परीक्षा की अंतिम सीमा पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। बीते दिनों विश्वविद्यालय परिसर में परिणामों और लंबित शैक्षणिक प्रक्रियाओं को लेकर छात्रों का आक्रोश उस समय सामने आया था, जब कुछ छात्र पानी की टंकी पर चढ़ गए थे और परिसर में पुलिस व प्रशासन के साथ हल्की नोकझोंक की स्थिति भी बनी थी। बाद में विश्वविद्यालय प्रशासन ने वार्ता कर छात्रों को शांत कराया और समाधान का भरोसा दिया था।

अब उसी घटनाक्रम के कुछ दिन बाद छात्र एक बार फिर विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद हैं, लेकिन इस बार उनका तरीका अलग है। उन्होंने किसी उग्र प्रदर्शन के बजाय “शांतिपूर्ण प्रतीक्षात्मक बैठक” शुरू की है। छात्रों का कहना है कि वे संघर्ष नहीं, बल्कि समाधान चाहते हैं और विश्वविद्यालय प्रशासन से समयबद्ध निर्णय की अपेक्षा कर रहे हैं।

शांतिपूर्ण आंदोलनरत अभ्यर्थी।

बैठक स्थल पर लगे पोस्टरों में साफ लिखा गया है

“हम विरोध नहीं, समाधान चाहते हैं”, “हम डॉक्टर बनने आए थे, आंदोलन करने नहीं”। इन संदेशों के माध्यम से छात्र यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार का टकराव पैदा करना नहीं, बल्कि अपने भविष्य को बचाने के लिए विश्वविद्यालय का ध्यान आकर्षित करना है।

चार वर्षों से अधिक समय से उलझा शैक्षणिक भविष्य

प्रभावित छात्रों का कहना है कि सत्र 2019-20 से जुड़े कई मामलों के कारण उनका पूरा शैक्षणिक कैलेंडर प्रभावित हुआ है। परिणामों में देरी, परीक्षाओं की अनिश्चितता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लंबा खिंचने से उनका करियर अधर में लटका हुआ है। इसी मुद्दे को लेकर जुलाई के अंतिम सप्ताह में विश्वविद्यालय परिसर में बड़ा विरोध प्रदर्शन हुआ था, जहां कुछ छात्र पानी की टंकी पर चढ़ गए थे। उस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच धक्का-मुक्की जैसी स्थिति भी बनी, हालांकि बाद में अधिकारियों ने बातचीत के जरिए मामला शांत कराया।

छात्रों का कहना है कि उस समय भी उन्हें आश्वासन मिला था कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाएगा, लेकिन अब तक कोई ठोस और समयबद्ध निर्णय सामने नहीं आया है। इसी कारण उन्होंने पुनः विश्वविद्यालय परिसर में बैठकर शांतिपूर्ण प्रतीक्षा शुरू की है।

आंदोलन हमारी मजबूरी है, पसंद नहीं

बैठक में शामिल विद्यार्थियों का कहना है कि उन्होंने आयुर्वेद चिकित्सा की पढ़ाई समाज की सेवा और डॉक्टर बनने के उद्देश्य से शुरू की थी। उनका सपना अस्पतालों में मरीजों का उपचार करना था, न कि विश्वविद्यालय परिसर में धरने पर बैठना।

एक छात्र ने कहा कि यदि समय पर परीक्षाएं, परिणाम और अन्य शैक्षणिक प्रक्रियाएं पूरी होतीं तो उन्हें आंदोलन जैसा कदम उठाने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती। उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत और परिवारों की आर्थिक उम्मीदें अब अनिश्चितता के कारण प्रभावित हो रही हैं।

पोस्टरों में झलक रही पीड़ा

बैठक स्थल पर लगाए गए पोस्टरों में छात्रों की मानसिक स्थिति भी स्पष्ट दिखाई देती है। कहीं लिखा है

हम विरोध नहीं, समाधान चाहते हैं” तो कहीं “हम डॉक्टर बनने आए थे, आंदोलन करने नहीं।”

छात्रों का कहना है कि यह केवल नारे नहीं, बल्कि उनके पिछले कई वर्षों के संघर्ष का सार हैं। उनका आरोप है कि प्रशासनिक विलंब का सबसे बड़ा नुकसान छात्रों को उठाना पड़ रहा है।

विश्वविद्यालय से समयबद्ध निर्णय की मांग

विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की है कि उनके लंबित मामलों पर स्पष्ट समयसीमा घोषित की जाए और निर्णय में अनावश्यक देरी समाप्त की जाए। उनका कहना है कि यदि कोई प्रशासनिक या कानूनी प्रक्रिया बाधा बन रही है तो उसकी भी पारदर्शी जानकारी छात्रों को दी जानी चाहिए।

उनका कहना है कि अनिश्चितता सबसे बड़ी समस्या है। यदि कोई निर्णय होना है तो वह शीघ्र और स्पष्ट होना चाहिए, ताकि छात्र अपने भविष्य की योजना बना सकें।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद भी समाधान की उम्मीद

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में वर्ष 2019-20 के AYUSH/BAMS प्रवेशों को लेकर कानूनी विवाद भी रहा है। इसी वर्ष उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय ने 2019-20 सत्र के कुछ AYUSH छात्रों के प्रवेशों को नियमित करने संबंधी महत्वपूर्ण निर्णय दिया था, जिसके बाद प्रभावित छात्रों को उम्मीद जगी थी कि उनकी शैक्षणिक प्रक्रिया भी सामान्य हो जाएगी।

हालांकि छात्रों का कहना है कि न्यायालय के निर्णयों और विभिन्न प्रशासनिक प्रक्रियाओं के बावजूद विश्वविद्यालय स्तर पर कई विषय अब भी लंबित हैं, जिनके कारण उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।

शांतिपूर्ण आंदोलन का भरोसा

छात्रों ने स्पष्ट किया है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, अनुशासित और लोकतांत्रिक रहेगा। उन्होंने कहा कि वे किसी प्रकार की अव्यवस्था नहीं चाहते और न ही कानून-व्यवस्था प्रभावित करना उनका उद्देश्य है।

उनका कहना है कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन संवेदनशीलता दिखाकर शीघ्र निर्णय लेता है तो यह विवाद आसानी से समाप्त हो सकता है।

छात्रों के समर्थन में उतरा उत्तराखण्ड क्रान्ति दल

इस बीच छात्रों के आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। शुक्रवार को उत्तराखण्ड क्रान्ति दल (यूकेडी) के एक शिष्टमंडल ने हर्रावाला स्थित उत्तराखण्ड आयुर्वेद विश्वविद्यालय पहुंचकर धरने पर बैठे BAMS सत्र 2019-20 के छात्रों से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुनने के बाद आंदोलन को अपना समर्थन दिया।

यूकेडी के महानगर अध्यक्ष प्रबीन रमोला ने कहा कि वर्षों की पढ़ाई पूरी करने के बावजूद छात्र परीक्षा परिणाम का इंतजार कर रहे हैं, जो प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि प्रशासनिक लापरवाही, संस्थागत उदासीनता या किसी भी प्रकार के प्रभाव के कारण विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है तो इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन से प्रभावित छात्रों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान करने की मांग की।

पार्टी के केंद्रीय महामंत्री राजेन्द्र बिष्ट ने छात्रों द्वारा विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित कॉलेज प्रबंधन पर लगाए गए मानसिक उत्पीड़न और दुर्व्यवहार जैसे आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थानों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने 2019 बैच सहित सभी प्रभावित विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम शीघ्र घोषित करने की मांग भी उठाई।

Ukd ने चेतावनी दी कि यदि छात्रों की न्यायोचित मांगों का जल्द समाधान नहीं हुआ तो पार्टी विद्यार्थियों के साथ मिलकर प्रदेशव्यापी जनआंदोलन शुरू करेगी। इस दौरान संगठन के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।

अब सबकी नजर विश्वविद्यालय प्रशासन पर

उल्लेखनीय है कि छात्रों की यह प्रतीक्षात्मक बैठक 4 अगस्त 2026 से लगातार जारी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि विश्वविद्यालय प्रशासन इस शांतिपूर्ण पहल को किस रूप में लेता है।

यदि प्रशासन समयबद्ध निर्णय लेकर छात्रों की शंकाओं का समाधान करता है तो वर्षों से चली आ रही यह समस्या समाप्त हो सकती है। लेकिन यदि निर्णय में और देरी होती है तो पहले पानी की टंकी पर चढ़कर हुए विरोध और अब शांतिपूर्ण प्रतीक्षात्मक बैठक के बाद छात्रों का धैर्य फिर टूट सकता है।

फिलहाल परिसर में माहौल शांत है। छात्र उम्मीद के साथ विश्वविद्यालय के अगले कदम का इंतजार कर रहे हैं। उनकी मांग केवल इतनी है कि उनके भविष्य को अनिश्चितता से बाहर निकालकर उन्हें वह अवसर दिया जाए जिसके लिए उन्होंने वर्षों पहले डॉक्टर बनने का सपना देखा था।

UK Cyber News

Prem Padiyar

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Report By UK Cyber News