
देहरादून (UK Cyber News)। उत्तराखंड को दुनिया की ‘योग राजधानी’ और ‘ग्लोबल वेलनेस डेस्टिनेशन’ बनाने के लिए प्रदेश सरकार पूरी ताकत झोंक रही है। हाल ही में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य की नई ‘योग नीति’ को मंजूरी दी है, जिसे ऐतिहासिक कदम बताया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इस नीति से प्रदेश के 23 हजार युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा।
लेकिन, इन सुनहरे आंकड़ों के पीछे एक कड़वा सच यह भी है कि जिस आयुष विभाग की कमान खुद मुख्यमंत्री के पास है, वहां पिछले दो वर्षों से नियमित नियुक्तियों का सूखा पड़ा है।
सरकारी दावों के बीच कुछ चुभते सवाल:
हालिया समाचार पत्रों (दिनांक 14-15 मार्च 2026 के आसपास के संदर्भ) में प्रकाशित आयुष विभाग की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं के बीच प्रदेश का शिक्षित युवा कुछ बुनियादी सवाल पूछ रहा है:


- तथ्य 1: नियुक्तियों का इंतजार: नई नीति के तहत 23 हजार रोजगार का लक्ष्य तो रखा गया है, लेकिन आयुष विभाग के अंतर्गत आने वाले विभिन्न केंद्रों में पिछले दो सालों से रिक्त पड़े स्थायी पदों को भरने की प्रक्रिया अभी तक ठंडे बस्ते में क्यों है?
- तथ्य 2: मुख्यमंत्री का प्रभार: आयुष विभाग सीधे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के पास है। ऐसे में यह उम्मीद की जा रही थी कि नियुक्तियां प्राथमिकता पर होंगी, लेकिन विभाग के पास फिलहाल ‘भविष्य की योजनाओं’ का तो अंबार है, पर ‘वर्तमान नियुक्तियों’ का डेटा मौन है।
- तथ्य 3: बजट और सब्सिडी बनाम वेतन: सरकार योग केंद्रों के लिए 20 लाख रुपये तक की सब्सिडी और आयुष विलेज के लिए भारी निवेश की बात कर रही है, लेकिन क्या सरकार के पास उन हजारों योग प्रशिक्षित युवाओं के लिए कोई ठोस रोडमैप है जो सालों से सरकारी भर्ती के विज्ञापन का इंतजार कर रहे हैं?
‘योग नीति’ की चमक और धरातल का अंधेरा
आयुष सचिव के बयानों के अनुसार, राज्य में 13 हजार से अधिक रोजगार सृजित होंगे और 10 हजार से अधिक योग अनुदेशकों को होम स्टे, रिसॉर्ट और होटलों में काम मिलेगा। यह योजना सुनने में जितनी आकर्षक है, क्रियान्वयन के स्तर पर उतनी ही जटिल।
विगत दो वर्षों में आयुर्वेद और योग के क्षेत्र में किसी बड़ी भर्ती परीक्षा का न होना यह दर्शाता है कि सरकार का पूरा ध्यान ‘प्राइवेट सेक्टर’ के भरोसे रोजगार छोड़ने पर है। सवाल यह है कि क्या सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रही है?
विज्ञापन नहीं, विश्वास चाहिए
उत्तराखंड का युवा अब केवल अखबारों की कतरनों और भव्य विज्ञापनों से संतुष्ट होने वाला नहीं है। यदि सरकार वास्तव में प्रदेश को योग का केंद्र बनाना चाहती है, तो उसे सबसे पहले अपने विभाग के रिक्त पदों को भरकर युवाओं का विश्वास जीतना होगा।
UK Cyber News की विशेष टिप्पणी:
योग हमें अनुशासन सिखाता है, और प्रशासन का पहला अनुशासन है, समय पर किए गए वादों को पूरा करना। मुख्यमंत्री जी, योग नीति का स्वागत है, लेकिन नियुक्तियों की ‘योग निद्रा’ कब टूटेगी?
विश्वसनीयता के लिए स्रोत (Sources):
- अमर उजाला/हिंदुस्तान/दैनिक जागरण (मार्च 2026): मुख्यमंत्री और आयुष सचिव के आधिकारिक बयान।
- सरकारी विज्ञप्ति: योग नीति-2026 के मुख्य बिंदु (20 लाख सब्सिडी, 23 हजार रोजगार)।
विभागीय रिकॉर्ड: पिछले 2 वर्षों में आयुष विभाग के अंतर्गत विज्ञापित रिक्तियों की अनुपलब्धता।
डिस्क्लेमर:-
इस रिपोर्ट में प्रकाशित तथ्य शासन द्वारा जारी नई ‘योग नीति-2026’ और विभिन्न प्रतिष्ठित समाचार पत्रों में समय-समय पर छपे आधिकारिक बयानों व विज्ञापनों पर आधारित हैं। लेख का उद्देश्य जनहित में सरकार की घोषणाओं और धरातल की वर्तमान स्थिति के बीच के अंतर को स्पष्ट करना है। न्यूज़ पोर्टल का उद्देश्य किसी की व्यक्तिगत छवि को ठेस पहुँचाना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप शासन-प्रशासन की जवाबदेही तय करना और जन-सरोकारों से जुड़े मुद्दों को उठाना है। विभाग की रिक्तियों और नियुक्तियों से संबंधित जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आंकड़ों और अभ्यर्थियों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर संकलित की गई है।


