UKD का महा-धमाका: स्वाभिमान मोर्चा का विलय, कर्नल देवरानी और लुसुन टोडरिया समेत सैकड़ों युवाओं ने थामा उक्रांद का दामन!”
युवा शक्ति का संकल्प: प्रेस क्लब में गूंजी 'मूल निवास' और 'जल-जंगल-जमीन' की रक्षा की शपथ।

देहरादून (प्रेस क्लब): उत्तराखंड की क्षेत्रीय राजनीति में आज एक ऐतिहासिक मोड़ देखने को मिला। प्रेस क्लब में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती की अध्यक्षता में उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) का कुनबा और भी विशाल हो गया। आज का दिन न केवल नियुक्तियों का रहा, बल्कि कई राजनैतिक धाराओं के एकीकरण का गवाह बना।
स्वाभिमान मोर्चा का पूर्ण विलय और लुसुन टोडरिया की एंट्री
आज की सबसे बड़ी खबर ‘स्वाभिमान मोर्चा’ का उक्रांद में पूर्ण विलय रहा। प्रखर वक्ता और ज़मीनी नेता लुसुन टोडरिया ने अपने सैकड़ों ऊर्जावान समर्थकों के साथ दल की विधिवत सदस्यता ग्रहण की। टोडरिया के आने से दल को युवाओं के बीच एक नई धार और तेवर मिलने की उम्मीद है।
यमकेश्वर विधानसभा में बढ़ी ताकत: कर्नल देवरानी और कई चेहरे शामिल
सिर्फ मोर्चा ही नहीं, बल्कि यमकेश्वर विधानसभा क्षेत्र से भी कई दिग्गजों ने उक्रांद का दामन थामा। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- कर्नल कैलाश देवरानी
- प्रमोद काला
- सुदेश भट्ट
इन भारी-भरकम चेहरों के साथ उनके दर्जनों साथियों ने भी उक्रांद की सदस्यता ली, जिससे यमकेश्वर क्षेत्र में संगठन की जड़ें और भी गहरी हो गई हैं।
शपथ: जल-जंगल-जमीन और मूल निवास की लड़ाई होगी तेज़
प्रेस क्लब में मौजूद सैकड़ों युवाओं ने हाथ आगे बढ़ाकर राज्य की अस्मिता और मूल निवास जैसे बुनियादी मुद्दों पर लड़ने का संकल्प लिया। अध्यक्ष सुरेंद्र कुकरेती ने सभी नवागंतुकों का स्वागत करते हुए कहा कि, “इन साथियों के जुड़ने से पहाड़ के हक-हकूक और जनहित की आवाज़ अब और बुलंद होगी।”
संपादकीय टिप्पणी: गैरसैण सत्र के ठीक बाद उक्रांद का यह शक्ति प्रदर्शन सत्ता के गलियारों में हलचल पैदा करने वाला है। क्षेत्रीय अस्मिता की लड़ाई अब नए चेहरों और नई ऊर्जा के साथ लड़ी जाएगी।
डिस्क्लेमर:
सीधी बात:
UK Cyber News पहाड़ की आवाज च और हम उत्तराखण का जल-जंगल-जमीन और जण-सरोकारों कूं समर्पित एक स्वतंत्र न्यूज पोर्टल छाँ। हमरू मुख्य काम अपणा राज्य की क्षेत्रीय अस्मिता, मूल निवास और बुनियादी मुद्दों कूं बिना कोई दबाव का प्रमुखता से उठोण च। हमरु उद्देश्य सिर्फ समाचार पोछोण ही नी, बल्कि उत्तराखंड का हितों की रक्षा करण भी च।


