परिवहन निगम के ठेका सिस्टम की खुली पोल: ब्लॉगर कैलाश चन्द्र जोशी ने दिखाया हल्द्वानी-दिल्ली बस का हाल, 20 की रफ्तार और घंटों का इंतजार!
एक जागरूक नागरिक और प्रतिष्ठित ब्लॉगर होने के नाते कैलाश चन्द्र जोशी ने अपनी जिम्मेदारी निभाई

रुद्रपुर/हल्द्वानी: अपनी हास्य शैली और जमीन से जुड़े कार्यक्रमों के लिए सोशल मीडिया पर खासे लोकप्रिय हल्द्वानी के मशहूर ब्लॉगर कैलाश चन्द्र जोशी आज एक अलग ही रूप में नजर आए। हमेशा लोगों के चेहरों पर मुस्कान लाने वाले जोशी आज सिस्टम की बदहाली देख बेहद आक्रोशित दिखे। दिल्ली जाते समय उनके साथ हुई एक घटना ने उत्तराखंड परिवहन निगम (UTC) के ‘ठेका सिस्टम’ की कलई खोलकर रख दी है।
क्या है पूरा मामला?
कैलाश चन्द्र जोशी किसी जरूरी काम से हल्द्वानी से दिल्ली के लिए रवाना हुए थे। उन्होंने सरकारी समझकर उत्तराखंड परिवहन निगम की बस पकड़ी, लेकिन सफर शुरू होते ही बस ने जवाब दे दिया। हल्द्वानी से रुद्रपुर के बीच ही यह बस चार बार खराब हुई। जब जोशी ने इसकी गहराई से पड़ताल की और यात्रियों के साथ लाइव वीडियो बनाया, तो एक सनसनीखेज सच सामने आया।
कैलाश चन्द्र जोशी के खुलासे के मुख्य बिंदु:
- सरकारी बोर्ड का ‘मुखौटा’: बस पर बड़े-बड़े अक्षरों में ‘उत्तराखंड परिवहन निगम’ लिखा है, लेकिन असलियत में यह बस पूरी तरह से ठेके (Contract) पर चल रही है। जोशी ने आरोप लगाया कि निगम के नाम का इस्तेमाल कर यात्रियों को गुमराह किया जा रहा है।
- 20 की रफ्तार और जान का जोखिम: वीडियो में जोशी ने दिखाया कि बस की हालत इतनी खटारा है कि यह 20 किमी प्रति घंटा की रफ्तार भी नहीं पकड़ पा रही है। दिल्ली जैसे लंबे सफर के लिए ऐसी जर्जर बस में 40-45 यात्रियों को बिठाना उनकी जान से सीधा खिलवाड़ है।
- बीच सड़क पर लाचार यात्री: घंटों से रुद्रपुर में फंसी इस बस के यात्रियों के लिए निगम ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की। यात्री परेशान होकर सड़क पर खड़े रहे, जबकि किराया उनसे पूरी सरकारी दर पर वसूला गया।
- ड्राइवर-कंडक्टर भी लाचार: पड़ताल में पता चला कि बस का स्टाफ भी ठेके पर है, जिसके पास यात्रियों की समस्याओं का कोई ठोस समाधान नहीं था।
ब्लॉगर जोशी का तीखा प्रहार:
कैलाश चन्द्र जोशी ने अपने वीडियो के माध्यम से सरकार और विभाग पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा कि “बड़ी-बड़ी डींगें हांकने से विकास नहीं होता, जमीन पर हकीकत कुछ और ही है।” उन्होंने आशंका जताई कि जिस तरह सब कुछ ठेके पर दिया जा रहा है, कहीं एक दिन सरकार भी ठेके पर न आ जाए। जोशी ने जनता से अपील की कि अगली बार सरकारी बस में बैठने से पहले यह जरूर सुनिश्चित कर लें कि वह वाकई सरकारी है या किसी निजी ठेकेदार की ‘खटारा’।
हास्य के बीच पहली बार गंभीर रुख:
कैलाश चन्द्र जोशी के प्रशंसकों के लिए उनका यह रूप नया था। पहली बार उन्होंने एक गंभीर जनहित के मुद्दे को इतनी प्रखरता से उठाया है। सोशल मीडिया पर उनके इस वीडियो को हजारों लोग देख रहे हैं और परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं।
डिस्क्लेमर:-
यह समाचार पूरी तरह से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध वीडियो साक्ष्यों और यात्रियों की शिकायतों पर आधारित है। पत्रकारिता के धर्म का निर्वहन करते हुए, हमारा उद्देश्य केवल सरकारी सेवाओं में सुधार लाना है।


