दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे: विकास का हाइवे या चुनावी माइलेज? UKD ने घेरा, बलूनी-रावत में जुबानी जंग तेज
विकास की चमक में न खो जाए पहाड़ का मूल निवास: यूकेडी की चेतावनी

देहरादून।
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन (14 अप्रैल 2026) के बाद से ही देवभूमि की सियासत में ‘रफ्तार’ को लेकर घमासान मचा हुआ है। जहाँ भाजपा इसे मील का पत्थर बता रही है और कांग्रेस इसे अधूरा काम कह रही है, वहीं क्षेत्रीय दल उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) ने इस पूरे प्रोजेक्ट के मूल उद्देश्य पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं।
UKD का तीखा हमला: पहाड़ के गांवों तक कब पहुंचेगी यह रफ्तार?
सबसे पहले बात उत्तराखंड की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करने वाले UKD की। एक्सप्रेसवे पर चल रही ‘क्रेडिट वॉर’ के बीच यूकेडी के वरिष्ठ नेताओं ने कड़ा रुख अपनाया है:
- गांवों की अनदेखी: UKD ने साफ कहा कि दिल्ली से देहरादून ढाई घंटे में पहुंचना दिल्ली वालों के लिए तो अच्छा हो सकता है, लेकिन पहाड़ के उन गांवों का क्या जहाँ आज भी सड़क नहीं है?
- पहाड़ का दोहन: दल का आरोप है कि ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स से केवल बाहरी पूंजीपतियों और भू-माफियाओं को फायदा होगा। यूकेडी ने सवाल उठाया कि जब राज्य में सख्त भू-कानून और मूल निवास की मांग उठ रही है, तब ऐसे एक्सप्रेसवे बाहरी दबाव को और बढ़ाएंगे।
- बयान: “हमें दिल्ली से देहरादून की नहीं, बल्कि पहाड़ के एक जिले से दूसरे जिले को जोड़ने वाली सुरक्षित सड़कों की जरूरत है। भाजपा और कांग्रेस केवल चुनावी फायदे के लिए सड़कों का ढोल पीट रहे हैं।”
भाजपा का पक्ष: बलूनी का रियलिटी चेक और मोदी की गारंटी
भाजपा की ओर से मोर्चा खुद सांसद अनिल बलूनी ने संभाला है। उन्होंने एक्सप्रेसवे पर सफर करते हुए वीडियो साझा किए और दावों की पुष्टि की:
- समय की बचत: बलूनी का कहना है कि ढाई घंटे का सफर अब एक हकीकत है। उन्होंने इसे प्रधानमंत्री मोदी की “कनेक्टिविटी विजन” की जीत बताया।
- आर्थिक विकास: भाजपा नेताओं का तर्क है कि इस एक्सप्रेसवे से राज्य में निवेश आएगा और चारधाम यात्रा के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को जाम से मुक्ति मिलेगी।
कांग्रेस का वार: रावत ने बताया चुनावी स्टंट
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत इस मुद्दे पर भाजपा को लगातार घेर रहे हैं। उन्होंने इसे ‘काल्पनिक यात्रा’ करार दिया:
- जाम की हकीकत: रावत ने तंज कसते हुए कहा कि ढाई घंटे का समय केवल हेलीकॉप्टर या वीआईपी काफिले के लिए संभव है। आम जनता आज भी आशारोड़ी और मोहंड के पास जाम में फंस रही है।
- श्रेय की राजनीति: कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रोजेक्ट की नींव उनके समय में रखी गई थी, लेकिन भाजपा अब आधे-अधूरे काम का उद्घाटन कर वाहवाही लूट रही है।
एक्सप्रेसवे की खास बातें (एक नजर में)
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विशेषता |
विवरण |
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कुल लागत |
लगभग ₹11,868 करोड़ |
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कुल दूरी |
210 किमी (पहले 235 किमी था) |
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समय का दावा |
2.5 घंटे (पहले 6-7 घंटे लगते थे) |
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खासियत |
12 किमी लंबा एशिया का सबसे बड़ा वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर |
राजनीतिक तपिश बढ़ी
2027 के विधानसभा चुनावों से पहले, यह एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क नहीं बल्कि राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन का जरिया बन गया है। जहाँ भाजपा इसे ‘विकास’ के रूप में बेच रही है, वहीं UKD और कांग्रेस इसे ‘अधूरा सच’ और ‘पहाड़ विरोधी’ बताकर जनता के बीच ले जा रहे हैं।


