
उत्तराखण्ड (यूके साइबर न्यूज) 01/11/2025:
इगास (बूढ़ी दिवाली): उत्सव और परंपरा
उत्तराखंड की पहाड़ी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा इगास, जिसे बूढ़ी दिवाली के नाम से भी जाना जाता है, दिवाली के लगभग 11 दिन बाद मनाया जाने वाला एक विशेष पारंपरिक पर्व है। यह पर्व भगवान राम के अयोध्या लौटने की देर से सूचना के कारण और गढ़वाल के महान योद्धा वीर भड़ माधो सिंह भंडारी की वीरगाथा के सम्मान में उल्लास पूर्वक मनाया जाता है।
इको-फ्रेंडली तकनीक: प्रकृति के प्रति सम्मान
उत्तराखंड के संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्र की रक्षा के लिए, उत्सव के दौरान पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जा रही है। पारंपरिक भैलों की जगह अब इको-फ्रेंडली उपकरणों और सोलर पावर आधारित LED लाइटिंग का उपयोग किया जा रहा है, जिससे उत्सव को प्रदूषण मुक्त और सुरक्षित बनाया जा सके।
ड्रोन शो और स्मार्ट लाइटिंग का समावेश

इस सांस्कृतिक त्योहार में आधुनिक तकनीक की झलक मिलती है, जहाँ आतिशबाजी की जगह पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए ड्रोनों से रंग-बिरंगे लाइट शो आयोजित किए जाते हैं। ये ड्रोन शो पर्व के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संदेशों को प्रभावशाली तरीके से प्रदर्शित करते हैं और पर्यटकों तथा स्थानीय लोगों के लिए अद्भुत अनुभव लेकर आते हैं।
तकनीकी नवाचार और पर्यटन अनुभव
उत्तराखंड सरकार की स्मार्ट पर्यटन पहल के तहत, डिजिटल टिकटिंग, QR कोड आधारित प्रवेश और मोबाइल ऐप्स पर्यटकों को बेहतर मार्गदर्शन, सुरक्षा और जानकारी प्रदान कर रहे हैं। इस पहल से न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिला है बल्कि युवाओं को रोजगार के अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।
UK CYBER NEWS की राय और सलाह:
उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को आधुनिक तकनीकी नवाचारों के साथ जोड़कर इसे सुरक्षित और समृद्ध बनाना आवश्यक है। यूके साइबर न्यूज इस संयोजन को उत्साहवर्धक मानते हुए पर्यटकों और स्थानीय लोगों से अपील करता है कि वे इस इको-फ्रेंडली और तकनीकी पहल को अपनाएं ताकि उत्तराखंड के त्योहार सुरक्षित, पर्यावरण-हितैषी और सांस्कृतिक रूप से जीवंत बने रहें।


