
देहरादून | विशेष रिपोर्ट (UK Cyber News)
उत्तराखंड में अगर आप अपनी छत पर सूरज की रोशनी से बिजली बनाकर ‘अमीर’ होने का सपना देख रहे हैं, तो जरा संभल जाइए। UPCL (उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड) ने एक ऐसा ‘मास्टरस्ट्रोक’ मारा है कि आपकी छत पर लगे सोलर पैनल अब शायद बिजली से ज्यादा ‘चिंता’ पैदा करेंगे।
नया फरमान जारी हो चुका है- अगस्त 2025 से आपकी मेहनत की अतिरिक्त (Surplus) बिजली सरकार सिर्फ ₹2 प्रति यूनिट में खरीदेगी। जी हाँ, आपने सही पढ़ा- सिर्फ दो रुपये!
1. विज्ञापन का हसीन सपना बनाम हकीकत का ‘झटका’
याद करिए वो बड़े-बड़े विज्ञापन – “छत पर लगाओ सोलर, बिजली बेचकर कमाओ लाखों” केंद्र की ‘पीएम सूर्य घर योजना’ के नाम पर जनता ने लाखों का निवेश किया, लोन लिए और छतों पर नीले पैनल बिछा दिए। लेकिन अब जब फसल काटने (कमाई करने) का वक्त आया, तो सरकार ने ‘हंसिया’ चला दिया।
- ₹2 यूनिट? भाई साहब, इतने में तो आजकल एक ढंग की माचिस या टॉफी भी मुश्किल से मिलती है, और सरकार आपसे ‘ग्रीन एनर्जी’ का प्रीमियम सौदा कर रही है।
2. बिजली विभाग की अनोखी गणित
UPCL आपसे बिजली खरीदेगा ₹2 में, और जब वही बिजली घूमकर आपके पड़ोसी के घर जाएगी, तो विभाग उससे वसूलेगा ₹7 से ₹9 तक। इसे कहते हैं— ‘आम जनता का तेल, विभाग का खेल’।
उपभोक्ता ने पैनल लगाए, मेंटेनेंस किया, छत घेरी… और मलाई खाएगा विभाग। निवेश जनता का, मुनाफा सरकारी तिजोरी का। क्या यही है ‘आत्मनिर्भर ऊर्जा’ का मॉडल?
3. ग्रीन एनर्जी पर ग्रे नीतियां
एक तरफ ग्लोबल वार्मिंग का रोना रोया जाता है, दूसरी तरफ जो इंसान पर्यावरण बचाने के लिए अपनी जेब ढीली कर रहा है, उसे ही हतोत्साहित किया जा रहा है। ₹2 की दर तय करके सरकार ने साफ संदेश दे दिया है— “बिजली उतनी ही बनाओ जितनी खुद फूंक सको, हमें बेचने की कोशिश की तो ‘कौड़ियों’ के भाव तौल देंगे।”
4. निवेश की ऐसी-तैसी
70 हजार से ज्यादा घरों में लगे सोलर सिस्टम अब शायद सिर्फ ‘शो-पीस’ बनकर रह जाएं। जिस उपभोक्ता ने यह सोचकर 3-5 किलोवाट का सिस्टम लगाया था कि एक्स्ट्रा बिजली से EMI निकल जाएगी, वो अब अपना सिर पकड़ कर बैठा है। ₹2 यूनिट के हिसाब से 100 यूनिट का ₹200 मिलेगा— इतने में तो देहरादून की ट्रैफिक जाम में गाड़ी का तेल फुक जाता है!
UK Cyber News का तीखा सवाल:
क्या बिजली कंपनियों के घाटे की भरपाई अब उन आम लोगों से की जाएगी जिन्होंने सरकार के ‘भरोसे’ पर अपनी छतों को पावर प्लांट बनाया था? अगर सौर ऊर्जा को बढ़ावा देना है, तो ये ‘मजाक’ बंद होना चाहिए।
सूरज की तपिश तो वही है, लेकिन सरकारी फाइलों ने उसकी ‘चमक’ छीन ली है। जनता अब कह रही है-
“धूप अपनी, छत अपनी, पैनल अपना… लेकिन मलाई बिजली विभाग की!”
डिस्क्लेमर (Disclaimer):
इस लेख में प्रस्तुत विचार और विश्लेषण उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन (UPCL) की वर्तमान नीतियों और सार्वजनिक आंकड़ों पर आधारित एक स्वतंत्र संपादकीय समीक्षा है। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को जागरूक करना और नीतिगत फैसलों के व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा करना है। लेख में की गई टिप्पणियां किसी संस्था की छवि धूमिल करने के लिए नहीं, बल्कि जनहित में व्यवस्था की विसंगतियों को उजागर करने के लिए हैं। सौर ऊर्जा में निवेश करने से पहले पाठक विभागीय दिशा-निर्देशों और अपडेटेड टैरिफ प्लान का स्वयं अध्ययन अवश्य करें।


