मिशन एप्पल पर गरजे पहाड़ी किसान
देहरादून स्थित गांधी पार्क में किसानों ने यूकेडी के समर्थन के साथ दिया धरना

उत्तराखण्ड के पहाड़ी किसानों द्वारा ‘एप्पल मिशन’ की सब्सिडी (अनुदान) और अंशदान (पैसे) के भुगतान में देरी को लेकर किए जा रहे आंदोलन को उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) का पूर्ण समर्थन करते हुए आज किसानों के साथ अस्थाई राजधानी देहरादून में स्थित गांधी पार्क में धरना दिया, देहरादून पुलिस सभी किसानों और यूकेडी नेताओं को डिटेन कर के पुलिस स्टेशन ले गई है ताकि ट्रैफिक व्यवस्था में कोई परेशानी न उत्पन्न हो। बता दें कि पहाड़ी किसान बहुत दिनों से आंदोलन कर रहे है।
पहाड़ी किसान मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों पर आंदोलन कर रहे हैं:
विलंबित सब्सिडी और अंशदान: किसानों का आरोप है कि ‘मिशन एप्पल’ योजना के तहत सेब के बाग लगाने के लिए सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान (सब्सिडी) और उनके द्वारा जमा किए गए अंशदान का भुगतान समय पर नहीं किया गया है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, किसानों को 2020 से आज तक भी अपने हिस्से का भुगतान नहीं मिला है।
योजना में बदलाव:
मिशन एप्पल योजना की शुरुआत में 80% सब्सिडी देने का प्रावधान था, जिसमें बाकी 20% का इंतजाम किसान सहकारिता विभाग से बिना ब्याज के ऋण लेकर कर सकते थे। हालांकि, बाद में सब्सिडी को घटाकर 60% कर दिया गया, जिससे किसानों के लिए 40% की भागीदारी करना मुश्किल हो गया।
वित्तीय संकट: भुगतान में देरी के कारण कई किसान और सेवा प्रदाता वित्तीय संकट और भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। उत्तराखंड क्रांति दल (उक्रांद) ने किसानों की इन मांगों को जायज ठहराते हुए उनके आंदोलन को पूर्ण समर्थन दिया है। उक्रांद का मानना है कि :
- राज्य सरकार को बकाया भुगतान तुरंत जारी करना चाहिए।
- किसानों को राहत देने के लिए योजना के तहत दी जाने वाली सब्सिडी की दरें फिर से बढ़ानी चाहिए।
- किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए कृषि और बागवानी क्षेत्र में उनकी आजीविका सुनिश्चित करनी चाहिए।
मिशन एप्पल योजना (Mission Apple Scheme)
उत्तराखंड में सेब उत्पादन को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई थी।
लक्ष्य: उत्तराखंड में सेब के बगीचों का विस्तार करना और किसानों को आधुनिक तकनीक से सेब की अति सघन बागवानी के लिए प्रोत्साहित करना।
प्रोत्साहन: योजना के तहत किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले सेब के पौधे लगाने के लिए सब्सिडी (अनुदान) दी जाती है।
स्थिति: योजना से जुड़े कई किसानों को समय पर सरकारी मदद न मिलने के कारण आंदोलन करना पड़ रहा है, जिससे योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं।


