Mr.INDIA बने वन विकास निगम के पूर्व MD? एक साथ दो जगहों पर रहने का जादुई कारनामा!
क्रूज पर मौज और होटल में आराम, एक ही समय के दो बिलों ने खोली पोल; क्या अब चलेगा भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई का हंटर?

देहरादून (UK Cyber News)
उत्तराखंड में ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ वाली सरकार के दावों के बीच एक ऐसा भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है, जिसने विभाग की साख पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। उत्तराखंड वन विकास निगम (UFDCL) के एक पूर्व प्रबंध निदेशक (MD) पर अपनी विदेश यात्रा के दौरान लाखों रुपये के फर्जी बिल लगाकर सरकारी धन के गबन का गंभीर आरोप लगा है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, उक्त अधिकारी ने विदेश यात्रा के दौरान अपनी सुख-सुविधाओं के लिए सरकारी खजाने का जमकर दुरुपयोग किया। चौंकाने वाली बात यह है कि बिलों में एक ही समय पर दो अलग-अलग जगहों (एक आलीशान होटल और एक क्रूज) पर ठहरने का खर्च दिखाया गया है। एक आम इंसान के लिए एक समय में दो जगह होना असंभव है, लेकिन सरकारी फाइलों में यह ‘जादू’ कर दिखाया गया ताकि लाखों रुपये डकारे जा सकें।
भ्रम दूर करें: वन विभाग बनाम वन विकास निगम
अक्सर आम जनता इन दोनों को एक ही समझ लेती है, लेकिन इस घोटाले की तह तक जाने के लिए इनका अंतर समझना ज़रूरी है:
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- वन विभाग (Forest Department): यह सरकार का वह अंग है जो जंगलों की रक्षा, वन्यजीवों के संरक्षण और पेड़ लगाने का काम करता है। यह एक नियामक (Regulatory) संस्था है।
- वन विकास निगम (Forest Development Corporation): यह सरकार की एक व्यापारिक इकाई (PSU) है। इसका काम जंगलों से प्राप्त लकड़ी और अन्य संसाधनों को बेचकर सरकार के लिए पैसा (Revenue) कमाना है।
विवाद का केंद्र: यह घोटाला इसी ‘विकास निगम’ में हुआ है, जहाँ अधिकारी पर व्यापारिक राजस्व की रक्षा करने के बजाय उसे निजी ऐश-ओ-आराम में उड़ाने का आरोप है।
सवालों के घेरे में ज़ीरो टॉलरेंस
भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने वाली सरकार के नाक के नीचे विभाग के मुखिया स्तर का अधिकारी अगर इस तरह के ‘अजब-गजब कारनामे’ करता है, तो सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठना लाजिमी है।
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- क्या विभाग के ऑडिट विभाग ने इन ‘डबल बिलों’ को नहीं देखा?
- क्या विदेश यात्राओं के नाम पर होने वाली इस फिजूलखर्ची पर कोई लगाम नहीं है?
- क्या सरकार ऐसे अधिकारियों पर सिर्फ जांच बैठाएगी या कोई कठोर दंडात्मक कार्रवाई भी होगी?
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रिपोर्ट: UK Cyber News डेस्क
डिस्क्लेमर: यह समाचार प्राप्त सूचनाओं और वायरल दस्तावेजों पर आधारित है। हमारा उद्देश्य किसी की छवि धूमिल करना नहीं, बल्कि जनता के पैसे के सदुपयोग और प्रशासनिक पारदर्शिता के प्रति जागरूकता फैलाना है।


