रजत जयंती वर्ष के अवसर पर छलका उक्रांद संयोजक काशी सिंह ऐरी का दर्द।
सोशल मीडिया पर लिखी लंबी पोस्ट, कहा राष्ट्रपति का विधानसभा भाषण एक स्क्रिप्ट थी।

उत्तराखण्ड, देहरादून (यूके साइबर न्यूज) 04/11/2025:
जहां एक तरफ सरकार उत्तराखण्ड बने 25 वर्ष पूरे होने को सिलवर जुबली के रूप में मना रही है, और इस अवसर पर अपने द्वारा किए गए विकास कार्यों को गिना रही है, राज्य में लगातार राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और कई केंद्रीय मंत्रियों का दौरा चल रहा है, इस क्रम में राष्ट्रपति का उत्तराखण्ड की विधान सभा भवन में अभिभाषण भी हुआ। इस अभिभाषण और सरकार के कार्यों से असंतुष्ट उत्तराखण्ड क्रांति दल के संरक्षक, राज्य आंदोलनकारी, पूर्व में रहे विधायक काशी सिंह ऐरी ने सोशल मीडिया में आज एक लंबा चौड़ा पोस्ट लिखा जिसमें उनका राज्य के प्रति झलक रही पीड़ा साफ साफ देखी जा सकती है।

पोस्ट इस प्रकार से है:-
उत्तराखंड का रजत वर्ष—संघर्षों के 25 वर्ष। यह केवल किसी एक व्यक्ति या दल का नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड की जनता, आंदोलनकारियों और हमारे पुरखों के त्याग का प्रतीक है। मैं उन सभी वीरों को नमन करता हूं जिन्होंने इस भूमि के सम्मान और अस्तित्व के लिए अपना जीवन समर्पित किया। पर आज जब हम पीछे मुड़कर देखते हैं, तो दिल दुखता है—यह वह उत्तराखंड नहीं है जिसका सपना हमने देखा था।आज महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जी President of India का विधान सभा में भाषण सुना। उनका अपने पहाड़ी राज्य में स्वागत है, लेकिन यह कहने में संकोच नहीं कि उनकी वाणी में संवेदना से ज्यादा स्क्रिप्ट की झलक थी। यह उम्मीद नहीं थी कि देश की प्रथम नागरिक भी सत्ता के लेखकों के हाथों की कठपुतली बन जाएँगी। गरीबों की पीड़ा, आंदोलनकारियों का बलिदान, और उत्तराखंड की जमीनी हकीकत उस भाषण के एक शब्द में भी नहीं थी। अफसोस की बात यह है कि राष्ट्रपति भवन तक भी चाटुकारिता की स्याही पहुँच चुकी है।आज उत्तराखंड वीवीआईपी दौरों और दिखावटी आयोजनों का केंद्र बन चुका है। जहाँ कभी जनांदोलन की मशालें जलती थीं, वहाँ अब लाल बत्ती की रोशनी और सरकारी कांच की दीवारें हैं। कुछ ही दिनों में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी भी आएंगे; वही पुराने जुमले, वही “विकास” के झूठे किस्से दोहराएंगे, और फिर लोग तालियाँ बजाकर सोचेंगे कि सब ठीक है। यही बन गया है हमारा नया “विकास मॉडल”—कैमरे चमकाओ, आंकड़े गढ़ो, और जनता को सपनों से बहलाओ।मैं अपने प्रदेश की जनता से सीधे कहना चाहता हूं—अब नींद से जागिए। जिनके हाथों में सत्ता है, वे आपका भविष्य बेचकर अपनी ऐशगाहें सजा रहे हैं। हमने संघर्ष आपके अधिकारों के लिए किया था, आपकी पीड़ा के लिए किया था, इन नेताओं की मौज-मस्ती के लिए नहीं। आज हमारे विधायक हों, मुख्यमंत्री हों या विपक्ष—सब के सब सत्ता की मलाई चाटने में व्यस्त हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पानी और रोज़गार पर कोई चर्चा नहीं। विकास के नाम पर केवल विनाशकारी परियोजनाएं हैं, जो पहाड़ की जड़ों को खत्म कर रही हैं।अगर सच में रजत वर्ष मनाना था, तो गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाया जाता। शिक्षा और स्वास्थ्य पर मिशन मोड में काम शुरू होता। पर इनके पास योजना नहीं, और न ही नीयत। हमने कहा था, जरूरत पड़े तो हम समाधान देंगे, दिशा देंगे। लेकिन ये भ्रष्ट अफसरशाही और दलाल राजनीति से चलने वाली सरकारें कुछ करना नहीं चाहतीं। इनकी राजनीति का सार यही है—वीवीआईपी के स्वागत में सड़कें जाम करो, शराब बाटो, और महिलाओं को दल के गुंडों के हवाले कर दो।जब भी कोई बड़ा साहब आता है, पूरा राज्य रुक जाता है। सड़कें खाली, लोग घेराबंदी में, एंबुलेंस रास्ते में फँसी—और ये सब सिर्फ इसलिए कि “प्रोटोकॉल” निभाया जाए। किसी को फर्क नहीं पड़ता कि किसी की जान जाए या बच जाए। यही उनका लोकतंत्र, यही उनका विकास है।मैं मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami और प्रधानमंत्री Narendra Modi , दोनों को खुली चुनौती देता हूं—सामने आएं। जनता के बीच बैठकर बहस करें और साबित करें कि पहाड़ों का विकास हुआ है। अगर एक भी तर्क टिक गया, तो मैं राजनीति से हमेशा के लिए संन्यास ले लूंगा। लेकिन हिम्मत दिखाइए—स्क्रिप्ट पढ़ने की नहीं, सच्चाई का सामना करने की।अगर सच में संवेदनशीलता बची है, तो सदन में आंदोलनकारियों, पूर्व विधायकों और जमीनी कार्यकर्ताओं को बुलाइए। उनसे बहस कीजिए, तब समझ में आएगा कि आज उत्तराखंड की जनता किन हालातों में जी रही है। लेकिन इन भाजपा Bharatiya Janata Party (BJP) और कांग्रेस Indian National Congress Uttarakhand के दलालों को जनता की दर्द भरी आवाज कहाँ सुनाई देगी? इनका धर्म बस इतना है—सत्ता की मलाई खाना, आदेशों से लिखे पन्ने पढ़ना, और कैमरे के सामने मुस्कुराना। यह राज्य आंदोलन से बना है, किसी पार्टी की जायदाद नहीं। अब जनता सब देख रही है, अब जनता बोलेगी।
यह उत्तराखंड झुकेगा नहीं, बिकेगा नहीं, अब जगेगा—गरजते शब्दों में, सच्ची लड़ाई के साथ।
जय उत्तराखंड। जय भारत।
Kashi Singh Airy (Uttarakhand Kranti Dal)


