भराड़ीसैंण में महा-घेराबंदी की तैयारी! आशीष नेगी की सरकार और विधायकों को सीधी चुनौती: जनता को जवाब दिए बिना गैरसैंण की सीमा से बाहर नहीं जाने देंगे
मूल निवास, भू-कानून और 'गैरसैंण स्थाई राजधानी' पर आर-पार की जंग; ukd ने फूंका आंदोलन का बिगुल—UK Cyber News विशेष रिपोर्ट

रिपोर्ट: विशेष संवाददाता | UK Cyber News | गैरसैंण/भराड़ीसैंण
भराड़ीसैंण (गैरसैंण):
उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में चल रहे विधानसभा सत्र का कल अंतिम दिन है, लेकिन उससे पहले पहाड़ के ज्वलंत मुद्दों ने सियासी गलियारों में भूचाल ला दिया है। आंदोलनकारी नेता आशीष नेगी और उत्तराखंड क्रांति दल (ukd) ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए स्पष्ट कर दिया है कि अब केवल बातों से काम नहीं चलेगा। नेगी ने चेतावनी दी है कि जनभावनाओं को कुचलने वाले विधायकों को अब ‘पहाड़’ से नीचे उतरने नहीं दिया जाएगा।
आशीष नेगी का अल्टीमेटम: रास्ते हम बंद करेंगे, हिसाब देकर ही जाएंगे विधायक!
सत्र के दौरान अपनी मांगों पर अड़े आशीष नेगी ने कड़े शब्दों में सरकार को ललकारते हुए कहा:
“कल सत्र का आखिरी दिन है। विधायक और सरकार कान खोलकर सुन लें – जब तक ‘मूल निवास’, ‘कड़ा भू-कानून’ और ‘गैरसैंण को स्थाई राजधानी’ बनाने पर कोई ऐतिहासिक फैसला नहीं होता, तब तक हम किसी भी विधायक को गैरसैंण की सीमा से बाहर नहीं जाने देंगे। जनता का हक मारे बिना अगर वे भागने की सोच रहे हैं, तो हम रास्ते रोक देंगे।”
चक्रव्यूह में सत्ता: तीन मुख्य मांगों पर फंसा पेंच
आंदोलनकारियों ने इस बार सरकार को तीन मोर्चों पर घेरा है, जिससे विधायकों में पैनिक की स्थिति है:
- स्थाई राजधानी गैरसैंण: ukd की सबसे पुरानी और प्रमुख मांग कि गैरसैंण को केवल ‘ग्रीष्मकालीन’ नहीं बल्कि ‘स्थाई राजधानी’ घोषित किया जाए।
- मूल निवास (1950): पहाड़ के हक-हकूक की रक्षा के लिए मूल निवास की व्यवस्था लागू हो।
- कड़ा भू-कानून: उत्तराखंड की कीमती ज़मीन को भू-माफियाओं से बचाने के लिए सख्त कानून बने।
क्या कल बंधक बनेगा पूरा तंत्र?
नेगी के इस बयान के बाद भराड़ीसैंण से लेकर दीवालीखाल तक सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं। रणनीति यह है कि सत्र खत्म होते ही जब विधायकों का काफिला देहरादून के लिए निकलेगा, तो आंदोलनकारी रास्तों की ‘घेराबंदी’ करेंगे।
- पहाड़ पर पहरा: ukd कार्यकर्ताओं ने कमर कस ली है कि बिना ठोस आश्वासन के गाड़ियों को आगे नहीं बढ़ने दिया जाएगा।
- अंतिम दिन का दबाव: सरकार के पास कल का ही समय है। अगर इन तीन मुद्दों पर कोई बड़ा ऐलान नहीं होता, तो गैरसैंण की सड़कों पर बड़ा टकराव देखने को मिल सकता है।
ukd की हुंकार: अब भागने का रास्ता नहीं मिलेगा
उत्तराखंड क्रांति दल (ukd) ने साफ कर दिया है कि वे अब और इंतज़ार करने के मूड में नहीं हैं। दल के नेताओं का कहना है कि सत्र के नाम पर सिर्फ करोड़ों रुपये बहाए जा रहे हैं, जबकि पहाड़ की बुनियादी मांगों पर सन्नाटा है। अगर सरकार गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने का साहस नहीं दिखाती, तो विधायकों को जनता के बीच ही रहकर जवाब देना होगा।
निष्कर्ष: क्या कल गैरसैंण में रचा जाएगा नया इतिहास?
आशीष नेगी और ukd की इस चेतावनी ने कल की स्थिति को ‘करो या मरो’ वाले मोड़ पर ला दिया है। क्या कल सत्र समाप्ति के बाद सत्ता का काफिला सुरक्षित निकल पाएगा या फिर जनशक्ति का ‘चक्रव्यूह’ उन्हें गैरसैंण में ही रुकने पर मजबूर कर देगा?
UK Cyber News कल सुबह से ही भराड़ीसैंण की हर हलचल पर पैनी नज़र रखेगा।
डिस्क्लेमर:
यह रिपोर्ट धरातल पर मौजूद आंदोलनकारियों के वक्तव्यों और वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रमों पर आधारित है। UK Cyber News का उद्देश्य केवल सूचना पहुँचाना है और हम किसी भी प्रकार की हिंसा या कानून-व्यवस्था को हाथ में लेने का समर्थन नहीं करते हैं। इस खबर में व्यक्त विचार आंदोलनकारियों के निजी बयान हैं, जिनसे पोर्टल की सहमति होना अनिवार्य नहीं है। किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए शासन-प्रशासन की आधिकारिक जानकारी को ही अंतिम मानें।


