2027 की आहट? लखपत सिंह भंडारी के एक सवाल ने पौड़ी की राजनीति में बढ़ाई हलचल
औपचारिक घोषणा नहीं, लेकिन सोशल मीडिया पोस्ट के बाद 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म।

श्रीनगर गढवाल:
श्रीनगर गढ़वाल की राजनीति में इन दिनों एक छोटा-सा सोशल मीडिया संदेश बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। भाजपा से जुड़े रहे वरिष्ठ नेता और श्रीनगर नगर निगम की मेयर श्रीमती आरती भंडारी के पति श्री लखपत सिंह भंडारी ने हाल ही में लिखा, “चौथान से पैठाणी, पाबौ से खिर्सू, श्रीनगर… क्या कहते हैं आप 2027 के बारे में?? करें क्या शुरुआत चलते-चलते।” इस एक पंक्ति ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है। क्या यह केवल जनता से संवाद है, या फिर 2027 के विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि तैयार करने की शुरुआत? इसका जवाब अभी भविष्य के गर्भ में है, लेकिन इतना तय है कि इस पोस्ट ने राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दे दी है।

लखपत सिंह भंडारी पिछले कई वर्षों से श्रीनगर और पौड़ी जनपद की राजनीति में सक्रिय चेहरा रहे हैं। वे भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं और स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक जिम्मेदारियां निभा चुके हैं। वर्ष 2025 के श्रीनगर नगर निगम चुनाव में उनकी भूमिका विशेष रूप से चर्चा में रही, जब भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद उनकी पत्नी श्रीमती आरती भंडारी ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा और जीत दर्ज कर श्रीनगर नगर निगम की मेयर बनीं। यह परिणाम स्थानीय राजनीति में एक बड़ा संदेश माना गया, क्योंकि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मिली जीत ने लखपत भंडारी की संगठन क्षमता और जनसंपर्क पर भी चर्चा छेड़ दी।
राजनीतिक गतिविधियों के अलावा लखपत सिंह भंडारी सामाजिक और धार्मिक आयोजनों में भी सक्रिय दिखाई देते रहे हैं। उनके सोशल मीडिया मंचों पर नगर क्षेत्र के विकास, धार्मिक कार्यक्रमों, जनसमस्याओं, नागरिक सुविधाओं तथा स्थानीय आयोजनों से जुड़े अनेक पोस्ट नियमित रूप से साझा होते रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि वे वर्षों से लोगों के बीच रहकर उनकी समस्याओं को उठाते रहे हैं, जबकि आलोचक उन्हें एक मुखर और विवादों में रहने वाला नेता भी मानते हैं।
हालांकि उनका राजनीतिक सफर पूरी तरह विवादों से अछूता भी नहीं रहा। वर्ष 2024 में श्रीनगर और उत्तरकाशी क्षेत्र में आयोजित कुछ आंदोलनों और भाषणों को लेकर उनका नाम विवादों में आया था। उन घटनाओं के बाद उनके बयानों पर आलोचना भी हुई और प्रशासनिक कार्रवाई की खबरें भी सामने आईं। इन घटनाओं ने उन्हें राज्य स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया।
अब यदि उनके हालिया संदेश पर नजर डालें तो उसमें चौथान, पैठाणी, पाबौ, खिर्सू और श्रीनगर जैसे क्षेत्रों का विशेष उल्लेख है। ये सभी इलाके श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र और उसके सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्रों में महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसलिए राजनीतिक विश्लेषक इस पोस्ट को सामान्य अभिवादन भर नहीं मान रहे, बल्कि इसे संभावित जनसंपर्क अभियान की शुरुआती झलक के रूप में भी देख रहे हैं। हालांकि अभी तक लखपत सिंह भंडारी या उनके समर्थकों की ओर से 2027 विधानसभा चुनाव लड़ने की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए इसे चुनावी घोषणा कहना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।
श्रीनगर विधानसभा सीट पहले से ही उत्तराखंड की महत्वपूर्ण राजनीतिक सीटों में गिनी जाती है। वर्तमान में इस सीट का प्रतिनिधित्व भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं मंत्री धन सिंह रावत कर रहे हैं। ऐसे में यदि भविष्य में इस सीट पर कोई नया राजनीतिक समीकरण बनता है, तो उसका असर पूरे पौड़ी गढ़वाल की राजनीति पर पड़ सकता है।
लखपत सिंह भंडारी की शैली हमेशा जनसंपर्क आधारित रही है। वे सोशल मीडिया के माध्यम से भी लगातार लोगों से संवाद करते हैं। नगर निगम चुनाव के दौरान जिस प्रकार उन्होंने अपने समर्थकों को संगठित किया, उसके बाद से उनके राजनीतिक कद को लेकर चर्चाएं बढ़ी हैं। हालिया पोस्ट को भी कई लोग उसी क्रम की अगली कड़ी मान रहे हैं।
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी पर्याप्त समय है। ऐसे में कोई भी नेता यदि क्षेत्र में लगातार सक्रियता बढ़ाता है, जनता के बीच संवाद करता है और संगठनात्मक उपस्थिति मजबूत करता है, तो उसे चुनावी तैयारी का हिस्सा माना जाना स्वाभाविक है। लेकिन राजनीति में अंतिम निर्णय समय, पार्टी की रणनीति और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि लखपत सिंह भंडारी के एक छोटे से संदेश ने पौड़ी गढ़वाल की राजनीति में नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है। आने वाले महीनों में यदि उनकी क्षेत्रीय सक्रियता और बढ़ती है या वे औपचारिक रूप से किसी राजनीतिक अभियान की घोषणा करते हैं, तो यह चर्चा और तेज हो सकती है। अभी इसे 2027 की संभावित राजनीतिक आहट के रूप में देखा जा रहा है, न कि किसी आधिकारिक चुनावी घोषणा के रूप में।


