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उत्तराखंड पुलिस 4600 ग्रेड पे: हाईकोर्ट की 6 महीने की डेडलाइन खत्म

अब पुलिस मुख्यालय के फैसले का इंतजार

देहरादून:

उत्तराखंड पुलिस में 4600 ग्रेड पे (Grade Pay) का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। 2001 बैच के पुलिसकर्मियों की दशकों पुरानी मांग और सरकार के रुख के बीच चल रही इस रस्साकशी को अब उत्तराखंड उच्च न्यायालय के एक महत्वपूर्ण आदेश ने एक नई दिशा दी है। 27 अक्टूबर 2025 को पारित हुए हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब 6 महीने की समय-सीमा पूरी हो चुकी है, जिससे यह सवाल और गंभीर हो गया है कि क्या अब इस मामले में कोई तार्किक समाधान निकलेगा?

विवाद की पृष्ठभूमि: वादा और हकीकत

​इस पूरे मामले की शुरुआत 21 अक्टूबर, 2021 को पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा की गई घोषणा से हुई थी। सीएम ने 20 साल की सेवा पूरी करने वाले पुलिसकर्मियों को 4600 ग्रेड पे का लाभ देने का वादा किया था।

​हालांकि, जनवरी 2022 में जारी सरकारी आदेश (GO) में 4600 ग्रेड पे के स्थान पर 2 लाख रुपये का एकमुश्त भुगतान (One-time settlement) प्रस्तावित किया गया। पुलिसकर्मियों ने इस आदेश को मुख्यमंत्री की मूल घोषणा के विपरीत मानते हुए विरोध जताया, जिसके बाद यह मामला प्रशासनिक फाइलों से निकलकर अदालतों तक पहुँच गया।

हाईकोर्ट का आदेश (WPSS/2372/2022) क्या कहता है?

​27 अक्टूबर, 2025 को माननीय उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए जो आदेश पारित किया, वह अत्यंत महत्वपूर्ण है।

साभार: उत्तराखंड उच्च न्यायालय

​हाईकोर्ट के इस आदेश के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  1. याचिकाकर्ताओं को अवसर: कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं (जो 2001 बैच के पुलिसकर्मी हैं) को यह छूट दी है कि वे अपना पक्ष (Representation) नए सिरे से डीजीपी (DGP) के समक्ष रखें।
  2. स्पीकिंग ऑर्डर (Speaking Order) का निर्देश: कोर्ट ने डीजीपी को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे मामले की समीक्षा करें और एक ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ पारित करें। ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ का अर्थ होता है एक ऐसा लिखित निर्णय जिसमें अधिकारियों को कानून और नियमों का हवाला देते हुए विस्तार से बताना होता है कि वे किस आधार पर मांग को स्वीकार या अस्वीकार कर रहे हैं।

6 महीने की डेडलाइन का गणित: आज का अपडेट

​यह सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। हाईकोर्ट ने डीजीपी को अपने आदेश में स्पष्ट रूप से निर्देश दिया था कि वे याचिकाकर्ता के अभ्यावेदन पर 6 महीने के भीतर निर्णय लें।

  • ऑर्डर की तारीख: 27 अक्टूबर 2025
  • डेडलाइन की तारीख: 27 अप्रैल 2026

​आज 28 अप्रैल 2026 है। यानी हाईकोर्ट द्वारा दी गई 6 महीने की वह ‘डेडलाइन’ कल ही समाप्त हो चुकी है। अब पुलिस मुख्यालय के पास कानूनी रूप से वह समय बीत चुका है जो अदालत ने समीक्षा के लिए दिया था। अब पुलिस परिवारों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मुख्यालय ने इस समय-सीमा के अंदर कोई निर्णय लिया है, या मामला अभी भी लंबित है।

विभाग बनाम पुलिसकर्मियों का पक्ष

​इस गतिरोध के दो मुख्य तर्क हैं:

  • पुलिसकर्मियों का तर्क: याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे 2021 से ही 4600 ग्रेड पे के हकदार थे। उनका कहना है कि 2023 में सहायक उप-निरीक्षक (ASI) के पद का सृजन बाद में हुआ है, इसलिए यह तकनीकी बाधा उनके 2021 के हक को खत्म नहीं कर सकती।
  • सरकारी पक्ष: राज्य सरकार के वकील ने तर्क दिया था कि याचिकाकर्ताओं की पदोन्नति 2022 में हेड कांस्टेबल के रूप में हुई है और हेड कांस्टेबल के ऊपर अगला पद एएसआई का है। इसलिए, सीधे सब-इंस्पेक्टर के ग्रेड पे की मांग नियमों के अनुरूप नहीं है।

क्या अब आएगा फैसला?

​अब जबकि हाईकोर्ट की डेडलाइन खत्म हो चुकी है, प्रदेश के पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों की निगाहें मुख्यालय के रुख पर हैं। क्या पुलिस मुख्यालय इस पुराने विवाद को सुलझाकर अपने जवानों को उनका वांछित ग्रेड पे देगा, या फिर विभाग अपने पुराने प्रशासनिक रुख पर ही कायम रहेगा? इसका जवाब अब मुख्यालय से आने वाले उस आधिकारिक ‘स्पीकिंग ऑर्डर’ में छिपा है, जिसका सभी को इंतजार है।

नोट: यह रिपोर्ट उत्तराखंड उच्च न्यायालय के दिनांक 27.10.2025 के आदेश (WPSS/2372/2022) के तथ्यों पर आधारित है। किसी भी आधिकारिक निर्णय के लिए विभाग के आदेश ही मान्य होंगे।

UK Cyber News

Prem Padiyar

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Report By UK Cyber News