श्रीनगर गढ़वाल में युवाओं का फूटा गुस्सा: पुलिस पर दोहरे रवैये का आरोप
बोले- 'कानून सबके लिए बराबर हो'

श्रीनगर गढ़वाल।
कर्णप्रयाग में हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान हुए विवाद के बाद अब प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में इसकी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। शुक्रवार को श्रीनगर गढ़वाल में बड़ी संख्या में स्थानीय युवा, छात्र संगठन एवं सामाजिक कार्यकर्ता श्रीनगर कोतवाली पहुंचे और पुलिस प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।
युवाओं का कहना था कि उत्तराखंड की शांतिपूर्ण छवि और चारधाम एवं हेमकुंड साहिब यात्रा जैसी धार्मिक यात्राओं की गरिमा बनाए रखना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि यात्रा के दौरान कुछ लोगों द्वारा यातायात नियमों का उल्लंघन, सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने और स्थानीय लोगों के साथ अभद्र व्यवहार जैसी घटनाएं सामने आईं, लेकिन पुलिस की कार्रवाई अपेक्षित स्तर की नहीं दिखी।
स्थानीय युवाओं पर तुरंत कार्रवाई, बाहरी लोगों पर नरमी क्यों?
भाजयुमो के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. सुधीर जोशी और आर्यन छात्र संगठन के प्रदेश अध्यक्ष संजय बिष्ट ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि कोई स्थानीय युवा यातायात नियमों का उल्लंघन करता है तो उसके खिलाफ तत्काल चालान और कानूनी कार्रवाई की जाती है, लेकिन बाहरी राज्यों से आने वाले कुछ लोगों के मामलों में वैसी ही सख्ती दिखाई नहीं देती।
उन्होंने कहा कि कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करना है। यदि किसी ने भी नियमों का उल्लंघन किया है तो उसकी पहचान या राज्य नहीं, बल्कि उसका कृत्य कार्रवाई का आधार होना चाहिए।
कोतवाली में अधिकारियों के सामने रखी नाराजगी
ज्ञापन सौंपने के दौरान युवा नेताओं ने पुलिस अधिकारियों के समक्ष अपनी आपत्तियां भी दर्ज कराईं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्थानीय लोगों द्वारा सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से ऐसे मामलों को उठाने पर पुलिस तुरंत सक्रिय हो जाती है, जबकि उपद्रव करने वालों के खिलाफ अपेक्षित कठोरता दिखाई नहीं देती। प्रदर्शनकारियों ने इस रवैये को बदलने और निष्पक्ष कानून व्यवस्था लागू करने की मांग की।
यात्रा की आड़ में अराजकता बर्दाश्त नहीं होगी
छात्र नेता शिवप्रताप कंडारी, देवकांत देवराड़ी और आयुष मियां, अभिनव बहुगुणा सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा आस्था, श्रद्धा और उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान का विषय है। यात्रा के नाम पर किसी भी प्रकार की अराजकता, कानून-व्यवस्था भंग करने या स्थानीय जनता के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाली गतिविधियों को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था बनाई जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रत्येक व्यक्ति के विरुद्ध बिना किसी भेदभाव के कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
आंदोलन की चेतावनी
युवा नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि भविष्य में भी ऐसी घटनाएं होती रहीं और प्रशासन ने निष्पक्ष एवं प्रभावी कार्रवाई नहीं की, तो प्रदेशभर के युवा व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
समाचार लिखे जाने तक इस ज्ञापन को लेकर पुलिस प्रशासन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।


