21 साल का वनवास, PRD जवान अब आर-पार नियमितीकरण क्यों नहीं? PRD जवानों का सवाल!
वादा खिलाफी: PRD जवानों ने सरकार को किया एक्सपोज!

एकता विहार, सहस्त्रधारा (देहरादून): 26/04/2026 उत्तराखंड
उत्तराखंड राज्य में अपनी स्थापना के बाद से ही अपनी सेवाओं और वजूद की लड़ाई लड़ रहा ‘प्रान्तीय रक्षक दल’ (PRD) अब आर-पार के मूड में है। 40 दिनों से भी ज्यादा देहरादून के एकता विहार, सहस्त्रधारा में चल रहे इस प्रदर्शन ने सरकार की नींद उड़ा दी है। पिछले 21 वर्षों से अपनी सेवाओं के नियमितीकरण (regularization) की बाट जोह रहे इन जवानों ने अब सरकार को खुली चुनौती दी है। आंदोलन स्थल से सामने आई तस्वीरें और वीडियो, सरकारी तंत्र के खोखलेपन को चीख-चीख कर बयां कर रहे हैं।
प्रमुख तथ्य और मुद्दे:
- 21 साल की अनिश्चितता: PRD जवान दो दशकों से अधिक समय से सरकार के दर-दर भटक रहे हैं। एकता विहार में जमा हुए ये जवान सरकार से सवाल कर रहे हैं कि आखिर कब तक उन्हें छला जाएगा?
‘सन 1948’ के विभाग की अनदेखी: प्रदर्शन स्थल पर लगे बैनरों में एक बड़ा सवाल साफ लिखा है— “सन 1948 का स्थायी विभाग, P.R.D का नियमितीकरण से वंचित क्यों?” यह सवाल सरकार की मंशा पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।
- 650 रुपये और भ्रष्टाचार का जाल: मौके पर मौजूद वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि एक बेरोजगार स्वयंसेवक, जो 650 रुपये के दैनिक मानदेय पर काम कर रहा है, वह अपनी बात कहने के लिए जब देहरादून आता है, तो उसे 10,000 रुपये का खर्च उठाना पड़ता है। इसके पीछे उन्होंने ‘विभागीय भ्रष्टाचार’ को जिम्मेदार ठहराया है।
- सीएम आवास का धोखा: जवानों ने बताया कि उन्हें मुख्यमंत्री आवास में बुलाकर पहले यह विश्वास दिलाया गया था कि उनकी वार्ता मुख्यमंत्री के निजी सचिव (PS) से कराई जाएगी, लेकिन वहां ले जाकर उनके विश्वास को तोड़ दिया गया। उन्हें किसी बड़े अधिकारी के बजाय पी.आर.ओ. (PRO) स्तर के कर्मचारियों से बात कराकर टाल दिया गया।
- राजनीतिक दोहरा चरित्र: प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यही विधायक जब चुनाव के समय गांव-गांव, गली-गली घूमते हैं, तो हाथ जोड़कर वोट मांगते हैं। लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्हें यह भी दिखाई नहीं देता कि उनके क्षेत्र का बेटा बेरोजगार है और सड़कों पर धरने पर बैठा है।
सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए स्वयंसेवकों ने कहा कि जब मंत्रियों और विधायकों का वेतन बढ़ाना होता है, तो 24 घंटे के भीतर विधानसभा में प्रस्ताव पारित हो जाता है। लेकिन, जवानों के हितों और नियमितीकरण के लिए सरकार के पास समय नहीं है। कैबिनेट की बैठकों के दौर चलते हैं—14 तारीख, 22 तारीख, 28 तारीख, 30 तारीख—लेकिन फाइलें आगे नहीं बढ़तीं।
सहस्त्रधारा के एकता विहार में जमा इन जवानों का स्पष्ट संदेश है: “अभी तो यह अंगड़ाई है, आगे और लड़ाई है।”
एकता की अपील
आंदोलन के नेताओं ने उत्तराखंड के सभी क्षेत्रीय दलों और संगठनों से अपील की है कि वे अपनी राजनीतिक रोटियाँ सेकने के बजाय एक मंच पर आएं। “अलग-अलग मंचों पर अलग-अलग बात करने से कुछ नहीं होगा। अगर वाकई उत्तराखंड के बेरोजगार युवाओं और PRD जवानों का भला चाहते हो, तो एक साथ आओ।”
यह लड़ाई अब सिर्फ एक विभाग के नियमितीकरण की नहीं, बल्कि उस सम्मान और हक की है, जिसका वादा राज्य निर्माण के समय किया गया था। क्या सरकार अब जागेगी, या फिर PRD जवानों को अपना हक पाने के लिए और भी कड़ा संघर्ष करना पड़ेगा?
UK Cyber News इस खबर पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा।
रिपोर्ट: प्रेम पडियार,वरिष्ठ संवाददाता- UK Cyber News



