चैंपियन ने खोली’मुंबई डायरी’ गोदियाल सुना रहे’सहनशीलता’का पाठ
क्या निजी हमलों के जाल में फंस गई है उत्तराखंड की सियासत?"पर हरक सिंह की चुप्पी ने बढ़ा दी है बेचैनी।"

देहरादून (यूकेसाइबरन्यूज़):
उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों बयानों के ‘तीर’ नहीं, बल्कि ‘परमाणु बम’ फूट रहे हैं। कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन द्वारा गणेश गोदियाल और हरक सिंह रावत पर लगाए गए “मुंबई डांस बार” के सनसनीखेज आरोपों ने देवभूमि के सियासी पारे को उबाल पर ला दिया है। अब इस पर गणेश गोदियाल का जवाब तो आया है, लेकिन उन्होंने सबसे मुख्य आरोप पर ही ‘पर्दा’ डाल दिया है।
1. गोदियाल का पलटवार: “जोश में होश खो रहे चैंपियन”
चैंपियन के वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता गणेश गोदियाल ने बेहद नपे-तुले शब्दों में प्रहार किया। उन्होंने कहा कि चैंपियन एक सम्मानित पद पर रहे हैं, उन्हें “जोश में होश रखना चाहिए।” गोदियाल ने चैंपियन की ‘राजा-महाराजा’ वाली मानसिकता पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज के दौर में कानून सबके लिए बराबर है, राजाओं के लिए कुछ भी माफ नहीं होता।
2. डांस बार के आरोपों पर ‘गोल’ हुए गोदियाल!
हैरानी की बात यह है कि चैंपियन ने जिस ‘नवी मुंबई के डांस बार’ और ‘बार-बालाओं के नाच’ का कच्चा चिट्ठा खोलने का दावा किया था, उस पर गोदियाल ने एक शब्द भी नहीं कहा। उन्होंने इसे “अपना-अपना जायका” कहकर टाल दिया। सवाल उठता है कि क्या गोदियाल के पास इन व्यक्तिगत आरोपों का कोई जवाब नहीं था, या फिर वे इस विवाद को और हवा नहीं देना चाहते?
3. ‘मौन’ हरक सिंह और उबलती सियासत
चैंपियन ने हरक सिंह रावत को भी इस पूरे प्रकरण में लपेटा है। जहाँ चैंपियन उन्हें ‘मेंढक’ और ‘विधानसभा में रोने वाला’ बता रहे हैं, वहीं हरक सिंह की तरफ से अभी ‘रहस्यमयी चुप्पी’ बरकरार है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हरक सिंह का बयान इस आग में घी डालने का काम कर सकता है।
4. “क्षमा बड़न को चाहिए…” का दिया हवाला
गोदियाल ने एक दोहा पढ़कर चैंपियन को ‘छोटा’ और खुद को ‘सहनशील’ दिखाने की कोशिश की। उन्होंने कहा— “क्षमा बड़न को चाहिए, छोटन को उत्पात।” यानी उन्होंने चैंपियन की बातों को ‘उत्पात’ करार दे दिया। लेकिन क्या जनता इस दार्शनिक जवाब से संतुष्ट होगी या चैंपियन द्वारा उठाए गए ‘चरित्र’ के सवालों का जवाब ढूंढेगी?
संपादकीय टिप्पणी (समाचार नामा):
उत्तराखंड की राजनीति अब ‘नीति’ से हटकर ‘निजी’ होती जा रही है। एक तरफ राजघराने का दंभ है, तो दूसरी तरफ सधी हुई चुप्पी। लेकिन इस सबके बीच देवभूमि की जनता पूछ रही है— क्या हमारे नेताओं के पास विकास के मुद्दे खत्म हो गए हैं जो अब ‘मुंबई की गलियों’ में राजनीति तलाशी जा रही है?
डिस्क्लेमर:
ये खबर मा जो भी बात च, ऊं सोशल मीडिया मा वायरल वीडियो अर नेताओं का बयान पर आधारित च। ‘यूके साइबर न्यूज़’ यैकी निजी पुष्टी नी करदू। हमारू काम सिर्फ सच थै सामणि लाण च।


