
देहरादून:
उत्तराखंड की राजनीति में आने वाले समय में एक बड़ा ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। राज्य में नए परिसीमन (Delimitation) को लेकर जो जमीनी रिपोर्ट तैयार की जा रही है, उसके अनुसार प्रदेश में विधानसभा और लोकसभा की सीटों में भारी बढ़ोतरी प्रस्तावित है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में विधानसभा सीटों की संख्या वर्तमान 70 से बढ़ाकर 105 और लोकसभा सीटों की संख्या 5 से बढ़ाकर 8 की जा सकती है।
2011 की जनगणना बनेगा आधार
इस नए परिसीमन का मुख्य आधार वर्ष 2011 की जनगणना को माना गया है। उस समय राज्य की कुल आबादी लगभग 1,00,86,292 थी। आबादी के इसी अनुपात में न्यायोचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए सीटों की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि का प्रस्ताव है।
पहाड़ और मैदान के बीच संतुलन की कोशिश
परिसीमन के इस प्रस्तावित ड्राफ्ट में पर्वतीय और मैदानी जिलों के बीच के फासले को पाटने की कोशिश की गई है:
- मैदानी जिलों की स्थिति: प्रदेश के 4 मैदानी जिलों (देहरादून, हरिद्वार, नैनीताल और उधम सिंह नगर) में वर्तमान में 46 विधानसभा सीटें हैं, जिन्हें बढ़ाकर 51 करने का प्रस्ताव है।
- पर्वतीय जिलों को बड़ी संजीवनी: पलायन की मार झेल रहे 9 पर्वतीय जिलों में अभी मात्र 24 सीटें हैं। नए प्रस्ताव में यहाँ 12 सीटों का इजाफा कर कुल संख्या 36 करने की योजना है। इससे सुदूरवर्ती क्षेत्रों की आवाज सदन में और मुखर होगी।
जिलेवार प्रस्तावित सीटों का नया ढांचा
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जिला |
वर्तमान सीटें |
प्रस्तावित सीटें |
जिला |
वर्तमान सीटें |
प्रस्तावित सीटें |
|---|---|---|---|---|---|
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देहरादून |
10 |
16 |
हरिद्वार |
11 |
18 |
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ऊधम सिंह नगर |
09 |
16 |
नैनीताल |
06 |
09 |
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पौड़ी |
06 |
08 |
अल्मोड़ा |
06 |
07 |
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टिहरी |
06 |
07 |
पिथौरागढ़ |
04 |
06 |
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चमोली |
04 |
05 |
उत्तरकाशी |
03 |
04 |
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बागेश्वर |
02 |
03 |
रुद्रप्रयाग |
02 |
03 |
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चम्पावत |
02 |
03 |
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लोकसभा सीटों का क्या है नया फॉर्मूला?
रिपोर्ट के अनुसार, यदि राज्य में लोकसभा की सीटें बढ़कर 8 होती हैं, तो एक लोकसभा क्षेत्र के भीतर विधानसभा क्षेत्रों का वितरण भी बदलेगा:
- प्रस्ताव के तहत 7 लोकसभा सीटों के भीतर 13-13 विधानसभा क्षेत्र आ सकते हैं।
- शेष 1 लोकसभा सीट में 14 विधानसभा क्षेत्र शामिल किए जा सकते हैं। यह फॉर्मूला न केवल प्रतिनिधित्व बढ़ाएगा, बल्कि चुनावी प्रबंधन को भी नया आयाम देगा।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम का दिखेगा असर
इस पूरे बदलाव में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ की भी अहम भूमिका रहने वाली है। परिसीमन के बाद बढ़ी हुई सीटों में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित होने से उत्तराखंड की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच जाएगी।
यह प्रस्तावित बदलाव उत्तराखंड के सर्वांगीण विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। जहाँ मैदानी जिलों को बढ़ती आबादी के हिसाब से सीटें मिलेंगी, वहीं पर्वतीय जिलों की राजनीतिक ताकत बढ़ने से वहां विकास की नई योजनाएं पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि, यह सब अभी एक प्रस्तावित ड्राफ्ट है, जिसे अंतिम रूप दिया जाना बाकी है।
विशेष रिपोर्ट:(UK Cyber News)


