
काठमांडू/देहरादून:
पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक खबर तेजी से वायरल हो रही है कि “नेपाल सरकार ने सभी प्राइवेट स्कूलों को बंद कर दिया है”। इस खबर ने न केवल नेपाल, बल्कि भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी अभिभावकों और छात्रों के बीच हड़कंप मचा दिया है। लेकिन क्या वाकई ऐसा है? UK Cyber News की पड़ताल में सामने आया है कि यह खबर पूरी तरह सच नहीं है, बल्कि नियमों में सख्ती को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
क्या है हकीकत? क्यों मची है खलबली?
नेपाल में स्कूल बंद नहीं हुए हैं, बल्कि सरकार ने ‘शिक्षा विधेयक 2026’ और पुराने नियमों को लेकर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। असल में तीन मुख्य कारण हैं जिनकी वजह से यह भ्रम फैला:
1. 10% फ्री छात्रवृत्ति (Scholarship) पर सख्ती:
नेपाल के कानून (अनिवार्य और मुफ्त शिक्षा अधिनियम 2018) के अनुसार, हर प्राइवेट स्कूल को कम से कम 10 से 15 प्रतिशत सीटें गरीब और जेहनहार बच्चों के लिए आरक्षित रखनी होती हैं। काठमांडू के मेयर बालेन शाह ने इसे कड़ाई से लागू करवाया है। जिन स्कूलों ने इन नियमों का पालन नहीं किया या छात्रवृत्ति का डेटा सरकार को नहीं दिया, उन पर कार्रवाई की गई है, जिसे “स्कूल बंदी” समझ लिया गया।
2. प्राइवेट स्कूलों को ‘ट्रस्ट’ में बदलने का विवाद:
नेपाल सरकार एक नया ‘शिक्षा विधेयक’ (Education Bill) लाई है। इसमें प्रस्ताव था कि आने वाले 5 से 10 वर्षों में सभी प्राइवेट स्कूलों को ‘प्रॉफिट वाली कंपनी’ से बदलकर ‘पब्लिक एजुकेशनल ट्रस्ट’ में तब्दील कर दिया जाए। स्कूल संचालकों ने इसका भारी विरोध किया और कई बार हड़ताल (Protest Closure) की। इस अस्थायी हड़ताल को सोशल मीडिया पर “हमेशा के लिए बंदी” बताकर वायरल कर दिया गया।
3. विदेशी नामों पर प्रतिबंध:
सरकार ने निर्देश दिया है कि जिन स्कूलों के नाम विदेशी (जैसे- ऑक्सफोर्ड, कैम्ब्रिज आदि) हैं, उन्हें अगले 3 साल के भीतर बदलकर नेपाली संस्कृति या पहचान वाले नाम रखने होंगे। इसे भी कई लोगों ने स्कूलों पर हमला या बंदी मान लिया।
नेपाल शिक्षा मंत्रालय का क्या कहना है?
शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार, सरकार का उद्देश्य निजी स्कूलों को बंद करना नहीं, बल्कि उन्हें पारदर्शी बनाना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि:
- स्कूलों को समय से पहले एडमिशन करने और मनमानी फीस वसूलने से रोका जा रहा है।
- जो स्कूल नियमों का पालन कर रहे हैं, वे सुचारू रूप से चल रहे हैं।
- सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए निजी स्कूलों पर निगरानी बढ़ाई गई है।
अभिभावकों के लिए संदेश
सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो या पोस्ट पर तुरंत भरोसा न करें। नेपाल में नया शैक्षणिक सत्र (Academic Session) शुरू हो रहा है और वहां की सरकार केवल शिक्षा के व्यवसायीकरण को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है।
सीधी बात: नेपाल में प्राइवेट स्कूल बंद नहीं हुए हैं, बल्कि वे सुधार और कड़े नियमों के दौर से गुजर रहे हैं। भ्रम फैलाने वाली खबरों से बचें।
रिपोर्ट: (UK Cyber News)



