उत्तराखण्ड को अनुच्छेद 371 का संरक्षण दिलाने का संकल्प, UKD ने जारी किया 2027 का नीति एजेंडा
संकल्प – नए उत्तराखण्ड का' दस्तावेज़ में मूल निवास, सशक्त भू-कानून और पलायन रोकने को बनाया प्रमुख मुद्दा

देहरादून।
वर्ष 2027 के उत्तराखण्ड विधानसभा चुनावों की राजनीतिक सरगर्मियों के बीच क्षेत्रीय दल उत्तराखण्ड क्रांति दल (यूकेडी) ने अपने बहुप्रतीक्षित नीति दस्तावेज़ “संकल्प – नए उत्तराखण्ड का” का प्रथम भाग जारी कर आगामी चुनावों के लिए अपनी वैचारिक और नीतिगत दिशा स्पष्ट कर दी है। दल का दावा है कि यह केवल चुनावी घोषणापत्र नहीं, बल्कि राज्य की अस्मिता, संसाधनों की सुरक्षा और स्थायी विकास का रोडमैप है।
देहरादून में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान यूकेडी की नीति निर्धारण समिति के अध्यक्ष डॉ. नारायण सिंह जंतवाल ने कहा कि यदि राज्य की जनता पार्टी को जनादेश देती है तो उत्तराखण्ड को अनुच्छेद 371 के तहत विशेष संवैधानिक संरक्षण दिलाने के लिए प्रभावी पहल की जाएगी। उनका कहना था कि हिमालयी राज्य होने के कारण उत्तराखण्ड की भौगोलिक, सामाजिक और सांस्कृतिक परिस्थितियाँ अन्य राज्यों से अलग हैं, इसलिए विशेष संवैधानिक प्रावधान समय की आवश्यकता हैं।
डॉ. जंतवाल ने बताया कि पार्टी ने अपने नीति एजेंडे में पाँच प्रमुख प्राथमिकताओं को शामिल किया है। इनमें उत्तराखण्ड के लिए अनुच्छेद 371 के अंतर्गत विशेष संरक्षण, मूल निवास व्यवस्था को कानूनी स्वरूप देना, राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप सशक्त एवं आधुनिक भू-कानून लागू करना, विवश पलायन की समस्या का स्थायी समाधान तथा आरक्षण के भीतर आरक्षण की व्यवस्था लागू कर वास्तविक वंचित वर्गों तक लाभ पहुँचाना शामिल है।
नीति निर्धारण समिति के संयोजक डॉ. सुरेश सिंह नेगी ने दस्तावेज़ के विभिन्न बिंदुओं की जानकारी देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड के समग्र विकास, युवाओं के भविष्य और राज्य की सांस्कृतिक पहचान को सुरक्षित रखने के लिए इन विषयों पर ठोस नीति निर्माण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि स्पष्ट नीति और प्रभावी क्रियान्वयन से ही उत्तराखण्ड की समस्याओं का समाधान संभव है।
प्रेस वार्ता में यूकेडी नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित मूल निवास व्यवस्था किसी भी वर्ग के अधिकारों का हनन करने के उद्देश्य से नहीं लाई जाएगी। पार्टी का कहना है कि इसका उद्देश्य उत्तराखण्ड के मूल निवासियों को शिक्षा, सरकारी एवं निजी रोजगार, भूमि अधिकार, सरकारी योजनाओं, उद्यमिता और सरकारी निविदाओं में न्यायसंगत अवसर उपलब्ध कराना है।
पत्रकारों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए यूकेडी के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक काशी सिंह ऐरी ने कहा कि “संकल्प – नए उत्तराखण्ड का” केवल चुनावी घोषणा नहीं है, बल्कि राज्य के भविष्य, स्वाभिमान और संतुलित विकास का नीति दस्तावेज़ है। उन्होंने कहा कि इसे व्यापक जनभागीदारी और समाज के विभिन्न वर्गों से संवाद के आधार पर आगे विकसित किया जाएगा।
प्रेस वार्ता का संचालन केंद्रीय महामंत्री विजय बौड़ाई ने किया।
इस अवसर पर केंद्रीय अध्यक्ष सुरेन्द्र कुकरेती, डॉ. शैलशक्ति कपरवान, नीति निर्धारण समिति के सदस्य पंकज व्यास एवं मीनाक्षी घिड़ियाल, वरिष्ठ नेता लताफ़ हुसैन, कार्यकारी अध्यक्ष जय प्रकाश उपाध्याय, उपाध्यक्ष बहादुर सिंह रावत, महामंत्री (संगठन) गणेश काला, केंद्रीय सह मीडिया प्रभारी प्रकाश भट्ट एवं विजेंद्र रावत, राजनीतिन रावत, नैना लखेड़ा, शिवनंदन विष्ट, डॉ. पंकज पैन्यूली सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
यूकेडी ने संकेत दिए हैं कि “संकल्प – नए उत्तराखण्ड का” दस्तावेज़ के आगामी भागों में रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन, उद्योग और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़े विस्तृत नीति प्रस्ताव भी सार्वजनिक किए जाएंगे। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि 2027 के चुनाव से पहले क्षेत्रीय मुद्दों को केंद्र में रखकर यूकेडी राज्य की राजनीति में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास कर रही है।
डिस्क्लेमर
यह समाचार उत्तराखण्ड क्रांति दल (यूकेडी) द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति एवं प्रेस वार्ता में दिए गए बयानों पर आधारित है। समाचार में व्यक्त दावे, घोषणाएँ एवं प्रस्ताव संबंधित राजनीतिक दल के हैं। UK Cyber News इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि या समर्थन नहीं करता। पाठकों से अपेक्षा है कि वे किसी भी राजनीतिक घोषणा को आधिकारिक सरकारी निर्णय न मानें, क्योंकि ऐसी नीतियाँ लागू होने के लिए संवैधानिक एवं विधिक प्रक्रियाओं से गुजरना आवश्यक होता है।



