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अब गाड़ियाँ करेंगी आपस में बात: भारत में रुकेंगे सड़क हादसे, सरकार का बड़ा फैसला!

अंधे मोड़ और घने कोहरे में भी नहीं टकराएंगी गाड़ियाँ; 5.9 GHz स्पेक्ट्रम पर काम करेगा भारत का नया 'स्मार्ट व्हीकल नेटवर्क'!

नई दिल्ली। 03 अगस्त 2026

देश की सड़कों पर लगातार बढ़ते हादसों और गँवाते जीवन पर स्थायी अंकुश लगाने के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने एक गेम-चेंजर योजना का प्रारूप तैयार किया है। मंत्रालय ने मोटर वाहनों में वाहन-से-वाहन (Vehicle-to-Vehicle – V2V) संचार प्रणालियों के चरणबद्ध कार्यान्वयन के लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन का प्रस्ताव रखते हुए एक मसौदा (ड्राफ्ट) अधिसूचना जारी की है।

यह अत्याधुनिक तकनीक भारतीय सड़कों पर चलने वाले वाहनों को आपस में रीयल-टाइम (तत्काल) डेटा साझा करने के काबिल बनाएगी, जिससे जानलेवा हादसों को समय रहते टाला जा सकेगा।


क्या है यह V2V तकनीक और कैसे बचाएगी आपकी जान?

वाहन-से-वाहन (V2V) संचार एक ऐसी कनेक्टेड तकनीक है, जिसके ज़रिए आसपास चल रही गाड़ियाँ एक-दूसरे से डिजिटल रूप से संवाद करती हैं। गाड़ी में लगा स्पेशल सिस्टम (On-Board Unit) अपनी गति (Speed), सटीक स्थिति (Location), दिशा (Direction), त्वरण (Acceleration) और अचानक ब्रेक लगने की जानकारी आसपास की अन्य गाड़ियों को रेडियो तरंगों द्वारा भेजता रहता है।

दृष्टि रेखा (Line of Sight) से परे सुरक्षा:

सामान्य सेंसर या कैमरे केवल वहीं तक देख सकते हैं, जहाँ तक सीधा रास्ता दिखता है। लेकिन V2V तकनीक अंधाधुंध मोड़ों (Blind Spots), घने कोहरे, रात के अंधेरे या आगे चल रहे बड़े ट्रक-बस के पार की स्थिति को भी भांप लेती है। यह संभावित टक्कर से कई सेकंड पहले ही ड्राइवर को बीप या स्क्रीन अलर्ट के ज़रिए सचेत कर देती है।


किन 4  मुख्य स्थितियों में सुरक्षा कवच बनेगी यह प्रणाली?

सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए V2V तकनीक मुख्य रूप से इन 4 खतरनाक स्थितियों में ड्राइवरों को अग्रिम चेतावनी (Early Alert) देगी:

  1. आपातकालीन ब्रेक चेतावनी (Emergency Brake Warning): यदि आगे चल रहे वाहन ने किसी वजह से अचानक तेज़ ब्रेक लगाए हैं, तो पीछे आ रही गाड़ियों को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा, जिससे ‘पाइल-अप’ (एक के पीछे एक टकराने) वाले हादसों से बचा जा सकेगा।

  2. आगे से टक्कर का खतरा (Forward Collision Warning): तेज़ रफ़्तार में यदि आगे किसी रुकी हुई या धीमी गाड़ी से टकराने का जोखिम बनता है, तो सिस्टम चालक को सतर्क कर देगा।

  3. गलत दिशा में गाड़ी चलाना (Wrong-Way Driving Alert): वन-वे या नेशनल हाईवे पर यदि कोई गाड़ी ग़लत दिशा (Wrong-Side) में आ रही होगी, तो आसपास के सभी वाहनों को तुरंत इमरजेंसी सिग्नल मिल जाएगा।

  4. आपातकालीन वाहन अलर्ट (Emergency Vehicle Warning): एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड या पुलिस की गाड़ियों के आने की जानकारी दूर से ही मिल जाएगी, जिससे अन्य ड्राइवर समय रहते उन्हें रास्ता देने के लिए अपनी लेन बदल सकेंगे।


कार्यान्वयन की प्रस्तावित समयसीमा

मंत्रालय ने ऑटोमोबाइल कंपनियों (OEMs) को इस नई और आधुनिक तकनीक को गाड़ियों में एकीकृत करने के लिए चरणबद्ध समयसीमा तय की है:

वाहन श्रेणी एवं विवरण प्रभावी तिथि अनिवार्यता का स्वरूप
श्रेणी L, M और N के वाहन 1 अक्टूबर 2027 या उसके बाद निर्मित यदि वाहन में V2V सिस्टम लगाया जाता है, तो उसे AIS-230 मानकों का पालन करना होगा (ऐच्छिक/Optional Phase)
श्रेणी L, M और N के वाहन 1 अक्टूबर 2028 या उसके बाद निर्मित सभी नए वाहनों में AIS-230 मानकों के अनुरूप V2V संचार प्रणाली का होना पूर्णतः अनिवार्य (Mandatory) होगा।

स्पेक्ट्रम, तकनीक और AIS-230 मानक

इस पूरी नेटवर्क व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए तकनीकी ढांचा और रेडियो फ्रीक्वेंसी भी तय कर दी गई है:

  • फ्रीक्वेंसी बैंड: वी-टू-वी और बुद्धिमान परिवहन प्रणाली (ITS) के लिए 5.875 GHz से 5.925 GHz का रेडियो स्पेक्ट्रम तय किया गया है।

  • लाइसेंस मुक्त उपयोग: दूरसंचार विभाग (DoT) ने 10 जून 2026 के GSR 466(E) के माध्यम से इस विशेष फ्रीक्वेंसी बैंड को लाइसेंसिंग की जरूरतों से पूरी तरह मुक्त (Exempted) कर दिया है।

  • सेलुलर व्हीकल-टू-एवरीथिंग (C-V2X): यह ढांचा C-V2X तकनीक का उपयोग करने वाली ऑन-बोर्ड इकाइयों पर आधारित है।

  • केंद्रीय समिति की मुहर: 7 मई 2026 को केंद्रीय मोटर वाहन नियम-तकनीकी स्थायी समिति की 56वीं बैठक में AIS-230 मानक को मंजूरी दी गई, जो भारत में V2V संचार का विनियामक (Regulatory) आधार है।

AIS-230 की प्रमुख खूबियां:

  • रेडियो सिग्नल परफॉरमेंस, फ्रीक्वेंसी स्थिरता और जीएनएसएस (GNSS) आधारित सटीक लोकेशन ट्रैकिंग।

  • विद्युत आपूर्ति, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस (EMI) और अनुकूलता (EMC) के सुरक्षा मानक।

  • गाड़ियों के कनेक्टेड नेटवर्क को हैकिंग से बचाने के लिए साइबर सुरक्षा (Cybersecurity) और डेटा सुरक्षा के कड़े इंतजाम।


ADAS को मिलेगा ‘सुपर पावर’ का साथ

आजकल की कई आधुनिक प्रीमियम गाड़ियों में ADAS (Advanced Driver Assistance System) फीचर आता है, जो कैमरों और राडार पर निर्भर रहता है। लेकिन भारी बारिश, घने कोहरे या धूल में ये कैमरे कभी-कभी काम करना बंद कर देते हैं। V2V तकनीक रेडियो तरंगों पर काम करने के कारण हर मौसम में 100% सटीक काम करेगी और ADAS के पूरक (Complement) के रूप में काम करेगी।

कैसे लागू होगा यह नया कानून?

मंत्रालय द्वारा गठित विशेष टास्क फोर्स और तकनीकी समिति की सिफारिशों पर तैयार किए गए इस नियम को अंतिम रूप देने से पहले एक पारदर्शी प्रक्रिया अपनाई जा रही है:

ड्राफ्ट नोटिफिकेशन और 30 दिनों का समय:

सरकार ने इस प्रस्तावित नियम का केवल “ड्राफ्ट” (प्रारूप) जारी किया है। अगले 30 दिनों तक इस मसौदे पर आम जनता, ऑटोमोबाइल निर्माताओं, ट्रांसपोर्ट विशेषज्ञों और हितधारकों से सुझाव व आपत्तियां माँगी गई हैं।

इन 30 दिनों में मिलने वाली सभी प्रतिक्रियाओं की गहराई से समीक्षा की जाएगी। आवश्यकतानुसार बदलाव करने के बाद सरकार “अंतिम अधिसूचना” (Final Notification) जारी करेगी, जिसके बाद यह देश का पक्का कानून बन जाएगा।


सूचना का स्रोत और उद्देश्य: यह समाचार रिपोर्ट भारत सरकार के प्रेस सूचना कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति एवं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के केंद्रीय मोटर वाहन नियम (1989) संशोधन मसौदे पर आधारित है। इस लेख का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों और ऑटोमोबाइल क्षेत्र के पाठकों को सरकार द्वारा प्रस्तावित वाहन-से-वाहन (V2V) संचार प्रणाली और सड़क सुरक्षा के नए नियमों के प्रति जागरूक करना है।

कृपया ध्यान दें कि यह अभी एक मसौदा (Draft) अधिसूचना है। सरकार द्वारा 30 दिनों की सार्वजनिक परामर्श और समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इसे अंतिम कानून के रूप में लागू किया जाएगा।

UK Cyber News

Prem Padiyar

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Report By UK Cyber News