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AI ने खोला कैंसर का छिपा राज, ट्यूमर दोबारा बनने वाली कोशिकाओं की पहचान

नई एआई तकनीक ने ट्यूमर दोबारा बनने के लिए जिम्मेदार छिपी कैंसर स्टेम कोशिकाओं का लगाया पता, प्रिसीजन मेडिसिन को मिलेगा नया आधार।

नई दिल्ली।

चिकित्सा विज्ञान में कैंसर आज भी दुनिया की सबसे गंभीर बीमारियों में गिना जाता है। आधुनिक उपचार पद्धतियों, सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी और इम्यूनोथेरेपी के बावजूद एक बड़ी चुनौती अब भी वैज्ञानिकों और चिकित्सकों के सामने बनी हुई है—इलाज के बाद भी कैंसर का दोबारा लौट आना। कई बार मरीज पूरी तरह स्वस्थ दिखाई देता है, लेकिन शरीर में मौजूद कुछ अत्यंत दुर्लभ और छिपी हुई कोशिकाएं वर्षों तक निष्क्रिय अवस्था में रहने के बाद फिर सक्रिय होकर नया ट्यूमर विकसित कर देती हैं।

इसी चुनौती का समाधान खोजने की दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अधीन कार्यरत एस. एन. बोस राष्ट्रीय मूलभूत विज्ञान केंद्र (SNBNCBS) तथा अशोक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) आधारित एक अत्याधुनिक प्रणाली विकसित की है, जो उन कैंसर स्टेम कोशिकाओं (Cancer Stem Cells – CSCs) की पहचान कर सकती है, जिन्हें कैंसर के दोबारा होने का प्रमुख कारण माना जाता है। यह उपलब्धि भविष्य में कैंसर के उपचार की दिशा बदल सकती है।

आखिर क्या होती हैं कैंसर स्टेम कोशिकाएं?

विशेषज्ञों के अनुसार कैंसर स्टेम कोशिकाएं सामान्य कैंसर कोशिकाओं से अलग होती हैं। इनकी संख्या बहुत कम होती है, लेकिन यही कोशिकाएं स्वयं को बार-बार बनाने की क्षमता रखती हैं। यही कारण है कि उपचार के बाद भी यदि इनमें से कुछ कोशिकाएं शरीर में बच जाती हैं तो समय के साथ दोबारा सक्रिय होकर नया ट्यूमर विकसित कर सकती हैं।

अब तक इन्हें पहचानना बेहद कठिन था क्योंकि ये सामान्य जांचों में आसानी से दिखाई नहीं देती थीं। यही वजह है कि कई मरीजों में सफल उपचार के बाद भी कैंसर वापस लौट आता है।

पहले OncoMark, अब उससे आगे ACSCEND

शोधकर्ताओं की टीम पहले OncoMark नामक एआई प्लेटफॉर्म विकसित कर चुकी है, जिसने कैंसर की जैविक गतिविधियों का विश्लेषण करने में 99 प्रतिशत तक की सटीकता प्रदर्शित की थी। इसी शोध को आगे बढ़ाते हुए वैज्ञानिकों ने अब ACSCEND (AI-based Cancer Stem-like Cell Profiler and Neoplasm Deconvolutor) नामक नया एआई ढांचा तैयार किया है।

यह प्रणाली कैंसर के भीतर मौजूद उन स्टेम जैसी कोशिकाओं की पहचान करती है जो भविष्य में बीमारी के दोबारा उभरने का कारण बन सकती हैं। इसका उद्देश्य केवल ट्यूमर देखना नहीं, बल्कि उसके पीछे छिपी कोशिकीय संरचना और व्यवहार को समझना है।

डॉ. शुभाशीष हलदर के नेतृत्व में हुआ शोध

यह महत्वपूर्ण शोध डॉ. शुभाशीष हलदर के नेतृत्व में किया गया। शोधकर्ताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और जैव सूचना विज्ञान (Bioinformatics) का उपयोग करते हुए विशाल आनुवंशिक आंकड़ों का विश्लेषण किया और यह समझने का प्रयास किया कि आखिर कौन-सी कोशिकाएं कैंसर को दोबारा जन्म देती हैं।

25 हजार से अधिक ट्यूमर नमूनों का अध्ययन

शोध की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए वैज्ञानिकों ने दुनिया के प्रतिष्ठित TCGA (The Cancer Genome Atlas) और PRECOG जैसे डेटाबेस से 25,000 से अधिक ट्यूमर नमूनों का विश्लेषण किया।

एआई मॉडल ने इन नमूनों में मौजूद जीन गतिविधियों का अध्ययन कर यह पता लगाया कि किन मरीजों में कैंसर के दोबारा होने की संभावना अधिक है। विश्लेषण में यह भी सामने आया कि जिन मरीजों में विशेष प्रकार की कैंसर स्टेम कोशिकाएं अधिक थीं, उनमें जीवित रहने की संभावना अपेक्षाकृत कम रही और उपचार का प्रभाव भी सीमित पाया गया।

कैंसर स्टेम कोशिकाओं की तीन अवस्थाओं की पहचान

ACSCEND प्रणाली ने कैंसर स्टेम कोशिकाओं की तीन प्रमुख अवस्थाओं की पहचान की

1. Pluripotent-like (प्लुरिपोटेंट जैसी)
ये सबसे अधिक शक्तिशाली कोशिकाएं होती हैं और कई प्रकार की कैंसर कोशिकाओं में बदल सकती हैं।

2. Multipotent-like (मल्टीपोटेंट जैसी)
ये सीमित प्रकार की कोशिकाओं में परिवर्तित होती हैं, लेकिन कैंसर को बढ़ाने की क्षमता बनाए रखती हैं।

3. Unipotent-like (यूनिपोटेंट जैसी)
ये अपेक्षाकृत कम परिवर्तनशील होती हैं, फिर भी ट्यूमर को जीवित रखने में भूमिका निभाती हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि इन तीनों अवस्थाओं की पहचान से चिकित्सकों को यह समझने में मदद मिलेगी कि मरीज के शरीर में कैंसर किस स्तर पर मौजूद है और भविष्य में उसका व्यवहार कैसा हो सकता है।

इम्यूनोथेरेपी क्यों हो जाती है कम प्रभावी?

शोध में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि जिन मरीजों में उच्च स्तर की कैंसर स्टेम कोशिकाएं मौजूद थीं, उनमें इम्यूनोथेरेपी का प्रभाव अपेक्षाकृत कम देखा गया।

अर्थात भविष्य में डॉक्टर उपचार शुरू करने से पहले ही यह अनुमान लगा सकेंगे कि कौन-सा मरीज इम्यूनोथेरेपी से लाभान्वित होगा और किसे किसी अन्य उपचार की आवश्यकता पड़ सकती है।

सिंगल-सेल और बल्क RNA डेटा का अनूठा मेल

ACSCEND की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह Single-cell RNA Sequencing तथा Bulk RNA Sequencing दोनों प्रकार के डेटा का संयुक्त विश्लेषण कर सकता है।

सामान्यतः सिंगल-सेल तकनीक अत्यंत महंगी और सीमित प्रयोगशालाओं तक उपलब्ध होती है, जबकि बल्क RNA परीक्षण अपेक्षाकृत सस्ता और अधिक व्यापक है।

नई एआई प्रणाली दोनों प्रकार के आंकड़ों को जोड़कर बेहद सटीक निष्कर्ष निकाल सकती है। इससे भविष्य में छोटे अस्पतालों और सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों में भी आधुनिक कैंसर विश्लेषण उपलब्ध कराया जा सकेगा।

प्रिसीजन मेडिसिन की दिशा में बड़ा कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक Precision Medicine की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

इसका अर्थ है कि भविष्य में सभी मरीजों का एक जैसा उपचार करने के बजाय प्रत्येक व्यक्ति के कैंसर की जैविक संरचना के अनुसार उपचार तय किया जा सकेगा। इससे अनावश्यक दवाओं से बचाव होगा, उपचार अधिक प्रभावी होगा और मरीजों के स्वस्थ होने की संभावना भी बढ़ सकती है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह उपलब्धि?

भारत में हर वर्ष लाखों नए कैंसर मरीज सामने आते हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे मरीजों की होती है जिनमें उपचार के बाद बीमारी दोबारा लौट आती है।

यदि यह एआई तकनीक व्यापक स्तर पर अस्पतालों तक पहुंचती है तो डॉक्टर पहले ही यह अनुमान लगा सकेंगे कि किन मरीजों में पुनरावृत्ति (Recurrence) का खतरा अधिक है। इससे समय रहते अतिरिक्त उपचार और निगरानी संभव हो सकेगी।

भविष्य की नई उम्मीद

कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब केवल कंप्यूटर विज्ञान तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि चिकित्सा अनुसंधान में भी क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा विकसित ACSCEND इस दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। यदि भविष्य के नैदानिक परीक्षणों में भी इसके परिणाम सफल रहते हैं तो आने वाले वर्षों में कैंसर का उपचार अधिक सटीक, व्यक्तिगत और प्रभावी बनाया जा सकेगा।

यह शोध न केवल भारत की वैज्ञानिक क्षमता का प्रमाण है, बल्कि दुनिया भर के कैंसर मरीजों के लिए भी एक नई उम्मीद लेकर आया है। आने वाले समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ऐसी तकनीकें कैंसर के उपचार, निगरानी और पुनरावृत्ति रोकने की रणनीतियों को पूरी तरह बदल सकती हैं।

डिस्क्लेमर: यह समाचार भारत सरकार के प्रेस सूचना ब्यूरो द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति तथा उसमें उपलब्ध वैज्ञानिक जानकारी पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों को शोध एवं विज्ञान से जुड़ी नवीनतम जानकारी उपलब्ध कराना है। यह सामग्री किसी प्रकार की चिकित्सीय सलाह का विकल्प नहीं है। कैंसर या अन्य किसी स्वास्थ्य संबंधी समस्या के उपचार एवं परामर्श के लिए योग्य चिकित्सक या विशेषज्ञ से संपर्क करें।

UK Cyber News

Prem Padiyar

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Report By UK Cyber News