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सोशल मीडिया पर वायरल दावों का सरकार ने किया खंडन, UPI चार्ज पर दी बड़ी सफाई

UPI पर शुल्क की अफवाहों के बीच वित्त मंत्रालय ने जारी की आधिकारिक सफाई, आम नागरिकों को बड़ी राहत।

नई दिल्ली | 8 अगस्त 2026

पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर एक खबर ने करोड़ों लोगों की चिंता बढ़ा दी थी। व्हाट्सएप ग्रुप, फेसबुक पोस्ट, यूट्यूब वीडियो और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगातार यह दावा किया जा रहा था कि केंद्र सरकार अब UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) से होने वाले लेन-देन पर शुल्क लगाने जा रही है। कई पोस्ट में यह भी कहा गया कि अब Google Pay, PhonePe, BHIM, Paytm और अन्य UPI ऐप्स के जरिए भुगतान करने पर हर बार पैसे कटेंगे। इन दावों के बाद आम लोगों से लेकर छोटे व्यापारियों तक के मन में सवाल उठने लगे कि क्या डिजिटल भुगतान अब महंगा होने वाला है?

लगातार बढ़ रही इन चर्चाओं और भ्रम की स्थिति के बीच आखिरकार वित्त मंत्रालय को सामने आकर स्थिति स्पष्ट करनी पड़ी। 8 अगस्त 2026 को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में केंद्र सरकार ने साफ शब्दों में कहा कि UPI से भुगतान करने वाले आम नागरिकों को किसी भी प्रकार का लेन-देन शुल्क नहीं देना होगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) होने वाले सभी UPI लेन-देन पहले की तरह पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे।

आखिर भ्रम पैदा कैसे हुआ?

दरअसल, संसद में कराधान एवं अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम (Payment and Settlement Systems Act – PSS Act), 2007 में संशोधन का प्रस्ताव लाया गया। इस संशोधन को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की अधूरी और भ्रामक जानकारियां वायरल होने लगीं।

कई लोगों ने यह निष्कर्ष निकाल लिया कि अब सरकार UPI पर सीधे शुल्क लगाने जा रही है। हालांकि वित्त मंत्रालय ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि इस संशोधन का उद्देश्य नागरिकों से शुल्क वसूलना नहीं, बल्कि देश की डिजिटल भुगतान व्यवस्था को भविष्य के लिए और अधिक मजबूत बनाना है।

सरकार ने क्या कहा?

वित्त मंत्रालय ने अपनी विज्ञप्ति में सबसे पहले यह स्पष्ट किया कि UPI आम नागरिकों के लिए निःशुल्क था, है और फिलहाल निःशुल्क ही रहेगा।

सरकार के अनुसार:

  • यदि आप अपने किसी मित्र, रिश्तेदार या अन्य व्यक्ति को UPI के माध्यम से पैसे भेजते हैं तो कोई शुल्क नहीं लगेगा।
  • रोजमर्रा के व्यक्तिगत डिजिटल भुगतान पर किसी प्रकार का अतिरिक्त चार्ज नहीं लगाया जाएगा।
  • आम उपभोक्ताओं को किसी नई व्यवस्था के कारण घबराने की आवश्यकता नहीं है।

यानी यदि आप प्रतिदिन QR कोड स्कैन करके भुगतान करते हैं या किसी को UPI से पैसे भेजते हैं, तो आपके लिए फिलहाल कुछ भी नहीं बदल रहा है।

व्यापारियों को लेकर क्या कहा गया?

सरकार ने व्यापारियों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है।

प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार अधिकांश व्यापारी लेन-देन पहले की तरह निःशुल्क बने रहेंगे।

हालांकि सरकार ने यह भी कहा है कि यदि भविष्य में Merchant Discount Rate (MDR) लागू करने की आवश्यकता महसूस होती है, तो यह केवल कुछ सीमित व्यापारी लेन-देन पर, तय सीमा से अधिक राशि वाले भुगतान पर और बहुत कम दर पर लागू किया जा सकता है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसा कोई शुल्क सभी व्यापारियों या सभी लेन-देन पर समान रूप से लागू नहीं होगा।

MDR आखिर होता क्या है?

MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क होता है जो कुछ डिजिटल भुगतान प्रणालियों में व्यापारी से लिया जाता है।

यह समझना जरूरी है कि यह शुल्क ग्राहक नहीं देता, बल्कि यदि लागू हो तो व्यापारी देता है।

यही कारण है कि सरकार ने प्रेस विज्ञप्ति में बार-बार स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों के दैनिक भुगतान पर किसी प्रकार का शुल्क लगाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।

कानून में संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी?

सरकार का कहना है कि जब वर्ष 2016 में UPI की शुरुआत हुई थी तब इसकी पहुंच सीमित थी। लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।

देश में हर महीने हजारों करोड़ डिजिटल लेन-देन हो रहे हैं। इतनी बड़ी व्यवस्था को सुरक्षित और सुचारु रूप से चलाने के लिए लगातार तकनीकी निवेश की आवश्यकता पड़ती है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार आने वाले वर्षों में UPI नेटवर्क को और मजबूत बनाने के लिए कई क्षेत्रों में बड़े निवेश की जरूरत होगी, जिनमें शामिल हैं,

  • साइबर सुरक्षा को और मजबूत करना।
  • ऑनलाइन धोखाधड़ी की रोकथाम।
  • सर्वर और तकनीकी ढांचे का विस्तार।
  • बढ़ते लेन-देन के अनुरूप डिजिटल अवसंरचना तैयार करना।
  • नई कंपनियों को इस व्यवस्था से जोड़कर प्रतिस्पर्धा बढ़ाना।
  • भविष्य की तकनीकों के अनुरूप भुगतान प्रणाली विकसित करना।

सरकार का कहना है कि यही कारण है कि कानून में आवश्यक प्रावधान जोड़े जा रहे हैं ताकि भविष्य में डिजिटल भुगतान व्यवस्था टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनी रहे।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभी किसी प्रकार का नया शुल्क लागू नहीं किया गया है।

यदि संसद संशोधन विधेयक को पारित करती है, तो उसके बाद NPCI की अध्यक्षता वाली “UPI एवं सेवा संचालन समिति” यह तय करेगी कि भविष्य में MDR लागू करने की आवश्यकता है या नहीं, और यदि होगी तो किन परिस्थितियों में होगी।

यानी वर्तमान समय में किसी भी नए शुल्क को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

सोशल मीडिया की अफवाहों पर सरकार का जवाब

हाल के दिनों में कुछ सोशल मीडिया पोस्ट और मीडिया रिपोर्टों में यह दावा भी किया गया कि भारत की डिजिटल भुगतान नीति पर बाहरी दबाव काम कर रहा है।

वित्त मंत्रालय ने इन दावों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया है।

सरकार ने कहा कि यदि बाहरी दबाव वास्तव में होता, तो भारत वर्ष 2016 में दुनिया की सबसे आधुनिक डिजिटल भुगतान प्रणाली विकसित नहीं करता और वर्ष 2020 से नागरिकों तथा व्यापारियों के लिए इसे निःशुल्क भी नहीं बनाता।

सरकार ने कहा कि UPI भारत की अपनी तकनीकी उपलब्धि है और इसे आगे भी मजबूत बनाया जाएगा।

दुनिया की सबसे बड़ी भुगतान प्रणाली बन चुका है UPI

वित्त मंत्रालय के अनुसार आज UPI केवल भारत की नहीं बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी रीयल-टाइम डिजिटल भुगतान प्रणाली बन चुका है।

सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार केवल जुलाई 2026 में UPI के माध्यम से 2,366 करोड़ लेन-देन हुए, जिनका कुल मूल्य लगभग 29.9 लाख करोड़ रुपये रहा।

इसके अलावा UPI अब 11 देशों में अपनी सेवाएं दे रहा है और कई अन्य देशों ने भी इसमें रुचि दिखाई है।

यह भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था की तेजी से बढ़ती ताकत को दर्शाता है।

वित्त मंत्रालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रही अपुष्ट या भ्रामक खबरों पर भरोसा न करें।

UPI या डिजिटल भुगतान से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की आधिकारिक सूचनाओं पर ही विश्वास करें।

फिलहाल आम नागरिकों के लिए राहत की खबर यही है कि UPI से पैसे भेजने या प्राप्त करने पर कोई नया शुल्क लागू नहीं किया गया है। सोशल मीडिया पर चल रहे ऐसे दावे कि “अब हर UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगेगा”, सरकार ने उन्हें स्पष्ट रूप से भ्रामक बताया है।

हालांकि सरकार ने यह जरूर संकेत दिया है कि भविष्य में UPI जैसी विशाल डिजिटल भुगतान प्रणाली को और अधिक सुरक्षित, आधुनिक तथा आत्मनिर्भर बनाने के लिए कुछ नीतिगत बदलाव किए जा सकते हैं। लेकिन यदि भविष्य में किसी प्रकार का MDR लागू भी होता है, तो वह केवल कुछ चुनिंदा व्यापारी लेन-देन तक सीमित होगा। आम उपभोक्ताओं के दैनिक डिजिटल भुगतान पर फिलहाल किसी प्रकार का कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जा रहा है।

इसलिए यदि आप रोजाना UPI के जरिए भुगतान करते हैं, तो फिलहाल आपको किसी अतिरिक्त चार्ज की चिंता करने की जरूरत नहीं है। सरकार ने साफ कर दिया है कि करोड़ों भारतीयों के लिए UPI पहले की तरह आसान, सुरक्षित और निःशुल्क बना रहेगा।

स्रोत: वित्त मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा 8 अगस्त 2026 को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति

UK Cyber News

Prem Padiyar

साइबर ठगी एवं डिजिटल अरेस्ट के कारण करोड़ों रुपयों की ठगी के मामले सामने आ रहे है, ये ठग अलग अलग माध्यम से लोगों को ठगते है। कभी पुलिस ऑफिसर बनकर, कभी कोरियर डिलीवरी बॉय बनकर, कभी बैंक कर्मचारी या कभी किसी सरकारी संस्थान के कर्मचारी बनकर, कभी ये राशन कार्ड / आधार कार्ड अपडेट तो कभी आयुष्मान कार्ड अपडेट के नाम पर लोगों को ठगते है, कभी मुसीबत में फंसे करीबी रिश्तेदार या दोस्त बनकर आमजन को ठगते हैं। इनसे बचने का एक मात्र तरीका जागरूकता है। इसके शिकार महिलाएं एवं बुजुर्ग ज्यादातर बनते है, हमारा उद्देश्य रहेगा कि समय समय पर आप लोगों तक साइबर क्राइम की जानकारी एवं सुरक्षा के उपाय पहुंचाया जाय, जिससे हर आदमी साइबर ठगी का शिकार होने से बच सके और अपनी गाढ़ी कमाई को बचा सके, साथ ही हमारी कोशिश रहेगी कि देश दुनिया की तमाम खबरें आप तक पहुंचाई जा सके।

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Report By UK Cyber News