बदरीनाथ धाम चढ़ावा कांड: दूसरी गिरफ्तारी से मचा हड़कंप, 34 गिनती हुईं… फिर CCTV रिकॉर्डिंग कहाँ गई?
SIT ने पूर्व मंदिर अधिकारी को भी किया गिरफ्तार। चढ़ावे की गिनती, डिजिटल रिकॉर्ड और निगरानी व्यवस्था पर उठे सवालों के बीच अब फोरेंसिक जांच से सच सामने आने की उम्मीद।

विशेष रिपोर्ट | UK Cyber News
देहरादून/बदरीनाथ।
उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध श्री बदरीनाथ धाम में चढ़ावा चोरी का मामला अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। पहले बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) के निलंबित कर्मचारी प्रमोद नौटियाल की गिरफ्तारी हुई और अब शुक्रवार को पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान को भी विशेष जांच दल (SIT) ने पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। दूसरी गिरफ्तारी ने इस पूरे मामले को केवल एक व्यक्ति की कथित करतूत से आगे बढ़ाकर पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान मिले CCTV फुटेज में राजेंद्र चौहान कथित रूप से 22, 25 और 29 जून को चढ़ावे की नकदी अपनी जेब में रखते दिखाई दिए। इससे पहले गिरफ्तार प्रमोद नौटियाल के संबंध में भी पुलिस ने CCTV फुटेज मिलने की बात कही थी। हालांकि दोनों आरोपियों के खिलाफ लगे आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायालय और जांच पूरी होने के बाद ही होगा।
लेकिन इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल अब किसी एक गिरफ्तारी का नहीं, बल्कि उस डिजिटल रिकॉर्ड का है, जो जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 23 अप्रैल को कपाट खुलने से लेकर 20 जून तक चढ़ावे की लगभग 34 बार गिनती हुई, लेकिन जांच एजेंसियों को अधिकांश रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं मिली। बताया गया कि जांच के दौरान केवल कुछ दिनों की रिकॉर्डिंग ही मिल सकी। यदि यह तथ्य जांच में सही पाया जाता है तो यह अपने आप में गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
हालांकि यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य भी है। अब तक पुलिस या फोरेंसिक जांच ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा है कि रिकॉर्डिंग जानबूझकर डिलीट की गई थीं। इसलिए इस स्तर पर ऐसा दावा करना उचित नहीं होगा। यही कारण है कि SIT ने डिजिटल साक्ष्यों की वैज्ञानिक जांच पर जोर दिया है।
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि BKTC की आंतरिक जांच रिपोर्ट SIT को सौंपी जा चुकी है। साथ ही CCTV फुटेज, रिकॉर्ड रूम, गिनती कक्ष की कार्यप्रणाली और संबंधित अधिकारियों से लगातार पूछताछ की जा रही है।
अब सवाल केवल यह नहीं है कि चोरी किसने की। सवाल यह भी है कि यदि चढ़ावे की गिनती निर्धारित प्रक्रिया के तहत कई लोगों की मौजूदगी में होती है, तो निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी? क्या डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्था थी? क्या नियमित बैकअप लिया जाता था? यदि नहीं, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी थी?
दूसरी गिरफ्तारी के बाद SIT ने भी संकेत दिए हैं कि जांच अभी समाप्त नहीं हुई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कुछ अन्य लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है और आवश्यकता पड़ने पर आगे भी कार्रवाई की जा सकती है।
बदरीनाथ धाम करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां चढ़ाया गया प्रत्येक दान केवल धन नहीं बल्कि विश्वास का प्रतीक होता है। ऐसे में इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखने की भी जिम्मेदारी है।
अब सबसे बड़े सवाल
- क्या चढ़ावे की गिनती की पूरी डिजिटल रिकॉर्डिंग सुरक्षित थी?
- यदि रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं है तो उसका कारण क्या है?
- क्या फोरेंसिक जांच से पुराना डेटा रिकवर हो सकेगा?
- क्या यह मामला केवल दो लोगों तक सीमित है या जांच का दायरा और बढ़ेगा?
- क्या भविष्य में मंदिरों की चढ़ावा व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नई डिजिटल प्रणाली लागू की जाएगी?


