देहरादून (सोडा सरोली):
उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों में जहाँ पलायन एक स्थाई समस्या बनी हुई है, वहीं देहरादून के सोडा सरोली क्षेत्र से एक सकारात्मक खबर सामने आ रही है। स्थानीय निवासी भरत सिंह सोलंकी पारंपरिक खेती और आधुनिक बाज़ार के बीच एक सेतु (bridge) बनकर उभर रहे हैं। वे न केवल खुद स्वरोज़गार से जुड़े हैं, बल्कि पहाड़ के शुद्ध जैविक उत्पादों को एक नई पहचान दिलाने में भी जुटे हैं。
प्रमाणित शुद्धता: खेतों से सीधा आपकी रसोई तक
भरत सिंह सोलंकी द्वारा तैयार किए जा रहे उत्पाद पूरी तरह से ‘परम्परागत कृषि विकास योजना’ (PKVY) और PGS-India Green द्वारा प्रमाणित हैं। हाल ही में सामने आई तस्वीरों में उनके कुछ प्रमुख उत्पाद देखे जा सकते हैं:
- मंडुवा आटा: पौष्टिकता से भरपूर यह आटा ₹60 प्रति किलो की किफायती दर पर उपलब्ध कराया जा रहा है।
- टिमली राजमा: पहाड़ की यह विशेष दाल ₹90 प्रति आधा किलो (500g) के पैक में तैयार की जा रही है।
- अन्य जैविक उत्पाद: इनके अलावा सोयाबीन, गहत और झंगोरा जैसे उत्पादों को भी वैज्ञानिक तरीके से पैक कर बाज़ार तक पहुँचाया जा रहा है।
सिर्फ खेती नहीं, एक मिशन है ‘जैविक अपनाओ’
सोलंकी का कार्य केवल उत्पादों की बिक्री तक सीमित नहीं है। उनके उत्पादों की पैकेजिंग पर “जैविक अपनाओ, पर्यावरण बचाओ” जैसे संदेश लिखे हैं, जो मृदा स्वास्थ्य और रासायनिक मुक्त खान-पान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। वे स्थानीय किसानों को सिखा रहे हैं कि कैसे सही पैकेजिंग और सरकारी योजनाओं (जैसे कृषि विभाग की सहायता) का उपयोग कर अपने उत्पादों का उचित मूल्य प्राप्त किया जा सकता है।
सीमित संसाधन, बड़ी इच्छाशक्ति
भरत सिंह सोलंकी का यह मॉडल दिखाता है कि यदि सरकारी योजनाओं का सही क्रियान्वयन हो, तो स्थानीय स्तर पर ही रोज़गार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। सोडा सरोली के ग्रामीणों का कहना है कि सोलंकी जैसे ज़मीनी कार्यकर्ताओं को यदि तकनीकी और मार्केटिंग का और अधिक सहयोग मिले, तो यह प्रयास पूरे उत्तराखंड के लिए एक ‘सक्सेस मॉडल’ बन सकता है।
ये उत्पाद न केवल शुद्ध हैं, बल्कि कृषि विभाग की ‘परम्परागत कृषि विकास योजना’ के तहत प्रमाणित भी हैं।
- मंडुवा (रागी): शुगर और कैल्शियम के लिए रामबाण।
- टिमली राजमा: स्वाद और प्रोटीन का बेजोड़ संगम।
”जैविक अपनाओ, पर्यावरण बचाओ”
डिस्क्लेमर:
यह सामग्री जनहित एवं सूचना के उद्देश्य से साझा की गई है। इसका उद्देश्य किसी प्रकार का प्रचार या आधिकारिक दावा करना नहीं है। संबंधित योजनाओं व प्रमाणनों की पुष्टि संबंधित विभाग से की जा सकती है।



