
नई दिल्ली|
भारतीय प्रसारण इतिहास और दूरदर्शन के दर्शकों के लिए आज का दिन बेहद भावुक और दुखद है। 80 और 90 के दशक में अपनी सौम्य मुस्कान और सलीके से समाचार पढ़ने वाली प्रसिद्ध न्यूज़ रीडर सरला माहेश्वरी अब हमारे बीच नहीं रहीं। उनके पूर्व सहकर्मी और मशहूर समाचार वाचक शम्मी नारंग ने एक ट्वीट के जरिए इस दुखद खबर की पुष्टि की है।
खबरों में शालीनता की मिसाल
सरला माहेश्वरी उस दौर की पत्रकारिता का चेहरा थीं, जहाँ खबरों की गहराई और भाषा की मर्यादा सबसे ऊपर होती थी। जब शाम को दूरदर्शन पर समाचार शुरू होते थे, तो उनका स्थिर चेहरा और सधी हुई आवाज़ करोड़ों भारतीयों को देश-दुनिया के हालातों से रूबरू कराती थी।
- सादगी का प्रतीक: बिना किसी शोर-शराबे और गहमागहमी के, सरला जी अपनी सादगी और बेहतरीन हिंदी उच्चारण के लिए जानी जाती थीं।
- एक विशेष पहचान: उनके दौर में न्यूज़ एंकर केवल एक चेहरा नहीं, बल्कि घर के सदस्य की तरह होते थे, जिन्हें उनकी गरिमा के लिए सम्मान दिया जाता था।
सहकर्मियों और प्रशंसकों में शोक की लहर
शम्मी नारंग समेत दूरदर्शन के उनके तमाम साथियों ने उन्हें याद करते हुए गहरा दुख व्यक्त किया है। सोशल मीडिया पर उनके प्रशंसक उस दौर को याद कर रहे हैं जब ‘ब्रेकिंग न्यूज़’ की होड़ नहीं थी, बल्कि खबरों में ठहराव और सच्चाई की मिठास थी।
अंतिम विदाई
जानकारी के अनुसार, सरला जी का अंतिम संस्कार आज शाम 4 बजे दिल्ली के निगम बोध घाट पर किया गया। उनके जाने से पत्रकारिता और प्रसारण जगत ने एक ऐसी शख़्सियत को खो दिया है जिन्होंने न्यूज़ एंकरिंग को ‘ग्रेस’ और ‘गरिमा’ दी।
श्रद्धांजलि:
“सरला जी, आपकी वो सौम्य आवाज़ और गरिमापूर्ण उपस्थिति हमेशा हमारे ज़हन में ज़िंदा रहेगी। दूरदर्शन के उस ब्लैक एंड व्हाइट और शुरुआती रंगीन दौर को अपनी आवाज़ से सजाने के लिए शुक्रिया। आपको भावभीनी श्रद्धांजलि।”



