उत्तराखंड में बढ़ते साइबर अपराध
UKCYBERNEWS विशेष रिपोर्ट

बदलते डिजिटल युग के साथ उत्तराखंड में साइबर अपराधों का खतरा बढ़ता जा रहा है। हाल ही में देहरादून, अल्मोड़ा और ऊधम सिंह नगर में साइबर ठगी व डेटा ब्रीच के कई मामले सामने आए हैं। पुलिस आंकड़ों के अनुसार राज्य में प्रतिदिन लगभग 60 से 70 नागरिक किसी न किसी रूप में ऑनलाइन ठगी या डिजिटल धोखाधड़ी का शिकार बन रहे हैं।
**डिजिटल अरेस्ट का नया जाल**
अल्मोड़ा जिले के देघाट क्षेत्र के एक बुजुर्ग को साइबर ठगों ने झूठे अपराध में फंसाने की धमकी देकर 10 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखकर 18.80 लाख रुपये हड़प लिए। पुलिस ने राजस्थान के सूरतगढ़ से आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। डिजिटल अरेस्ट के ये केस अब साइबर अपराधों की नई चुनौती बन चुके हैं, जिनमें ठग खुद को अपराध जांच अधिकारी बताकर पीड़ित से रकम वसूली करते हैं।
**डेटा लीक की बढ़ती घटनाएँ**
देहरादून में एएसपी कुश मिश्रा ने हाल में चेताया कि व्यक्तिगत डेटा लीक होने से बैंकिंग और सोशल मीडिया खातों पर अधिक जोखिम बढ़ गया है। नागरिकों को सलाह दी गई कि वे किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें और साइबर शिकायत के लिए 1930 हेल्पलाइन पर तुरंत संपर्क करें।
**जागरूकता अभियान बना हथियार**
उत्तराखंड पुलिस ने “आजादी फ्रॉम साइबर क्राइम” और “सुरक्षित त्योहार—सुरक्षित ट्रांजैक्शन” जैसे अभियानों के तहत पुलिस विभाग की साइबर सेल ने व्लॉगरों की मदद से जनजागरूकता बढ़ाने का अभिनव तरीका अपनाया है। प्रसिद्ध यूट्यूबर पवन पहाड़ी और तनु रावत ने जागरूकता वीडियो बनाए जो सोशल मीडिया पर लाखों लोगों तक पहुंचे। त्योहारों के समय ये अभियान और भी प्रभावी रहे, जिससे जनता को फर्जी कॉल्स और झूठी ऐप्स से सचेत किया जा सका।
**सरकारी और पुलिस पहल**
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल में कहा कि राज्य सरकार साइबर सुरक्षा ढांचे को और मज़बूत करने के लिए ‘Cyber Peace Program 2.0’ की दिशा में काम कर रही है। इसमें हर जिले में प्रशिक्षण केंद्र बनाए जाएंगे जहाँ स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और व्यापारियों को साइबर सुरक्षा की बुनियादी शिक्षा दी जाएगी। चमोली, बागेश्वर और रुद्रपुर जैसे जिलों में 15 से अधिक कार्यशालाएँ आयोजित की जा चुकी हैं, जिनमें हज़ारों नागरिकों ने भाग लिया।
**कठोर कार्रवाई और सफलताएँ **
उत्तराखंड पुलिस ने वर्ष 2025 में अब तक 500 से अधिक साइबर अपराधियों को गिरफ़्तार किया है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के माध्यम से राज्य ने 47.02 करोड़ रुपये की ठगी की रकम पीड़ितों को वापस कराई और देशभर में शीर्ष छह राज्यों में स्थान पाया।
*संवेदनशील समूहों पर खतरा*
पुलिस के अनुसार रिटायर्ड कर्मचारी और महिलाएँ सबसे अधिक साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। 2025 के पहले आठ महीनों में लगभग 10.5 करोड़ रुपये की ठगी सिर्फ रिटायर्ड नागरिकों से की गई। उत्तराखंड तेज़ी से तकनीक अपनाने वाला राज्य है, लेकिन साइबर अपराधियों की चुनौती से निपटने के लिए जनता का जागरूक होना सबसे बड़ा रक्षा कवच है। सरकार और पुलिस की सख्त कार्रवाई, साथ ही डिजिटल जागरूकता अभियानों ने इस दिशा में नई मिसाल कायम की है।
(रिपोर्ट – UKCYBERNEWS नेटवर्क)


