तेजस Mk1A की डिलीवरी में देरी पर रक्षा मंत्रालय सख्त, HAL पर लग सकता है जुर्माना

नई दिल्ली:
भारतीय वायुसेना (IAF) की परिचालन क्षमता को नई ऊंचाई पर ले जाने वाले स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस Mk1A (Tejas Mk1A) की आपूर्ति में हो रही देरी ने अब केंद्र सरकार की चिंता बढ़ा दी है। रक्षा मंत्रालय ने इस देरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए विमान निर्माता कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) को स्पष्ट संकेत दिए हैं कि अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन होने पर दंडात्मक कार्रवाई (Penalty) की जा सकती है।
क्या है पूरा मामला?
वायुसेना के आधुनिकीकरण के तहत 83 तेजस Mk1A विमानों का ऑर्डर दिया गया था। निर्धारित समयसीमा के अनुसार, पहला विमान वायुसेना को सौंप दिया जाना चाहिए था, लेकिन उत्पादन में आ रही तकनीकी चुनौतियों और जटिलताओं के कारण यह प्रक्रिया पिछड़ गई है। सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय ने हाल ही में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में परियोजना की धीमी गति पर असंतोष व्यक्त किया है।
देरी के प्रमुख कारण और चुनौतियां
रक्षा क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि इस देरी के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित कारक जिम्मेदार हैं:
- सप्लाई चेन बाधाएं: वैश्विक स्तर पर पुर्जों की आपूर्ति में आ रही दिक्कतें।
- सिस्टम एकीकरण: तेजस Mk1A में इस्तेमाल होने वाले उन्नत रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट के एकीकरण में समय अधिक लग रहा है।
- उत्पादन क्षमता: मौजूदा उत्पादन लाइनों पर एक साथ कई परियोजनाओं का दबाव।
आत्मनिर्भर भारत और वायुसेना की रणनीति
तेजस Mk1A केवल एक विमान नहीं है, बल्कि भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का गौरव है। यह विमान पुराने मिग-21 बेड़े की जगह लेने और वायुसेना की फ्रंटलाइन ताकत बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है। रक्षा मंत्रालय चाहता है कि HAL अपनी उत्पादन क्षमता में तेजी लाए ताकि भविष्य के रणनीतिक लक्ष्यों में कोई बाधा न आए।
आगे की राह
मंत्रालय ने HAL को निर्देशित किया है कि वे डिलीवरी का एक व्यावहारिक और ‘समयबद्ध रोडमैप’ पेश करें। हालांकि आधिकारिक तौर पर जुर्माने की राशि या किसी भी कठोर कदम की घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन यह स्पष्ट है कि रक्षा मंत्रालय अब हर स्तर पर जवाबदेही तय करने के मूड में है।



