देहरादून में फर्जी IPS गिरफ्तार: नौकरी और टेंडर के नाम पर लाखों की ठगी,
RAW और CRPF अधिकारी बनकर करता था धोखाधड़ी, कई और पीड़ितों की आशंका

देहरादून:
देहरादून पुलिस ने एक ऐसे शातिर ठग को गिरफ्तार किया है, जिसने वर्दी और फर्जी पहचान को अपना सबसे बड़ा हथियार बना लिया था। आरोपी खुद को कभी भारतीय पुलिस सेवा (IPS) का अधिकारी, कभी RAW एजेंट, कभी सेना का वरिष्ठ अधिकारी तो कभी CRPF का अधिकारी बताकर लोगों का विश्वास जीतता था। इसके बाद नौकरी दिलाने, सरकारी टेंडर दिलाने, कंपनी का शीघ्र पंजीकरण कराने और अन्य सरकारी कार्यों का झांसा देकर लाखों रुपये ऐंठ लेता था।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) देहरादून के निर्देश पर गठित विशेष टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और लगातार निगरानी के बाद आरोपी आर. यशोवर्धन (35) को मसूरी रोड स्थित CSI तिराहे से गिरफ्तार कर लिया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से इसी तरह लोगों को अपना शिकार बना रहा था और उसके खिलाफ अन्य शिकायतें भी सामने आ सकती हैं।
ऐसे करता था लोगों को प्रभावित
पुलिस के अनुसार आरोपी बेहद आत्मविश्वास के साथ लोगों से मिलता था। वह महंगे होटलों में मुलाकात तय करता, फर्जी पहचान पत्र और विजिटिंग कार्ड दिखाता तथा सरकारी अधिकारियों से अपने कथित संबंधों का दावा करता था। इसी भरोसे के आधार पर वह लोगों से मोटी रकम वसूलता था।
आरोपी के कब्जे से विभिन्न एजेंसियों के फर्जी पहचान पत्र, विजिटिंग कार्ड और वर्दियां बरामद हुई हैं, जिन्हें पुलिस ने जांच के लिए कब्जे में ले लिया है।
दो बड़े मामले आए सामने
पहला मामला 8 जुलाई 2026 को सामने आया, जब डाकरा बाजार निवासी अंशुल उपाध्याय ने शिकायत दर्ज कराई कि आरोपी ने उनकी दिवंगत माता के नाम पर कंपनी का शीघ्र पंजीकरण कराने का भरोसा देकर 15 लाख रुपये ठग लिए।
इसके बाद 15 जुलाई को कैनाल रोड निवासी डॉ. अनुषा ने मुकदमा दर्ज कराया। उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपी ने खुद को IPS अधिकारी बताकर रक्षा मंत्रालय में डेटा साइंस कंसल्टेंट की नौकरी दिलाने का झांसा दिया और 4.60 लाख रुपये ले लिए।
UPSC में असफलता के बाद चुना ठगी का रास्ता
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह कई वर्षों तक UPSC परीक्षा की तैयारी करता रहा लेकिन सफल नहीं हो पाया। अधिकारियों की जीवनशैली से प्रभावित होकर उसने फर्जी पहचान बनाकर लोगों को ठगने का रास्ता अपना लिया।
जांच में खुल सकते हैं और बड़े राज
पुलिस अब आरोपी के मोबाइल फोन, बैंक खातों, लेन-देन और संपर्कों की जांच कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि उत्तराखंड के अलावा अन्य राज्यों के लोग भी इस ठगी का शिकार हुए हो सकते हैं। यदि किसी व्यक्ति से इसी तरह नौकरी, टेंडर या सरकारी कार्य के नाम पर पैसे लिए गए हैं तो पुलिस उनसे भी सामने आने की अपील कर सकती है। फिलहाल मामले की जांच जारी है।
UK Cyber News विश्लेषण
यह मामला केवल आर्थिक ठगी का नहीं बल्कि सरकारी संस्थाओं की साख का दुरुपयोग करने का भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी सरकारी अधिकारी यदि किसी कार्य के बदले निजी खाते में पैसे मांगता है या व्यक्तिगत रूप से रकम जमा कराने को कहता है तो नागरिकों को तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। नियुक्तियां, टेंडर और कंपनी पंजीकरण जैसी प्रक्रियाओं के अपने आधिकारिक पोर्टल और निर्धारित नियम होते हैं।



