सतपुली में युवक की खुदकुशी के बाद उबाल गणेश गोदियाल का पुलिस पर तीखा हमला
क्या गरीब की जान की कोई कीमत नहीं?

देहरादून/सतपुली:
उत्तराखंड में कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पौड़ी जिले के सतपुली में एक गरीब परिवार के बेटे ‘पंकज’ की मौत ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश पैदा कर दिया है। आरोप है कि मृतक ने सतपुली पुलिस की कथित प्रताड़ना और दुर्व्यवहार से तंग आकर आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठाया है।
हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने शासन-प्रशासन के गलियारों में हलचल मचा दी है। इस वीडियो में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल अपने साथियों के साथ सतपुली पुलिस अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करते और तीखी बहस के साथ न्याय की गुहार लगाते नजर आ रहे हैं।
सतपुली पुलिस पर गंभीर आरोप और गोदियाल के सवाल:
गणेश गोदियाल जी ने पुलिस की निष्पक्षता और ‘मित्र पुलिस’ के दावों पर कड़ा प्रहार करते हुए निम्नलिखित आरोप लगाए हैं:
- सतपुली पुलिस की कार्यप्रणाली: गोदियाल जी ने सीधे तौर पर सतपुली पुलिस को इस त्रासद घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस का दोहरा रवैया गरीबों के प्रति दमनकारी है, जबकि रसूखदारों के आगे नतमस्तक।
- आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप: उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिस ने पंकज को मानसिक और शारीरिक रूप से इतना प्रताड़ित किया कि उसे अपनी जीवनलीला समाप्त करने पर मजबूर होना पड़ा। उन्होंने पूछा, “क्या गरीब का बेटा है तो उसे जान से मार दोगे? बड़े आदमी के पैर पड़ जाओ और गरीब की जान ले लो… क्या यही कानून है?”
- पोस्टमार्टम पर संदिग्ध कार्रवाई: वीडियो में यह सवाल भी प्रमुखता से उठाया गया कि सतपुली पुलिस ने बिना परिवार की सहमति और मौजूदगी के पोस्टमार्टम की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की कोशिश क्यों की? इसे मामले को दबाने की साजिश के रूप में देखा जा रहा है।
- FIR और जवाबदेही की मांग: कांग्रेस अध्यक्ष ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जिस युवक ने मरने से पहले वीडियो बनाकर प्रताड़ना की बात कही, उसके आधार पर दोषी पुलिसकर्मियों पर तत्काल सख्त कार्रवाई और FIR क्यों नहीं हुई?
इंसाफ के लिए सड़क पर धरना
न्याय की मांग को लेकर गणेश गोदियाल और स्थानीय लोगों ने सतपुली में जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पंकज ने मरने से पहले अपनी आपबीती सोशल मीडिया पर साझा की थी, जो पुलिस के खिलाफ सबसे बड़ा साक्ष्य है। गोदियाल जी ने साफ किया कि जब तक सतपुली पुलिस के दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती और परिवार को न्याय नहीं मिलता, यह विरोध थमने वाला नहीं है।


