घनसाली के युवक अंग्रेज सिंह बिष्ट को अब तक नहीं मिले कृत्रिम हाथ?
सोशल मीडिया पर पुराने वादों को लेकर फिर उठे सवाल

टिहरी गढ़वाल।
उत्तराखंड के टिहरी जनपद के घनसाली निवासी अंग्रेज सिंह बिष्ट का मामला एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। कुछ समय पहले पारिवारिक विवाद के दौरान दोनों हाथ गंवाने वाले अंग्रेज सिंह बिष्ट की दर्दनाक कहानी ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। घटना सामने आने के बाद आम लोगों से लेकर कई सामाजिक कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवी संस्थाओं और समाजसेवियों ने युवक की मदद का भरोसा दिलाया था। कई लोगों ने सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया के माध्यम से यह भी कहा था कि युवक के घाव पूरी तरह ठीक होने के बाद उसे आधुनिक कृत्रिम हाथ उपलब्ध कराए जाएंगे।
अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि अंग्रेज सिंह बिष्ट के घाव पूरी तरह भर चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक कृत्रिम हाथ नहीं लगाए गए हैं। पोस्ट में यह भी सवाल उठाया गया है कि जिन लोगों ने सार्वजनिक रूप से मदद का वादा किया था, उन्होंने अब तक उस वादे को क्यों पूरा नहीं किया।
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं-
क्या कृत्रिम हाथ उपलब्ध कराने की प्रक्रिया अभी भी चल रही है?
क्या किसी चिकित्सकीय कारण से इसमें देरी हुई है?
क्या तकनीकी या प्रशासनिक अड़चनें सामने आई हैं?
क्या जिन लोगों ने सार्वजनिक रूप से मदद का वादा किया था, वे अब भी इस अभियान से जुड़े हुए हैं?
क्या पीड़ित परिवार को प्रक्रिया की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया गया है?
या फिर सोशल मीडिया पर किए गए वादे समय के साथ भुला दिए गए?
वायरल पोस्ट के अनुसार, घटना के समय कई लोगों ने युवक के साथ खड़े होने और हरसंभव सहायता देने की बात कही थी। लेकिन अब, जब उपचार का शुरुआती चरण पूरा हो चुका बताया जा रहा है, तब कृत्रिम हाथ उपलब्ध कराने को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इसी कारण सोशल मीडिया पर लोगों के बीच चर्चा तेज हो गई है और कई यूज़र्स संबंधित व्यक्तियों एवं संस्थाओं से स्थिति स्पष्ट करने की मांग कर रहे हैं।
हालांकि, यूके साइबर न्यूज़ इस वायरल दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता। यह स्पष्ट नहीं है कि कृत्रिम हाथ उपलब्ध कराने की प्रक्रिया किस चरण में है, क्या किसी चिकित्सकीय कारण से देरी हुई है या फिर किसी अन्य प्रशासनिक अथवा तकनीकी वजह से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी व्यक्ति को कृत्रिम हाथ लगाने की प्रक्रिया केवल घाव भर जाने तक सीमित नहीं होती। इसके लिए विस्तृत चिकित्सकीय परीक्षण, शरीर की स्थिति का मूल्यांकन, उपयुक्त कृत्रिम अंग का चयन, माप, निर्माण, फिटिंग और उसके बाद लंबे समय तक प्रशिक्षण एवं पुनर्वास की आवश्यकता होती है। ऐसे में कई बार पूरी प्रक्रिया में अपेक्षा से अधिक समय लग सकता है।
फिर भी यदि वास्तव में किसी संस्था, संगठन या व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक रूप से सहायता का आश्वासन दिया गया था, तो इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक है। इससे न केवल भ्रम दूर होगा बल्कि पीड़ित युवक और उसके परिवार को भी वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सकेगी।
फिलहाल इस मामले में संबंधित समाजसेवियों, संस्थाओं अथवा अन्य पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि उनका पक्ष प्राप्त होता है तो समाचार को अद्यतन किया जाएगा।
डिस्क्लेमर:



