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हाई-टेंशन बिजली लाइन: अब किसानों को मिलेगा भारी मुआवजा

इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश

प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किसानों के हित में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए सरकार को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों के खेतों के ऊपर से हाई-टेंशन बिजली लाइनें गुजर रही हैं, उन्हें मुआवजे से वंचित नहीं रखा जा सकता। कोर्ट ने राज्य सरकार के मनमाने रवैये को खारिज करते हुए केंद्र सरकार की गाइडलाइन्स को अनिवार्य रूप से लागू करने का आदेश दिया है।

क्या है पूरा मामला?

शामली जिले के किसानों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उनका कहना था कि उनकी जमीन पर हाई-टेंशन बिजली ट्रांसमिशन लाइनें बिछाई गई हैं। इन लाइनों और टावरों के कारण उनकी जमीन की उपयोगिता खत्म हो गई है। वे न तो उस हिस्से में कोई निर्माण कर सकते हैं और न ही वहां ऊंचे पेड़ लगा सकते हैं। इसके बावजूद उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा था।

कोर्ट का कड़ा रुख और निर्देश:

न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के 10 मार्च 2026 के प्रशासनिक आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सरकार मुआवजा देने में चयनात्मक (selective) रवैया नहीं अपना सकती।

​अदालत ने केंद्र सरकार के 14 जून 2024 के नए आदेश का हवाला देते हुए राज्य सरकार को ये निर्देश दिए:

  • टावर बेस क्षेत्र: जमीन की कीमत का 200 प्रतिशत मुआवजा देना होगा।
  • कॉरिडोर (RoW) क्षेत्र: तारों के नीचे आने वाली जमीन के लिए 30 प्रतिशत मुआवजा देना अनिवार्य है।

4 हफ्ते में भुगतान का आदेश:

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वह केंद्र सरकार के 2024 के नियमों को लागू करे और आदेश की तारीख से 4 सप्ताह के भीतर किसानों को मुआवजे का भुगतान सुनिश्चित करे। यह फैसला उन हजारों किसानों के लिए राहत लेकर आया है जो लंबे समय से उचित मुआवजे के लिए संघर्ष कर रहे थे।

अस्वीकरण:

​यह समाचार रिपोर्ट सार्वजनिक रूप से उपलब्ध अदालती आदेशों और प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार की गई है। इसे किसी भी प्रकार की आधिकारिक कानूनी सलाह न माना जाए। मुआवजा प्राप्त करने या अपने व्यक्तिगत मामले से जुड़ी किसी भी कानूनी कार्यवाही के लिए प्रभावित किसानों को सलाह दी जाती है कि वे संबंधित विभागीय अधिकारियों या अपने कानूनी सलाहकार से संपर्क करें। UK Cyber News इस जानकारी के आधार पर लिए गए किसी भी व्यक्तिगत निर्णय के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।

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Prem Padiyar

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Report By UK Cyber News