UK Cyber Newsउत्तराखंडदेहरादूनस्वास्थ्य

अस्पतालों के साइंटिफिक ऑफिसर्स ही सड़क पर, तो कैसे सटीक होगा ईलाज?

आंखें ही बेरोजगार, तो कैसे सुधरेगी सेहत?

देहरादून।

कहते हैं कि एक डॉक्टर अस्पताल का ‘चेहरा’ होता है और नर्सिंग स्टाफ उसके ‘हाथ-पांव’, लेकिन मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट (MLT) उस अस्पताल की ‘आंखें’ होते हैं। बिना लैब टेस्ट और सटीक डायग्नोसिस के, बड़ी से बड़ी बीमारी को पकड़ना किसी अंधेरे कमरे में सुई ढूंढने जैसा है। विडंबना देखिए कि उत्तराखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था की इन ‘आंखों’ को ही पिछले 26 सालों से धुंधला करने की कोशिश की जा रही है।

​आज आलम यह है कि जो हाथ माइक्रोस्कोप के जरिए बीमारियों का काल ढूंढते थे, वे आज अपने हक के लिए बैनर और पोस्टर थामने को मजबूर हैं।

एसोसिएशन का आरोप: डिग्रियां हाथ में, भविष्य अंधकार में

​मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट एसोसिएशन उत्तराखंड ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदेश अध्यक्ष आशीष चंद्र खाली का कहना है कि राज्य गठन से लेकर अब तक सिस्टम की संवेदनहीनता ने हजारों युवाओं का भविष्य अधर में लटका दिया है।

Video credit:- UK24x7 News.

खबर के मुख्य बिंदु (बयान और दावों के अनुसार):

  • 26 साल की लंबी उपेक्षा: संगठन का दावा है कि इतने लंबे समय में नियमित भर्ती के नाम पर विभाग ने केवल आश्वासन ही दिए हैं। BSc और MSc-MLT डिग्री धारक युवा आज बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं।
  • मानकों की अनदेखी: प्रेस वार्ता में यह बात प्रमुखता से उठी कि स्वास्थ्य विभाग IPHS मानकों को दरकिनार कर रहा है, जिससे अस्पतालों में पदों की भारी कमी बनी हुई है।
  • निजीकरण का साया: सरकारी पैथोलॉजी लैबों को PPP मोड (निजी हाथों) में देने से न केवल स्थायी नौकरियों के रास्ते बंद हो रहे हैं, बल्कि जनता की जेब पर भी बोझ बढ़ रहा है।

न्याय की मांग: नर्सिंग स्टाफ की तर्ज पर हो भर्ती

​बेरोजगार लैब टेक्नोलॉजिस्ट्स का तर्क है कि जब नर्सिंग स्टाफ के लिए वर्षवार (Year-wise) मेरिट का पैमाना तय किया जा सकता है, तो लैब टेक्नोलॉजिस्ट्स के साथ यह भेदभाव क्यों? वे भी स्वास्थ्य ढांचे का उतना ही महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिनके बिना इलाज की प्रक्रिया शुरू ही नहीं हो सकती।

आंदोलन की चेतावनी:

​एसोसिएशन ने आज देहरादून प्रेस क्लब में यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी सेवा नियमावली और भर्ती की मांगों पर तत्काल निर्णय नहीं लिया गया, तो 19 मई को सचिवालय का घेराव किया जाएगा। यह आंदोलन तब तक नहीं थमेगा जब तक इन युवाओं को उनका वाजिब हक नहीं मिल जाता।

ब्यूरो रिपोर्ट: (यूके साइबर न्यूज़) 

UK Cyber News

Prem Padiyar

साइबर ठगी एवं डिजिटल अरेस्ट के कारण करोड़ों रुपयों की ठगी के मामले सामने आ रहे है, ये ठग अलग अलग माध्यम से लोगों को ठगते है। कभी पुलिस ऑफिसर बनकर, कभी कोरियर डिलीवरी बॉय बनकर, कभी बैंक कर्मचारी या कभी किसी सरकारी संस्थान के कर्मचारी बनकर, कभी ये राशन कार्ड / आधार कार्ड अपडेट तो कभी आयुष्मान कार्ड अपडेट के नाम पर लोगों को ठगते है, कभी मुसीबत में फंसे करीबी रिश्तेदार या दोस्त बनकर आमजन को ठगते हैं। इनसे बचने का एक मात्र तरीका जागरूकता है। इसके शिकार महिलाएं एवं बुजुर्ग ज्यादातर बनते है, हमारा उद्देश्य रहेगा कि समय समय पर आप लोगों तक साइबर क्राइम की जानकारी एवं सुरक्षा के उपाय पहुंचाया जाय, जिससे हर आदमी साइबर ठगी का शिकार होने से बच सके और अपनी गाढ़ी कमाई को बचा सके, साथ ही हमारी कोशिश रहेगी कि देश दुनिया की तमाम खबरें आप तक पहुंचाई जा सके।

Related Articles

Back to top button
Report By UK Cyber News