चलो संसद मार्च पर सियासी संग्राम: अस्पताल में सोनम वांगचुक, दिल्ली में धारा 163 लागू;

नई दिल्ली।
संसद के मानसून सत्र के पहले ही दिन राजधानी दिल्ली में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक के आह्वान पर प्रस्तावित ‘चलो संसद’ मार्च को लेकर दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए संसद की ओर मार्च की अनुमति नहीं दी है।
उधर, अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक अभी दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी पत्नी डॉ. गीतांजलि आंगमो ने उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अदालत ने तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि फिलहाल सरकारी अस्पताल में उपचार जारी रहेगा।
क्या है पूरा विवाद?
सोनम वांगचुक पिछले कुछ समय से शिक्षा व्यवस्था और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर आंदोलन चला रहे हैं। उन्होंने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन देशभर के लोगों से ‘चलो संसद’ मार्च में शामिल होने की अपील की थी। उनका कहना है कि संसद के माध्यम से इन मुद्दों पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा होनी चाहिए।
हालांकि, संसद सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने मार्च की अनुमति नहीं दी। पुलिस का कहना है कि संसद परिसर और आसपास का इलाका संवेदनशील है तथा किसी भी बड़े जमावड़े से कानून-व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। इसी वजह से नई दिल्ली जिले में धारा 163 लागू की गई है।
अस्पताल से वांगचुक का संदेश
सफदरजंग अस्पताल से जारी संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा कि उनकी आवाजाही, अभिव्यक्ति और संवाद की स्वतंत्रता सीमित कर दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार या राजनीतिक दल उनके उठाए गए मुद्दों पर संसद में चर्चा का भरोसा देते हैं, तो वह अपना अनशन समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं।
हाईकोर्ट में क्या हुआ?
दिल्ली हाईकोर्ट में दायर याचिका में वांगचुक की पत्नी ने कहा कि उन्हें उनकी पसंद के निजी अस्पताल में इलाज की अनुमति दी जाए। अदालत ने फिलहाल यह मांग स्वीकार नहीं की और कहा कि उपलब्ध परिस्थितियों में सरकारी अस्पताल में इलाज जारी रहेगा। बाद में इस आदेश को चुनौती देते हुए फिर से अपील दायर की गई है, जिस पर आगे सुनवाई होनी है।
दिल्ली पुलिस का पक्ष
दिल्ली पुलिस का कहना है कि मानसून सत्र के दौरान संसद भवन और उसके आसपास सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी कारण किसी भी बड़े मार्च या प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई। प्रशासन ने लोगों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और निषेधाज्ञा का पालन करने की अपील की है।
राजनीतिक माहौल भी गरम
वांगचुक के आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज हो गई है। कुछ विपक्षी नेताओं ने आंदोलन के समर्थन में सरकार से संवाद की मांग की है, जबकि सत्तापक्ष का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है और संसद सत्र के दौरान सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
अब आगे क्या?
फिलहाल तीन बड़े सवाल सबसे महत्वपूर्ण हैं—
- क्या सरकार आंदोलनकारियों से बातचीत करेगी?
- क्या संसद में वांगचुक द्वारा उठाए गए मुद्दों पर चर्चा होगी?
- क्या दिल्ली में प्रस्तावित ‘चलो संसद’ अभियान आगे बढ़ पाएगा या प्रशासनिक रोक जारी रहेगी?
इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में मिलेंगे। फिलहाल दिल्ली पुलिस हाई अलर्ट पर है, अदालत में मामला विचाराधीन है और पूरे घटनाक्रम पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं।



