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देहरादून में महा-संग्राम: वकीलों की जिद के आगे क्या झुकेगा शासन? DM सविन बंसल के तबादले पर अड़े अधिवक्ता, करोड़ों का राजस्व फंसा!

करोड़ों का राजस्व स्वाहा! वकीलों के बहिष्कार से थमी देहरादून की रफ्तार, शासन में बेचैनी।

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी में इस वक्त प्रशासन और अधिवक्ताओं के बीच एक ऐसा गतिरोध पैदा हो गया है, जिसने पूरी व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। देहरादून बार एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि जब तक जिले के कप्तान (DM) सविन बंसल की विदाई नहीं होती, तब तक कलेक्ट्रेट के किसी भी राजस्व न्यायालय में वकील कदम नहीं रखेंगे।

क्या है विवाद की असली ग्राउंड रिपोर्ट?

​विवाद की शुरुआत रायपुर क्षेत्र में एक जमीन पर कब्जे को हटाने की कार्रवाई से हुई। प्रशासन का दावा है कि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण था, जबकि वकीलों का आरोप है कि इस कार्रवाई की आड़ में वरिष्ठ अधिवक्ता और बार के पूर्व अध्यक्ष प्रेमचंद शर्मा को जानबूझकर अपमानित किया गया।

वकीलों के मुख्य आरोप:

  • ​प्रशासन ने बिना किसी पूर्व नोटिस के कार्रवाई की।
  • ​एक सम्मानित वरिष्ठ वकील के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया।
  • ​जिलाधिकारी का रवैया ‘तानाशाही’ है और वह लोकतांत्रिक संवाद के बजाय टकराव का रास्ता चुन रहे हैं।

ठप पड़ा सिस्टम: आम जनता और सरकार दोनों का नुकसान

​यह केवल वकीलों की हड़ताल नहीं है, बल्कि देहरादून की अर्थव्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज पर एक बड़ा प्रहार है।

  1. रजिस्ट्री कार्यालय में सन्नाटा: देहरादून में रोजाना औसतन 400 से ज्यादा रजिस्ट्रियां होती हैं। वकीलों के बहिष्कार से सरकार को प्रतिदिन ₹5 करोड़ से ₹10 करोड़ के स्टाम्प राजस्व का सीधा नुकसान हो रहा है।
  2. न्यायिक संकट: एडीएम कोर्ट और कलेक्ट्रेट में चल रहे हजारों राजस्व मुकदमों की तारीखें आगे बढ़ रही हैं, जिससे वादकारियों की परेशानी बढ़ गई है।
  3. प्रमाण पत्रों पर ब्रेक: आय, जाति और मूल निवास जैसे जरूरी दस्तावेजों की फाइलों पर वकीलों के न होने से काम रुक गया है।

सरकार के लिए बढ़ती मुश्किल

​एक तरफ प्रशासन अपनी कार्रवाई को जायज ठहरा रहा है, तो दूसरी तरफ वकील समुदाय का भारी दबाव है। चुनावी समीकरणों और जन-सरोकारों को देखते हुए सरकार इस मामले को ज्यादा लंबा नहीं खींचना चाहेगी। अब सवाल यह है कि क्या शासन वकीलों की मांग मानते हुए डीएम का तबादला करेगा, या फिर कोई बीच का रास्ता निकाला जाएगा?

डिस्क्लेमर: यह समाचार रिपोर्ट प्राप्त जानकारी और वर्तमान घटनाक्रमों पर आधारित है। UK Cyber News का उद्देश्य किसी व्यक्ति, पद या संस्था की छवि को धूमिल करना नहीं, बल्कि जनहित में सूचनाएं साझा करना है। इस विवाद से संबंधित सभी पक्षों के अपने-अपने तर्क हो सकते हैं और हमारा पोर्टल निष्पक्ष पत्रकारिता के सिद्धांतों का पालन करता है।

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Prem Padiyar

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Report By UK Cyber News