अन्ना हजारे के पुराने कार्यकर्ता फिर सक्रिय: उत्तराखंड से शुरू होगा नया लोक आंदोलन
किया राजनीति से दूरी का ऐलान

देहरादून:
अन्ना हजारे के 2011 के ऐतिहासिक भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से जुड़े रहे कार्यकर्ता एक बार फिर संगठित हो रहे हैं। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान इस मुहिम को लेकर नई रणनीति की शुरुआत का ऐलान किया गया है।
प्रेस वार्ता में मुख्य रूप से एक महिला प्रवक्ता ने आंदोलन की रूपरेखा साझा की। उनके साथ अन्ना हजारे के पुराने आंदोलन से जुड़े दो अन्य कार्यकर्ता भी मौजूद रहे।
क्या है नई रणनीति और आंदोलन का स्वरूप?
- संगठन का विस्तार: कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि अब पूरे देश में जिला, तहसील और गांव स्तर तक अध्यक्ष नियुक्त किए जाएंगे। इस मुहिम का लक्ष्य देश के 6 लाख ब्लॉकों तक अपनी पहुंच बनाना है।
- उत्तराखंड से शुरुआत: इस नई रणनीति का केंद्र बिंदु उत्तराखंड को बनाया गया है और यहीं से आंदोलन का शंखनाद किया जाएगा।
- लोकायुक्त की मांग: महाराष्ट्र में लागू लोकायुक्त का हवाला देते हुए, कार्यकर्ताओं ने कहा कि अब हर राज्य में लोकायुक्त को सख्ती से लागू करवाने के लिए वे दबाव बनाएंगे।
- राजनीति से दूरी: कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह लोक आंदोलन पूरी तरह से गैर-राजनीतिक रहेगा। उन्होंने कहा, “अगर कोई कार्यकर्ता चुनाव लड़ता है, तो वह पार्टी के ‘बॉस’ के अधीन हो जाता है, इसलिए हम निष्पक्ष रहकर ही अपना काम जारी रखेंगे।”
- कानूनी लड़ाई: इस दिशा में कदम उठाते हुए हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) भी दायर की गई है।
2011 के आंदोलन की यादें और वर्तमान चुनौतियां
कार्यकर्ताओं ने खुले तौर पर स्वीकार किया कि 2011 के आंदोलन के दौरान लगभग 95% लोग अरविंद केजरीवाल के साथ राजनीति में चले गए थे। अब यह मंच उन बचे हुए लोगों को फिर से एक साथ जोड़ने का प्रयास कर रहा है।
अन्ना हजारे, जिन्होंने 2011 में “भारत गांधी” के रूप में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई थी, उन्होंने बाद में आम आदमी पार्टी (AAP) से दूरी बना ली थी। अब जब देश में भ्रष्टाचार, किसान आंदोलन और बेरोजगारी जैसे मुद्दे फिर से चर्चा के केंद्र में हैं, उनके पुराने सहयोगी एक बार फिर मैदान में उतर आए हैं।
क्या है आगे का रास्ता?
आंदोलन के स्वरूप और समय को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं, जिनमें प्रमुख है कि उत्तराखंड को ही शुरुआत के लिए क्यों चुना गया? साथ ही यह भी कि क्या यह 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए एक दबाव समूह बनाने की कोशिश है?
इन सवालों के जवाब में कार्यकर्ताओं ने बताया कि फिलहाल उनका पूरा ध्यान अगले छह महीने तक संगठन निर्माण पर रहेगा। इसके तीन महीने बाद दिल्ली में एक बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें भविष्य की विस्तृत रणनीति तय की जाएगी।
समय ही बताएगा कि क्या अन्ना हजारे के पुराने सहयोगियों का यह मंच व्यापक जनसमर्थन जुटा पाएगा या यह चुनावी मौसम का महज एक छोटा अध्याय बनकर रह जाएगा।
नोट: यह न्यूज़ रिपोर्ट प्राप्त जानकारी के आधार पर तथ्यात्मक रूप से तैयार की गई है।



