नेपाल सरकार के टैक्स फरमान का विकृत रूप: क्या 10 रुपये के चिप्स भी अब टैक्स दायरे में?
व्यापार या उत्पीड़न?

UK Cyber News डेस्क)
भारत और नेपाल के बीच के संबंधों को हमेशा से ‘रोटी-बेटी’ का रिश्ता कहा जाता रहा है, लेकिन हाल के दिनों में सीमा पर जो तस्वीरें सामने आ रही हैं, वे इस मधुर संबंधों के दावे पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। नेपाल सरकार की नई टैक्स नीति ने सीमा पार करने वाले आम यात्रियों और पर्यटकों का जीना दूभर कर दिया है। 100 रुपये से अधिक के सामान पर 70 से 80 प्रतिशत तक का भारी टैक्स लगाने का नियम अब न केवल व्यापारिक मामलों तक सीमित है, बल्कि यह आम जनता के दैनिक जीवन में भी दखल देने लगा है।
नियम कानून के नाम पर चिंदी हरकतें क्यों?
वीडियो में आपने साफ तौर पर देखा जा सकता है कि किस तरह बॉर्डर पर यात्रियों को परेशान किया जा रहा है। सवाल सिर्फ टैक्स का नहीं, सवाल नीति के क्रियान्वयन (Implementation) का है। नेपाल सरकार ने नियम तो बना दिया कि 100 रुपये से ऊपर के सामान पर टैक्स लगेगा, लेकिन सीमा पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने इस नियम को एक ‘उत्पीड़न का हथियार’ बना लिया है।
क्या 10 या 15 रुपये के चिप्स और कुरकुरे के पैकेट, जो स्पष्ट रूप से बच्चों के लिए हैं, भी अब ‘टैक्स’ के श्रेणी में आते हैं? वीडियो में महिला की नाराजगी और हताशा साफ जाहिर है। एक मां जब अपने बच्चों के लिए खाने-पीने का सामान ले जाती है, तो वह उसे सीमा शुल्क (Customs Duty) के दायरे में देखना नहीं चाहती। प्रशासन का यह रवैया न केवल संवेदनहीन है, बल्कि यह साबित करता है कि जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों में सामान्य समझ (Common Sense) की कितनी कमी है।
नए प्रधानमंत्री के आने के बाद भी हालात जस के तस
नेपाल में नए नेतृत्व के आने के बाद जनता को उम्मीद थी कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में सुधार होगा, सीमा पार करना आसान होगा। लेकिन, ऐसी खबरें यह दिखाती हैं कि सुधार तो दूर, आम आदमी को पहले से भी अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। 100 रुपये के छोटे से दायरे के सामान को जब्त करना, वह भी बच्चों के खाद्य पदार्थों के साथ, यह किसी भी सूरत में एक जिम्मेदार सरकार की कार्यशैली नहीं हो सकती।
क्या नेपाल सरकार का ध्यान इन छोटी-छोटी हरकतों पर है?
यदि नेपाल सरकार का लक्ष्य राजस्व बढ़ाना है, तो उसे अपनी नीतियों को पारदर्शी और मानवीय बनाना होगा। इस तरह की अंधाधुंध कार्रवाई से केवल यात्रियों में असुरक्षा और नेपाल प्रशासन के प्रति नफरत ही पैदा होगी। क्या प्रशासन ने कभी सोचा है कि एक पर्यटक जो अपनी छुट्टियों में नेपाल घूमने या किसी पारिवारिक कार्यक्रम में जाने का सोच रहा है, क्या वह ऐसी चेकिंग और बदसलूकी के बाद दोबारा वहां जाना पसंद करेगा?
यह रिपोर्ट एक चेतावनी है कि यदि सीमा पर मानवीय संवेदनाओं को नहीं समझा गया, तो नेपाल का पर्यटन और भारत के साथ व्यापारिक संबंध दोनों ही प्रभावित होंगे। हम मांग करते हैं कि सीमा पर तैनात अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएं कि ‘आम यात्री के सामान’ और ‘व्यावसायिक तस्करी’ के बीच का अंतर समझा जाए।
आम जनता के लिए बॉर्डर का मतलब केवल एक लकीर नहीं, बल्कि सुविधा और सुरक्षा होनी चाहिए, न कि बच्चों के खाने को छीनने का केंद्र।
अस्वीकरण (Disclaimer):
यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी सरकारी संस्था या प्रशासन की छवि को धूमिल करना नहीं, बल्कि आम नागरिकों की व्यावहारिक समस्याओं को उचित मंच तक पहुँचाना है। हम कानून और सुरक्षा बलों का पूरा सम्मान करते हैं।



