उत्तराखंड की मालामाल कैबिनेट: किसी के पास करोड़ों का साम्राज्य, तो किसी के पास डिग्रियों का भंडार!
करोड़ों के 'कुबेर' और कर्ज के 'पहाड़': कैबिनेट का आर्थिक चिट्ठा

देहरादून। उत्तराखंड की सियासत में इन दिनों विकास की चर्चा कम और ‘विरासत’ की चर्चा ज्यादा हो रही है। चुनाव आयोग को दिए गए शपथ पत्रों के आधार पर जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले भी हैं और दिलचस्प भी। जहाँ एक ओर राज्य की आर्थिक स्थिति पर अक्सर चिंता जताई जाती है, वहीं हमारे माननीय मंत्रियों की निजी ‘आर्थिक स्थिति’ काफी सुदृढ़ नजर आती है।

धामी कैबिनेट के इन आंकड़ों ने जनता के बीच एक नई बहस छेड़ दी है कि आखिर ‘जनसेवा’ के इस मार्ग पर लक्ष्मी जी की इतनी विशेष कृपा कैसे बरसती है?
सतपाल महाराज: अमीरी के शिखर पर
कैबिनेट में अमीरी के पायदान पर सबसे ऊपर सतपाल महाराज विराजमान हैं। ₹87.34 करोड़ की चल-अचल संपत्ति के साथ वह पूरी कैबिनेट में सबसे रसूखदार मंत्री हैं। दिलचस्प बात यह है कि जहाँ अन्य मंत्रियों के सिर पर कर्ज का बोझ है, वहीं महाराज के पास ‘देनदारियों’ के नाम पर शून्य (0) है। यानी शुद्ध रूप से ‘किंग साइज’ लाइफ!
शिक्षा बनाम संपत्ति: एक अजीब विरोधाभास
आंकड़ों का सबसे मजेदार पहलू शिक्षा और संपत्ति के बीच का संतुलन है:
- डॉ. धन सिंह रावत: पीएचडी (PhD) जैसी सर्वोच्च डिग्री होने के बावजूद संपत्ति के मामले में वह काफी पीछे हैं (₹2.67 करोड़)।
- खजानदास: केवल आठवीं पास होने के बाद भी ₹2.38 करोड़ की संपत्ति के मालिक हैं।
- गणेश जोशी: 10वीं पास हैं लेकिन संपत्ति के मामले में करीब ₹10 करोड़ (₹9.74 करोड़) के आंकड़े को छू रहे हैं।
इसे देखकर आम आदमी यही सोच रहा है कि क्या वाकई ‘किताबी ज्ञान’ से ज्यादा ‘सियासी ज्ञान’ की कीमत अधिक है?
देनदारियों का पहाड़
सिर्फ संपत्ति ही नहीं, हमारे मंत्री कर्ज लेने में भी पीछे नहीं हैं। प्रदीप बत्रा इस मामले में अव्वल हैं, जिनकी संपत्ति ₹12 करोड़ है तो देनदारी भी ₹3.96 करोड़ के करीब है। वहीं रेखा आर्या ₹25.20 करोड़ की मालकिन हैं और उन पर ₹82.81 लाख का कर्ज है।
मुख्यमंत्री का नंबर सातवां
सबके कप्तान और सूबे के मुखिया पुष्कर सिंह धामी अमीरी की इस दौड़ में सातवें स्थान पर हैं। पोस्ट ग्रेजुएट सीएम के पास ₹4.64 करोड़ की संपत्ति और ₹47.83 लाख की देनदारी है।
एक नजर में मालामाल कैबिनेट (आंकड़े रुपयों में):
|
मंत्री का नाम |
चल-अचल संपत्ति |
देनदारियां |
शिक्षा स्तर |
|---|---|---|---|
|
सतपाल महाराज |
87,34,13,319 |
0 |
12वीं |
|
रेखा आर्या |
25,20,18,003 |
82,81,104 |
पोस्ट ग्रेजुएट |
|
प्रदीप बत्रा |
12,06,50,465 |
3,96,62,241 |
ग्रेजुएट |
|
गणेश जोशी |
9,74,33,938 |
64,76,881 |
10वीं |
|
सौरभ बहुगुणा |
7,85,95,219 |
12,54,820 |
ग्रेजुएट प्रोफेशनल |
|
मदन कौशिक |
6,78,37,298 |
52,29,132 |
पोस्ट ग्रेजुएट |
|
पुष्कर सिंह धामी |
4,64,78,080 |
47,83,461 |
पोस्ट ग्रेजुएट |
|
खजानदास |
2,38,12,816 |
3,42,000 |
8वीं पास |
|
डॉ. धन सिंह रावत |
2,67,63,303 |
0 |
पीएचडी |
|
भरत चौधरी |
2,32,05,421 |
50,00,000 |
ग्रेजुएट |
|
सुबोध उनियाल |
1,61,96,232 |
1,03,00,000 |
पोस्ट ग्रेजुएट |
|
राम सिंह कैड़ा |
1,37,01,562 |
93,255 |
पारदर्शिता ही लोकतंत्र की जीत
जनता अब जागरूक है। यह आंकड़े किसी की व्यक्तिगत आलोचना के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र में पारदर्शिता (Transparency) और जवाबदेही (Accountability) के लिए हैं। जब जनता को पता होता है कि उनके प्रतिनिधि की माली हालत क्या है, तभी लोकतंत्र की बुनियाद मजबूत होती है।
उम्मीद है कि जितनी तेजी से मंत्रियों की संपत्ति बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से उत्तराखंड के आम जनमानस के जीवन स्तर में भी सुधार आएगा।
करोड़ों के मालिक और बैंकों के कर्जदार: आखिर ये गणित क्या है?
पाठकों के लिए विशेष: आखिर ये देनदारियां आती कहाँ से हैं?
जब हम किसी मंत्री की करोड़ों की संपत्ति के साथ लाखों का कर्ज (देनदारी) देखते हैं, तो मन में सवाल उठता है कि इतने अमीर लोगों को उधार की क्या जरूरत? चुनाव आयोग को दिए हलफनामे के अनुसार, ये देनदारियां मुख्य रूप से इन 4 जगहों से आती हैं:
- बैंकों से लिया गया लोन (Bank Loans): इसमें सबसे बड़ा हिस्सा होम लोन, कार लोन या बिजनेस विस्तार के लिए लिए गए कर्ज का होता है। जैसे प्रदीप बत्रा जी की ₹3.96 करोड़ की देनदारी संभवतः उनके बड़े व्यावसायिक निवेश या संपत्तियों के लिए लिए गए बैंक लोन हो सकते हैं।
- सरकारी बकाया (Government Dues): कई बार मंत्रियों के नाम पर सरकारी बंगले का किराया, बिजली-पानी का बिल या अन्य सरकारी सेवाओं का भुगतान बाकी रहता है। नियमानुसार, एक रुपया भी बकाया हो तो उसे ‘देनदारी’ में दिखाना पड़ता है।
- निजी ऋण (Private Debts): राजनीति में कई बार चुनाव लड़ने या अन्य कार्यों के लिए दोस्तों, रिश्तेदारों या सहयोगियों से हाथ-उधार (Hand Loan) लिया जाता है। पारदर्शिता के नाते इसे भी हलफनामे में दर्ज करना अनिवार्य है।
व्यापारिक देनदारियां: यदि किसी मंत्री का अपना पेट्रोल पंप, होटल या कोई और बिजनेस है, तो माल सप्लाई करने वालों (Vendors) का जो भुगतान बाकी रहता है, वह भी इसी लिस्ट में आता है।
डिस्क्लेमर:-
नोट: ये सभी आंकड़े माननीय मंत्रियों द्वारा निर्वाचन आयोग को दिए गए शपथ पत्रों (Affidavits) पर आधारित हैं। ‘UK Cyber News’ केवल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सरकारी जानकारी को पाठकों तक पहुँचा रहा है।
(ब्यूरो रिपोर्ट: UK Cyber News)



