विशेष रिपोर्ट: आंदोलनकारियों के साथ अमानवीय व्यवहार! जर्जर भवन और बदबू के बीच कैद उत्तराखंड के लाल
मालसी PHC बना 'यातना गृह', जर्जर दीवारों और गंदगी के बीच कैद हैं देवभूमि के हक की आवाज उठाने वाले क्रांतिकारी।"

रिपोर्ट: अशोक बिष्ट (यूके साइबर न्यूज) चमोली/शिमली (कर्णप्रयाग)
संपादन: डेस्क, UKCyberNews
देहरादून/मालसी: उत्तराखंड की राजधानी में अपनी जायज मांगों और पुलिस ग्रेड-पे जैसे मुद्दों के लिए आवाज उठा रहे आंदोलनकारियों को दबाने के लिए सरकार ने दमनकारी रुख अपना लिया है। विधायकों का रास्ता रोकने के आरोप में गिरफ्तार किए गए उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) के कार्यकर्ताओं और युवाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) मालसी में बनी अस्थाई जेल में रखा गया है। हमारे सहयोगी अशोक बिष्ट की रिपोर्ट के अनुसार, वहां की स्थिति किसी यातना गृह से कम नहीं है।
1. जर्जर भवन और खतरनाक हालात
जिस बिल्डिंग में आंदोलनकारियों को रखा गया है, वह पूरी तरह जर्जर हो चुकी है। दीवारों से प्लास्टर गिर रहा है और छत की स्थिति ऐसी है कि कभी भी कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। आंदोलनकारियों की सुरक्षा को ताक पर रखकर उन्हें ऐसे ‘खतरनाक’ भवन में रखना सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाता है।
2. बदबू और गंदगी का अंबार
अस्थाई जेल बनाए गए इस परिसर में चारों तरफ गंदगी और असहनीय बदबू फैली हुई है। राज्य के हक-हकूक की बात करने वाले इन क्रांतिकारियों को ऐसी जगह रखा गया है जहां स्वस्थ व्यक्ति का भी दम घुट जाए। चमोली से आए हमारे सहयोगी अशोक बिष्ट ने बताया कि आंदोलनकारियों को बुनियादी सुविधाओं से भी वंचित रखा जा रहा है।
3. लोकतंत्र या तानाशाही?
विधायकों का घेराव करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन गिरफ्तार आंदोलनकारियों को ऐसी दयनीय स्थिति में रखना मानवाधिकारों का सीधा उल्लंघन है। क्या सरकार को लगता है कि जर्जर भवनों और बदबूदार कमरों में रखकर वह इन क्रांतिकारियों के हौसले तोड़ देगी?
हौसले बुलंद: गिरफ्तारी देने वाले प्रमुख आंदोलनकारी
व्यवस्था के खिलाफ हुंकार भरते हुए और राज्य के हक की खातिर ‘यातना गृह’ जैसी इस अस्थाई जेल में जाने वाले जांबाजों में ये नाम प्रमुखता से शामिल हैं:
चमोली जिला अध्यक्ष युद्धवीर सिंह नेगी, रुद्रप्रयाग जिला अध्यक्ष एस.एस. झिंक्वाण, उमा शंकर नेगी, यशपाल सिंह नेगी, आशीष नेगी, दीपक फर्स्वाण, दीपक राणा, मोहित फर्स्वाण, प्रेम सिंह राणा, जगदीप राम, हेमा गाड़िया, पूजा दानू, राजेश्वरी बर्त्वाल, लक्ष्मण सिंह नेगी, अशोक बिष्ट, जमान सिंह, पंकज पुरोहित, प्रकाश राम और बबीता देवी समेत सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने पूरी निडरता के साथ अपनी गिरफ्तारी दी।
जनता की अदालत में सवाल:
- क्या राज्य के आंदोलनकारियों को ‘यातना गृह’ जैसी स्थितियों में रखना सही है?
- स्वास्थ्य केंद्र जैसी जगह को इतना जर्जर और गंदा क्यों छोड़ दिया गया है?
क्या सरकार को इन युवाओं के स्वास्थ्य की कोई चिंता नहीं है?
नोट: यह रिपोर्ट जनहित में जारी की गई है। इसमें व्यक्त विचार और दिखाई गई स्थितियां धरातलीय हकीकत पर आधारित हैं। पोर्टल का उद्देश्य निष्पक्ष पत्रकारिता के माध्यम से जनता की आवाज सरकार तक पहुँचाना है।”


