UK Cyber Newsग्लोबलटेक्नोलॉजीदुनियासोशल मीडिया

धरती का वो रहस्यमयी छेद, जिसे कहते हैं ‘नर्क का द्वार’

12 किलोमीटर गहरा गड्ढा और खौफनाक हकीकत

UK Cyber News Special Report

देहरादून/रूस:

इंसान ने आसमान को फतह कर लिया है, चांद पर कदम रख दिया है और अब मंगल पर बसने की तैयारी है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस धरती पर हम रहते हैं, उसके अंदर झांकने की एक ऐसी ही कोशिश इंसान के लिए ‘खौफ’ का सबब बन गई थी? आज हम आपको बता रहे हैं दुनिया के उस सबसे गहरे गड्ढे के बारे में, जिसे रूस ने वैज्ञानिक शोध के लिए खोदा था, लेकिन जिसे आज दुनिया ‘नर्क का दरवाजा’ (Door to Hell) कहती है।

कोला सुपरदीप बोरहोल: जब फटने लगी धरती की छाती

​साल 1970 में सोवियत संघ (रूस) के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी रेस शुरू की जो अंतरिक्ष की नहीं, बल्कि पाताल की थी। रूस के कोला प्रायद्वीप पर ड्रिलिंग शुरू हुई। मकसद था— पृथ्वी की सतह के जितना हो सके अंदर जाना। करीब 19 साल की मेहनत के बाद वैज्ञानिक 12,262 मीटर (करीब 12.2 किलोमीटर) की गहराई तक पहुँच गए।

कल्पना कीजिए: यह गहराई दुनिया के सबसे ऊंचे पहाड़ माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई से भी कहीं ज्यादा है!

क्यों रुक गई खुदाई? क्या वाकई सुनाई दी थीं चीखें?

​इस प्रोजेक्ट को लेकर दुनिया भर में कई डरावनी कहानियां मशहूर हैं। कहा जाता है कि जब ड्रिल मशीन 12 किमी नीचे पहुँची, तो वैज्ञानिकों को माइक्रोफोन में ऐसी आवाजें सुनाई दीं जो ‘इंसानी चीखों’ जैसी थीं। हालांकि, वैज्ञानिक तौर पर खुदाई रुकने की असल वजह कुछ और थी:

  • उबलती चट्टानें: 12 किमी की गहराई पर तापमान 180°C तक पहुँच गया था। वहां की चट्टानें ठोस रहने के बजाय प्लास्टिक की तरह पिघलने लगी थीं।
  • मशीनों का फेल होना: इतनी गर्मी में ड्रिलिंग मशीन के दांत पिघल रहे थे।
  • प्रेशर: पृथ्वी के अंदर का दबाव इतना अधिक था कि आगे खुदाई करना असंभव हो गया।

वैज्ञानिकों के हाथ क्या लगा?

​इतनी गहराई में जाने के बाद जो मिला, उसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया:

  1. पानी का मिलना: इतनी गहराई में वैज्ञानिकों को गर्म पानी के संकेत मिले, जिसकी उम्मीद किसी को नहीं थी।
  2. सूक्ष्म जीव: लाखों साल पुराने सूक्ष्म जीवों के अवशेष (Fossils) मिले, जो इतनी गर्मी में भी मौजूद थे।
  3. अरबों साल पुरानी चट्टानें: वहां मिली चट्टानें करीब 2.7 अरब साल पुरानी थीं।

आज क्या है इस गड्ढे का हाल?

​आज यह जगह पूरी तरह वीरान और खंडहर हो चुकी है। 12 किमी गहरे इस छेद को एक भारी-भरकम लोहे के ढक्कन से सील कर दिया गया है। स्थानीय लोग आज भी वहां जाने से डरते हैं।

एक नज़र अन्य विशाल गड्ढों पर:

  • बिंगघम कैन्यन माइन (अमेरिका): दुनिया का सबसे बड़ा खुला गड्ढा, जो इतना विशाल है कि अंतरिक्ष से भी साफ़ दिखता है।
  • किम्बरली ‘बिग होल’ (दक्षिण अफ्रीका): दुनिया का सबसे बड़ा गड्ढा जिसे इंसानों ने बिना मशीनों के, अपने हाथों से खोदा था।

संपादकीय टिप्पणी:

इंसानी जिज्ञासा की कोई सीमा नहीं है, लेकिन कोला सुपरदीप बोरहोल ने यह साबित कर दिया कि कुदरत के भी अपने कुछ दायरे हैं। विज्ञान और रहस्य के बीच की यह 12 किलोमीटर गहरी खाई आज भी हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हमारे पैरों के नीचे की दुनिया कितनी अनजानी है।

इस रिपोर्ट में प्रस्तुत तथ्य वैज्ञानिक शोध और ऐतिहासिक अभिलेखों पर आधारित हैं। लेख में प्रयुक्त ‘नर्क का द्वार‘ जैसे शब्द केवल जनश्रुतियों और इस प्रोजेक्ट को दिए गए चर्चित उपनामों का संदर्भ देते हैं। हमारा उद्देश्य केवल ऐतिहासिक और वैज्ञानिक जानकारी साझा करना है।

UK Cyber News

Prem Padiyar

साइबर ठगी एवं डिजिटल अरेस्ट के कारण करोड़ों रुपयों की ठगी के मामले सामने आ रहे है, ये ठग अलग अलग माध्यम से लोगों को ठगते है। कभी पुलिस ऑफिसर बनकर, कभी कोरियर डिलीवरी बॉय बनकर, कभी बैंक कर्मचारी या कभी किसी सरकारी संस्थान के कर्मचारी बनकर, कभी ये राशन कार्ड / आधार कार्ड अपडेट तो कभी आयुष्मान कार्ड अपडेट के नाम पर लोगों को ठगते है, कभी मुसीबत में फंसे करीबी रिश्तेदार या दोस्त बनकर आमजन को ठगते हैं। इनसे बचने का एक मात्र तरीका जागरूकता है। इसके शिकार महिलाएं एवं बुजुर्ग ज्यादातर बनते है, हमारा उद्देश्य रहेगा कि समय समय पर आप लोगों तक साइबर क्राइम की जानकारी एवं सुरक्षा के उपाय पहुंचाया जाय, जिससे हर आदमी साइबर ठगी का शिकार होने से बच सके और अपनी गाढ़ी कमाई को बचा सके, साथ ही हमारी कोशिश रहेगी कि देश दुनिया की तमाम खबरें आप तक पहुंचाई जा सके।

Related Articles

Back to top button
Report By UK Cyber News