उत्तराखंड

पहाड़ से लोग नहीं,भरोसा खिसक रहा है।

यह लेख पहाड़ों में बढ़ते पलायन को केवल रोजगार की समस्या नहीं, बल्कि भरोसे के संकट के रूप में देखने का एक विश्लेषणात्मक प्रयास है।

दिनेश पंत
स्वतंत्र विश्लेषक :-

जब अपने ही घर में रहना जोखिम बन जाए :-

पहाड़ से पलायन कोई नई या अचानक उत्पन्न हुई समस्या नहीं है। यह एक लंबी प्रक्रिया है, जो वर्षों से अलग-अलग रूपों में सामने आती रही है। फर्क यह है कि पहले लोग बेहतर अवसरों की तलाश में पहाड़ से बाहर जाते थे, जबकि आज वे इस विश्वास को खोकर जा रहे हैं कि पहाड़ में भविष्य सुरक्षित और स्थिर हो सकता है।
आज पहाड़ का युवा यह सवाल नहीं करता कि उसे नौकरी कब मिलेगी। उसके मन में अब यह विचार ज्यादा गहरा है कि क्या यहाँ रुकना एक समझदारी भरा निर्णय है। यह सिर्फ बेरोज़गारी की चिंता नहीं है, बल्कि जीवन की बुनियादी स्थिरता को लेकर पैदा हुई असमंजस की स्थिति है।
सरकारी आँकड़े यह बताते हैं कि कितने गाँव खाली हुए और कितनी जनसंख्या घटी। लेकिन ये आँकड़े यह नहीं बताते कि कितने घर आज भी खड़े हैं, जिनमें रहने का भरोसा धीरे-धीरे खत्म हो रहा है। जो लोग आज भी पहाड़ में रह रहे हैं, वे केवल संसाधनों की कमी से नहीं जूझ रहे, बल्कि उस अनिश्चितता के साथ जीवन जी रहे हैं, जिसका कोई स्पष्ट और स्थायी उत्तर उन्हें दिखाई नहीं देता।

विकास की योजनाएँ पहाड़ के लिए नई नहीं हैं।

हर वर्षों में नई घोषणाएँ होती हैं और नई योजनाएँ सामने आती हैं। समस्या योजनाओं की संख्या की नहीं, बल्कि उनके ज़मीनी जीवन में निरंतर रूप से दिखाई देने की है। सड़कें स्वीकृत हो जाती हैं, लेकिन हर मौसम में सुचारु रहें, यह भरोसा नहीं बन पाता। अस्पताल चिन्हित होते हैं, लेकिन समय पर और पर्याप्त इलाज मिलेगा, यह विश्वास कमजोर रहता है। यही वह बिंदु है जहाँ व्यवस्था और नागरिक के बीच भरोसा दरकने लगता है।
अक्सर यह मान लिया जाता है कि पलायन का मुख्य कारण रोज़गार की कमी है। यह कारण महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन पूरा सच नहीं है। अगर केवल रोज़गार ही वजह होता, तो सीमित अवसर भी कुछ लोगों को रोक लेते। असल समस्या है भविष्य को लेकर असुरक्षा की भावना। यह डर कि आज जो व्यवस्था है, वह कल भी वैसी ही रहेगी या नहीं।

पहाड़ का समाज मेहनत से भागने वाला समाज नहीं है।

कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद उसने संतुलन के साथ जीवन जीना सीखा है। लेकिन वह तब टूटता है, जब उससे बार-बार सिर्फ धैर्य रखने की अपेक्षा की जाती है और बदले में ठोस भरोसे के बजाय अस्थायी आश्वासन मिलते हैं। यह किसी एक सरकार या प्रशासन पर आरोप नहीं है, बल्कि एक ऐसी सोच पर प्रश्न है जो पहाड़ को सहनशील तो मानती है, लेकिन स्थायी समाधान के योग्य नहीं समझती।
यह कहना आसान है कि लोग बेहतर जीवन की चाह में पहाड़ छोड़ रहे हैं। सच्चाई यह है कि कोई भी व्यक्ति अपनी मिट्टी, अपनी पहचान और अपने घर को खुशी-खुशी नहीं छोड़ता। वह तब मजबूर होता है, जब पहाड़ में रुकना भावनात्मक नहीं, बल्कि व्यावहारिक रूप से भी कठिन हो जाता है।
आज पहाड़ को सहानुभूति या भावनात्मक भाषणों की नहीं, बल्कि स्थायित्व और भरोसे की आवश्यकता है। ऐसी नीतियों की, जो केवल घोषणा बनकर न रहें, बल्कि लोगों के रोज़मर्रा के जीवन में लगातार दिखाई दें। जब तक यह भरोसा नहीं बनता, तब तक पलायन को रोकना संभव नहीं होगा।

अगर हालात ऐसे ही बने रहे, तो चिंता सिर्फ खाली होते गाँवों की नहीं होगी। असली चिंता होगी खाली होता भरोसा, क्योंकि घर छोड़ना एक निर्णय होता है, लेकिन भरोसे का टूटना एक मजबूरी। जब कोई समाज यह मानने लगे कि अपने ही घर में रहना जोखिम भरा है, तब पलायन कोई विकल्प नहीं रह जाता, वह आवश्यकता बन जाता है।

जब पहाड़ में रहना ही असुरक्षित महसूस होने लगे, तो यह सवाल नहीं पूछा जाना चाहिए कि लोग क्यों जा रहे हैं, बल्कि यह सोचना चाहिए कि उन्हें रुकने की वजह आखिर क्यों नहीं मिल पा रही है।

Disclaimer :-
लेखक के व्यक्तिगत विचारों पर आधारित यह लेख किसी भी संस्था या सरकारी विभाग का आधिकारिक दृष्टिकोण नहीं दर्शाता। इसका उद्देश्य केवल सामाजिक और विकास संबंधी विषयों पर चर्चा और सोच उत्पन्न करना है।

UK Cyber News

Prem Padiyar

साइबर ठगी एवं डिजिटल अरेस्ट के कारण करोड़ों रुपयों की ठगी के मामले सामने आ रहे है, ये ठग अलग अलग माध्यम से लोगों को ठगते है। कभी पुलिस ऑफिसर बनकर, कभी कोरियर डिलीवरी बॉय बनकर, कभी बैंक कर्मचारी या कभी किसी सरकारी संस्थान के कर्मचारी बनकर, कभी ये राशन कार्ड / आधार कार्ड अपडेट तो कभी आयुष्मान कार्ड अपडेट के नाम पर लोगों को ठगते है, कभी मुसीबत में फंसे करीबी रिश्तेदार या दोस्त बनकर आमजन को ठगते हैं। इनसे बचने का एक मात्र तरीका जागरूकता है। इसके शिकार महिलाएं एवं बुजुर्ग ज्यादातर बनते है, हमारा उद्देश्य रहेगा कि समय समय पर आप लोगों तक साइबर क्राइम की जानकारी एवं सुरक्षा के उपाय पहुंचाया जाय, जिससे हर आदमी साइबर ठगी का शिकार होने से बच सके और अपनी गाढ़ी कमाई को बचा सके, साथ ही हमारी कोशिश रहेगी कि देश दुनिया की तमाम खबरें आप तक पहुंचाई जा सके।

Related Articles

Back to top button
Report By UK Cyber News