
शेरो 💥 तंज
अभी कुछ बोल दूँ तो हंगामा तय है,
इसलिए ख़ामोशी को ही बयान मान लिया।
जो जेब में नहीं, उसे भी अपना बता दिया,
डॉलर को ही हमने अब रुपया मान लिया।
रुपये की क़ीमत पूछी तो सन्नाटा मिला,
इस बाज़ार में हर मौन को ज्ञान मान लिया।
हिसाब बिगड़ा तो नज़रें फेर लीं हमने,
घाटा छुपाने को इसे उत्थान मान लिया।
कहना बहुत कुछ था,मगर वक़्त के डर से,
गिरते रुपये को ही समझौते को समाधान मान लिया।



