उपनल कर्मियों के नियमितीकरण पर उत्तराखंड हाईकोर्ट सख्त
सरकार की दलील- पड़ेगा ₹1300 करोड़ का अतिरिक्त बोझ

देहरादून/नैनीताल:
उत्तराखंड में विभिन्न सरकारी विभागों के भीतर सेवाएं दे रहे उपनल (UPNL) कर्मचारियों के नियमितीकरण का मामला एक बार फिर गरमा गया है। नैनीताल हाईकोर्ट में इस संबंध में दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। वहीं दूसरी ओर, सरकार ने वित्तीय संकट का हवाला देते हुए कोर्ट से निर्णय लेने के लिए और समय की मांग की है।
न्यायालय ने जताई कड़ी नाराजगी, पूछा- अफसरों पर आरोप तय क्यों न हों?
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ में हुई। सरकार द्वारा मामले को टालने और बार-बार अतिरिक्त समय मांगे जाने पर कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया।
न्यायालय ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा:
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अदालती आदेशों का समय पर पालन न करना सीधे तौर पर मानहानि (Contempt of Court) की श्रेणी में आता है।
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कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए पूछा कि आदेश का अनुपालन न करने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ चार्ज (आरोप) क्यों न तय किए जाएं?
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इस मामले में कैबिनेट के फैसले और नीतिगत निर्णय के लिए कोर्ट ने राज्य सरकार को अंतिम मौका देते हुए 28 मई तक का समय दिया है।
सरकार की दलील: पड़ेगा ₹1300 करोड़ का वित्तीय भार
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से पक्ष रखते हुए कहा गया कि उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण निगम (UPNL) के माध्यम से संविदा और आउटसोर्स पर काम कर रहे हजारों कर्मचारियों को यदि तुरंत नियमित (पक्का) किया जाता है, तो राज्य के खजाने पर लगभग 1300 करोड़ रुपये का अतिरिक्त सालाना वित्तीय बोझ पड़ेगा। इसी भारी-भरकम बजट और वित्तीय व्यवस्थाओं को संतुलित करने के लिए सरकार ने अदालत से कुछ और समय मांगा है।
क्या है पूरा विवाद और पृष्ठभूमि?
उत्तराखंड के स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, वन और लोक निर्माण जैसे कई अहम विभागों में पिछले कई वर्षों से लगभग 20,000 से 22,000 उपनल कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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साल 2018 का आदेश: नैनीताल हाईकोर्ट ने 2018 में ही सरकार को आदेश दिया था कि इन संविदा कर्मियों को चरणबद्ध तरीके से नियमित किया जाए और जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक इन्हें ‘समान कार्य के लिए समान वेतन’ दिया जाए।
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सुप्रीम कोर्ट से भी मिली थी निराशा: राज्य सरकार इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई थी, लेकिन वहां से भी सरकार की एसएलपी (याचिका) खारिज हो गई थी।
कर्मचारियों में नया आक्रोश: नए अनुबंध और GST पर रार
अदालती कार्यवाही के बीच उपनल संविदा कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों ने चिंता जताई है कि एक तरफ जहां कोर्ट पक्का करने का आदेश दे चुका है, वहीं दूसरी तरफ सरकार कर्मचारियों के वेतन से जीएसटी (GST) काटने और संविदा पर रखने के लिए नए अनुबंध (New Contract Formats) की प्रक्रिया शुरू कर रही है। कर्मचारियों का आरोप है कि यह कदम पुराने अदालती आदेशों और उनके हितों के बिल्कुल विपरीत है। अब सभी की नजरें 28 मई को होने वाली कैबिनेट के रुख और कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।



