मित्रता, सेवा और सुरक्षा का जीवंत उदाहरण: उत्तराखंड पुलिस ने खुद पसीना बहाकर खोला बद्रीनाथ राजमार्ग
बद्रीनाथ हाईवे पर दिखा जवानों का असली जज्बा

चमोली/जोशीमठ:
देवभूमि उत्तराखंड की पुलिस ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि ‘मित्रता, सेवा और सुरक्षा’ केवल उनके स्लोगन का हिस्सा नहीं, बल्कि उनके कार्य करने की शैली है। बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर आए संकट के बीच पुलिस के जवानों ने जिस तत्परता और समर्पण का परिचय दिया, उसकी चारों ओर प्रशंसा हो रही है।
बैलाकूची-टंगनी में थमी थी राहें
मिली जानकारी के अनुसार, बद्रीनाथ राजमार्ग के बैलाकूची और टंगनी क्षेत्र में अचानक पहाड़ी से भारी मलबा और अवरोध आने के कारण मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया था। हाईवे पर आवाजाही ठप होने से तीर्थयात्री और स्थानीय निवासी घंटों बीच राह में फंस गए। छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ सफर कर रहे यात्रियों के लिए यह समय काफी कठिन साबित हो रहा था।
जब जवानों ने संभाली खुद कमान
सड़क खुलने के इंतजार में लगी लंबी कतारों के बीच, मौके पर तैनात उत्तराखंड पुलिस के जवानों ने विभाग या मशीनों का इंतजार करने के बजाय खुद मोर्चा संभाला। खाकी वर्दी की मर्यादा और सेवाभाव को सर्वोपरि रखते हुए जवानों ने हाथों में गैंती और सब्बल उठाए और सड़क से भारी पत्थर और मलबा हटाना शुरू कर दिया।
कड़ी मशक्कत और जवानों के पसीने की बूंदों ने रंग दिखाया और देखते ही देखते बंद हाईवे को सुचारू कर दिया गया।
यात्रियों ने कहा-ये असली देवदूत
जैसे ही वाहनों के पहिए दोबारा घूमे, यात्रियों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई। फंसे हुए लोगों ने पुलिस के इस जज्बे को सलाम करते हुए कहा कि संकट की इस घड़ी में जवानों ने असली सेवाभाव का परिचय दिया है। लोगों का कहना था कि पुलिस ने केवल कानून व्यवस्था ही नहीं संभाली, बल्कि एक रक्षक और सहायक की भूमिका बखूबी निभाई।
अक्सर चर्चाओं में रहने वाली खाकी का यह मानवीय चेहरा सुकून देने वाला है। बैलाकूची में जवानों की यह मेहनत यह बताने के लिए काफी है कि उत्तराखंड पुलिस दुर्गम परिस्थितियों में भी जनता के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।
ब्यूरो रिपोर्ट: UK Cyber News
(सत्य, साहस और सरोकार)
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